बिजनेस स्टैंडर्ड - 'आयात पर अंकुश के लिए बढ़े शुल्क'
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'आयात पर अंकुश के लिए बढ़े शुल्क'

रॉयटर्स / नई दिल्ली June 21, 2019

इस्पात मंत्रालय ने तैयार इस्पात उत्पादों पर आयात शुल्क तत्काल बढ़ाकर 15 फीसदी करने की मांग की है। इस समय इन उत्पादों पर आयात शुल्क 7.5 फीसदी से लेकर 12.5 फीसदी है। मंत्रालय ने इसके लिए चीन से आयात बढऩे और जरूरत से अधिक वैश्विक क्षमता के खतरे का हवाला दिया है।  इस्पात मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को शुल्कों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव आगामी 2019-20 बजट की सिफारिशों के तहत रखा है। बजट 5 जुलाई को पेश किया जाएगा। इस्पात मंत्रालय ने कहा, 'अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध से भारतीय बाजारों के लिए खतरा पैदा हो रहा है क्योंकि चीन अपने इस्पात निर्यात के लिए वैकल्पिक बाजार तलाश रहा है।' मंत्रालय ने स्थानीय मिलों पर जोखिम का हवाला देते हुए कहा कि देश के इस्पात क्षेत्र को सस्ते इस्पात आयात से सुरक्षा और कम इनपुट लागत की जरूरत है। 
 
मंत्रालय ने कहा, 'वैश्विक बाजार की संभावित प्रतिकूल स्थितियों से पैदा होने वाली आपात स्थिति से बचाव के लिए सभी इस्पात उत्पादों पर अधिकतम शुल्क दर बढ़ाकर 25 फीसदी की जा सकती है।' इसने कहा कि मौजूदा डंपिंग रोधी और काउंटरवेलिंग शुल्क इस्पात की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निष्प्रभावी हो गए हैं।  इस्पात मंत्रालय ने कहा कि अगर प्रस्तावित आयात शुल्कों को लागू किया गया तो सरकार का राजस्व 13.66 अरब रुपये बढ़ सकता है। हालांकि शुल्क में बढ़ोतरी का अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय करता है। हालांकि इसके बारे में इस्पात और वित्त मंत्रालय ने कोई टिप्पणी नहीं की। 
 
देश वित्त वर्ष 2018-19 में इस्पात का शुद्ध आयातक बन गया, जबकि पहले वह शुद्ध निर्यातक था। इसकी वजह यह थी कि घरेलू मांग में बढ़ोतरी हुई और जापान, कोरिया और चीन से आयात में इजाफा हुआ। जापान, कोरिया और आसियान के सदस्य देशों से 58 फीसदी इस्पात का आयात हुआ, जबकि 18 फीसदी इस्पात चीन से आया। आसियान के सदस्य देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते हैं। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल भारत के वायर रॉड और बार के आयात में 50 फीसदी हिस्सा चीन का रहा। वायर रॉड और बार लंबे इस्पात उत्पाद हैं, जिनका इस्तेमाल निर्माण में होता है। 
 
देश की चार सबसे बड़ी इस्पात विनिर्माता कंपनियों- जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड, टाटा स्टील लिमिटेड, सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), और जिंदल स्टील ऐंड पावर का देश के कुल इस्पात उत्पादन में 45 फीसदी योगदान है। ये इस्पात कंपनियां पिछले कुछ महीनों से शिकायत कर रही हैं कि भारत में इस्पात की डंपिंग हो रही है। इस्पात मंत्रालय ने मांग की  है कि कोकिंग कोल, इस्पात स्क्रैप और ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड पर आयात शुल्क कम किया जाए ताकि इस्पात बनाने के लिए कच्चे माल की लागत कम हो। 
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