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वाहन क्षेत्र में नरमी से कलपुर्जा कंपनियों को झटका

पवन लाल / मुंबई June 23, 2019

वाहन क्षेत्र में नरमी का जबरदस्त प्रभाव उपकरण विनिर्माताओं पर दिखने लगा है। वाहन क्षेत्र में नरमी के कारण ऑर्डर घटने, इन्वेंटरी बढऩे और अनिश्चित भविष्य के कारण कलपुर्जा बनाने वाली सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई है। वाहन क्षेत्र में मौजूदा नरमी की प्रमुख वजहों में अगले साल से प्रभावी होने वाले जटिल कानून, विभिन्न श्रेणियों में तगड़ी प्रतिस्पर्धा और कमजोर ग्राहक धारणा शामिल हैं। पिछले एक दशक में मौजूदा नरमी की का प्रभाव कहीं अधिक व्यापक दिख रहा है और डीलर भी इसके चपेट में आ गए हैं जो अंतिम ग्राहक तक वाहनों का वितरण करते हैं।

आमतौर पर वाहन क्षेत्र के नियम-कानून में मामूली बदलाव से भी बिक्री प्रभावित हो जाती है। उदाहरण के लिए, पिछले साल माल ढुलाई के लिए लोड में करीब 25 फीसदी का इजाफा कर दिया गया था जिसका मतलब साफ है कि वाणिज्यिक वाहन ऑपरेटरों को समान भार वाले कार्गो की ढुलाई के लिए 10 वाहनों की जगह अब महज 8 वाहनों की जरूरत होगी। इसका शुद्ध प्रभाव वाहनों की बिक्री में 20 फीसदी की गिरावट होगा। हाल में वैश्विक ब्रोकरेज हाउस यूबीएस ने घरेलू यात्री कार बाजार की अग्रणी कंपनी मारुति सुजूकी बिक्री में भारी गिरावट के मद्देनजर उसकी रेटिंग को 'बाई' से घटाकर 'सेल' कर दिया था।

वाहन क्षेत्र में नरमी के कारण कलपुर्जा बनाने वाली कंपनियों की बाजार पूंजी घट रही है। वाहनों के लिए लाइटिंग उपकरण बनाने वाली प्रमुख कंपनी ल्यूमैक्स इंडस्ट्रीज भी इन चुनौतियों से जूझ रही है। ल्यूमैक्स के मुख्य कार्याधिकारी विनीत साहनी ने कहा, 'निश्चित तौर पर ल्यूमैक्स को भी इस नरमी का झटका लगेगा, लेकिन समूह की नजर भविष्य पर है और वह नियामकीय मानकों में बदलाव पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।' उन्होंने कहा कि ल्यूमैक्स अपने पूंजीगत खर्च में सख्ती बरत रही है और वह उभरती मांग के आधार पर भविष्य में निवेश करेगी।

मदरसन सूमी, सुंदरम क्लेटन और बॉश इंडिया को इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए मैसेज और फोन किए गए लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। यहां तक कि ईआरपी सिस्टम और कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग व्यापक पैमाने पर होने के बावजूद किसी भी उपकरण विनिर्माता के लिए यह एक चुनौती दिखती है जब कार बाजार की अग्रणी कंपनी मारुति सुजूकी ने अपने बिक्री अनुमान में करीब 20 फीसदी की कटौती की और कुछ मॉडलों को वापस लिया जा रहा है।

सूत्रों ने कहा कि जून में अशोक लीलैंड और मारुति सुजूकी जैसी कंपनियों ने कुछ दिनों के लिए उत्पाद बंद रखने का निर्णय लिया। घरेलू बाजार में वाहनों के कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों की संख्या करीब 800 हैं और उनका कुल कारोबार करीब 40 अरब डॉलर है। 

हालांकि कुछ वाहन कंपनियां ऐसी भी हैं जो इस नरमी से खास प्रभावित नहीं हुई हैं। वैरॉक ग्रुप के कारोबार प्रमुख (इलेक्ट्रिकल डिविजन) अर्जुन जैन ने कहा कि उनकी कंपनी भारत में कारोबार के लिए काफी हद तक बजाज ऑटो पर निर्भर है और इसलिए नरमी का उस पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा। उन्होंने कहा, 'हम इस बात की चिंता नहीं करते हैं कि बाजार में क्या हो रहा है बल्कि हमें दिख रहा है कि वृद्धि उतनी अच्छी नहीं रहेगी।' वाहनों के कलपुर्जा बनाने वाली कंपनियों के संगठन ऑटोमोटिव कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष राम वेंकटरामिनी ने कहा कि राहत की बात यह है कि कलपुर्जा बनाने वाली कंपनियां घरेलू एवं विदेशी बाजार में विभिन्न वाहन विनिर्माताओं को आपूर्ति करती हैं जिससे उन पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

फोर्जिंग, स्टाम्पिंग एवं गियर बनाने वाली कंपनी महिंद्रा सीआईई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रणनीति एवं निवेशक संबंध) विकास सिन्हा ने कहा, 'हम अपने सभी स्थायी लागत एवं पूंजीगत खर्च का गंभीरतापूर्वक आकलन कर रहे हैं और ग्राहकों में विविधता विशेष तौर पर निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश कर रहे हैं।'
Keyword: Vehicle, Order, Market, Spare Parts, Commercial Vehicle, UBS,
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