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आईटीसी: होटल में निवेश का मिल रहा फायदा

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता June 23, 2019

तंबाकू से लेकर होटल जैसे विविध क्षेत्रों में कारोबार करने वाली कंपनी आईटीसी को ईआईएच में किए गए निवेश का फायदा अब मिलने लगा है। ओबेरॉय शृंखला के होटलों का परिचालन करने वाली ईआईएच ने 2018-19 के लिए करीब 400 करोड़ रुपये का मार्क टु मार्केट लाभ दर्ज किया है।

कंपनी की ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ईआईएच में आईटीसी के निवेश का मूल्य 31 मार्च 2019 को 1,763.37 करोड़ रुपये था जो एक साल पहले 1,362.24 करोड़ रुपये रहा था। इसके विपरीत होटल क्षेत्र में आईटीसी के अन्य निवेश (होटल लीलावेंचर में) समान अवधि में 85.42 करोड़ रुपये से घटकर 54.45 करोड़ रुपये रह गया। 

होटल क्षेत्र में आईटीसी के दो निवेश की दिशा बिल्कुल अलग-अलग दिख रही है। हालांकि इन दोनों कंपनियों के शेयरों में निवेश लगभग बराबर यानी करीब 200 करोड़ रुपये का था। आईटीसी ने 2011 में ईआईच के राइट्स इश्यू के जरिये निवेश किया था। बाजार नियामक सेबी के अनुसार, आईटीसी ने 2000 से ही ईआईएच में खरीदारी शुरू कर दी थी जब यह शेयर 35 रुपये मूल्य पर कारोबार कर रहा था और खुली पेशकश के समय 15 फीसदी सीमा के करीब पहुंच कर वह रुक गई थी।

जहां तक ईआईएच के प्रवर्तकों का सवाल है तो यह हमेशा उनके लिए असहज रहा है। वर्ष 2010 में जब रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने अपनी एक निवेश इकाई के जरिये ईआईएच में 14.12 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी तो उद्योग के जानकारों का मानना था कि इससे आईटीसी द्वारा संभावित आक्रामक अधिग्रहण की रफ्तार थमेगी। जबकि आईटी ने हमेशा से कहा है कि उसकी ऐसी कोई मंशा नहीं है।

आरआईएल ने ईआईएच के प्रवर्तकों, पीआरए ओबेरॉय और दो अन्य प्रवर्तक कंपनियों- ओबेरॉय होटल्स एवं अरावली पॉलिमर्स से हिस्सेदारी खरीदी थी। इस सौदे के समय ईआईएच का मूल्यांकन करीब 7,200 करोड़ रुपये आंका गया था।

ईआईएच द्वारा स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, मार्च 2019 के अनुसार, ईआईएच में आईटीसी की हिस्सेदारी 14.98 फीसदी और उसकी सहायक इकाई रसेल क्रेडिट की हिस्सेदारी 1.15 फीसदी थी। ओपन ऑफर के जरिये खरीदारी की सीमा को 2011 में बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया था।

आईटीसी ने 2008 के आसपास होटल लीलावेंचर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी शुरू की थी। लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने उसे ईआईएच में रोक दिया। लीलावेंचर ने कहा था कि यदि आईटीसी से उसे कोई खतरा दिखता तो वह मुकेश अंबानी के साथ साझेदारी कर सकती थी।

हालांकि होटल श्रेणी में निवेश शुरू करने के बाद आईटीसी ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। साल 2000 में आईटीसी ने ईआईएच में पहला निवेश किया था और उस समय उसके पास चार होटल थे जबकि 2008 तक वह होटलों की संख्या बढ़ाकर सात करने में सफल रही। आज आईटीसी के पास 105 होटल (खुद के अथवा प्रबंधित) मौजूद हैं और लक्जरी होटल श्रेणी में उसकी हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी है।

होटल लीलावेंचर के साथ आईटीसी चार होटल एवं एक प्रॉपर्टी के लिए ब्रुकफील्ड के साथ संभावित लेनदेन के लिए अब नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में लड़ाई लड़ रही है। कंपनी अधिनियम की धारा 241 के तहत दायर याचिका में होटल लीलावेंचर पर दबाव डालने और कुप्रबंधन का आरोप लगाया गया है। होटल लीलावेंचर के प्रवर्तकों और कंपनी में 26 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली जेएम फाइनैंशियल ने अपनी दलील में कहा है कि आईटीसी पिछले दरवाजे से नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रही है। कंपनी में आईटीसी की 8.72 फीसदी हिस्सेदारी है। मामला फिलहाल एनसीएलटी के मुंबई पीठ में लंबित है।

Keyword: Tobacco, ITC Hotel, EIH, hotel, leela venture, Company, NCLT,
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