बिजनेस स्टैंडर्ड - कर चोरी पर सरकार सख्त
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कर चोरी पर सरकार सख्त

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 06 21, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आज हुई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की पहली बैठक में मुख्य रूप से कर चोरी रोकने के उपायों और उपभोक्ता हितों पर जोर रहा।   परिषद ने करों में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं को नहीं देने वाली कंपनियों पर सख्त जुर्माना लगाने का फैसला किया और साथ ही राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण (एनएए) का कार्यकाल भी दो साल के लिए बढ़ा दिया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि परिषद को मुनाफे की रकम की गणना के लिए कोई तरीका खोजना चाहिए। इसके अभाव में कंपनियां मनमानी कर रही हैं। 
 
बैठक के बाद राजस्व सचिव ए बी पांडेय ने बताया कि कर चोरी रोकने के लिए जीएसटी नेटवर्क पर पंजीकरण के लिए कंपनियों को आधार के इस्तेमाल की अनुमति देने के साथ ही इलेक्ट्रानिक इनवॉयस प्रणाली और मल्टीप्लेक्स में ई-टिकटिंग को भी मंजूरी दी गई। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'पंजीकरण के लिए आधार के इस्तेमाल की अनुमति देना अहम फैसला है और आने वाले समय में इसे आय कर के साथ भी जोड़ा जा सकता है।' इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दर को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी और इलेक्ट्रिक चार्जर पर 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने का प्रस्ताव फिटमेंट समिति को भेजा गया है। इस बारे में एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'परिषद का मानना था कि इस बारे में प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया था क्योंकि इस पर फिटमेंट समिति में चर्चा नहीं हुई थी।'
 
लॉटरी पर एकीकृत जीएसटी दर का विवादित मुद्दा एटॉर्नी जनरल को भेज दिया गया है। केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने कहा कि अगर इस मामले पर चर्चा होती है तो वह वोटिंग पर जोर देंगे। उन्होंने कहा, 'अब तक परिषद में सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। मुझे उम्मीद है कि यह परंपरा जारी रहेगी। अगर लॉटरी का एजेंडा आगे बढ़ाया जाता है तो मजबूरन मुझे मतदान की मांग करनी पड़ेगी।' सीतारमण ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले और संविधान के अनुच्छेद 304 के मद्देनजर लॉटरी का मामला एटॉर्नी जनरल को भेज दिया गया है। उच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया था कि परिषद लॉटरी पर जीएसटी नहीं लगा सकती है। अनुच्छेद 304 राज्य के आयातित वस्तुओं पर कर लगाने की अनुमति देता है जिसकी दर राज्य में उत्पादित वस्तुओं के समान है। पंजाब ने यह मुद्दा उठाया था। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'यह मामला खपत से जुड़ा है। अगर सरकारी और निजी लॉटरी का उपभोक्ता एक ही है तो दो अलग-अलग दरें कैसे हो सकती हैं।' अभी तक मुनाफाखोरी करने वाली कंपनियां अगर मुनाफे की रकम जमा नहीं करती हैं तो उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगता था। अब अगर कोई कंपनी आदेश जारी होने के बाद 30 दिन के भीतर मुनाफे की रकम जमा नहीं करती है तो उस पर इस राशि का दस फीसदी जुर्माना लगेगा। पांडेय ने कहा कि इससे दरों में कटौती का फायदा उपभोक्ताओं को मिलेगा। 
 
बैठक में ई-इनवॉइसिंग को सैद्घांतिक मंजूरी दी गई। परिषद ने इस व्यवस्था के प्रस्ताव को फिर से रखा है। वह इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइसिंग के विभिन्न मॉडलों पर काम कर रही है। पांडेय ने कहा कि ई-इनवॉयस को पोर्टल पर जेनरेट किया जा सकता है और यह ई-वे बिल की तरह काम कर सकता है। चूंकि यह पोर्टल पर है इसलिए इनवॉयस का संग्रह रिटर्न हो सकता है। एनएए का कार्यकाल नवंबर में खत्म हो रहा था और परिषद ने उसका कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया है। प्राधिकरण ने परिषद को बताया था कि वह करीब 354 मामलों की जांच कर रहा है। 
 
जैन ने कहा, 'एनएए का कार्यकाल दो साल तक बढऩे की उम्मीद की जा रही थी लेकिन हमें उम्मीद थी कि सरकार विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगी।' खेतान एंड कंपनी में पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'एनएए को विस्तार मिलने के बाद मुनाफे की रकम की गणना का तरीका बनाना और अहम हो गया है।' साथ ही जीएसटी व्यवस्था के तहत वार्षिक रिटर्न जमा कराने की तारीख दो महीने बढ़ाकर 30 अगस्त कर दी गई है। पांडेय ने यह भी बताया कि एक-फॉर्म वाली नई जीएसटी रिटर्न प्रणाली एक जनवरी, 2020 से लागू हो जाएगी।
Keyword: nirmala sitaraman, income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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