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जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के नाम होंगे सार्वजनिक

नम्रता आचार्य / कोलकाता June 23, 2019

बैंक अब जानबूझकर चूक करने वाले कॉर्पोरेट जगत के लोगों के नामों का खुलासा करने का अभियान तेज करने पर विचार कर रहे हैं। पिछले महीने उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति को बैंकों या वित्तीय संस्थानों ने जान बूझकर चूक करने वाला घोषित कर दिया है तो उसे कोई हक नहीं कि वह अपने वकील के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया में अपनी बात रखे। उसके बाद से बैंक अब सक्रिय हो गए हैं। 

हाल ही में कोलकाता के सार्वजनिक क्षेत्र के कर्जदाता यूको बैंक ने यशोवर्धन बिड़ला का नाम उनके फोटो के साथ जान बूझकर चूक करने वाले कर्जदार के रूप में प्रकाशित किया, क्योंकि उनकी फर्म बिड़ला सूर्या 67.65 करोड़ रुपये का पुनर्भुगतान करने में असफल रही है। यशोवर्धन यश बिड़ला समूह के चेयरमैन और बिड़ला सूर्या के निदेशक हैं। 

इसके पहले बैंक ऐसा करने से बचते थे, क्योंकि उन्हें डर था कि ऐसा करने से वे कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं। बहरहाल उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बैंकों ने कहा है कि इस मामले में स्पष्टता है। यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया के एमडी और सीईओ अशोक कुमार प्रधान ने कहा कि 6 से 8 महीने पहले बैंक के बोर्ड ने कोई नाम प्रकाशित न करने का फैसला किया था। बहरहाल अब कानून में स्पष्टता आ गई है और बैंक अपने फैसले की समीक्षा करेगा। सिंडिकेट बैंक के एमडी और सीईओ मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि बैंक कॉर्पोरेट डिफॉल्टरों के नाम प्रकाशित करेगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस सिलसिले में फैसला उच्चतम स्तर पर लिया जाएगा। 

सितंबर 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि कर्ज देने वाले कुछ संस्थान चूककर्ताओं व गारंटरों की फोटो अखबारों में बिना भेदभाव के प्रकाशित कर रहे हैं। इसमें कहा गया था कि कर्ज देने वाले संस्थानों को सिर्फ उन कर्जदारों के नाम व फोटो प्रकाशित करने पर विचार करना चाहिए, जो जान बूझकर कर्ज नहीं चुका रहे हैं, जो व्यवस्था रिजर्व बैंक ने जुलाी 2015 के निर्देशों में की है।

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