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कार्यकर्ता की मेहनत को सम्मान

अर्चिस मोहन /  June 20, 2019

लोकसभा अध्यक्ष के पद पर ओम बिरला का चयन भारतीय जनता पार्टी की उस परिपाटी को इंगित करता है जिसके तहत 'निष्ठावान पार्टी कार्यकर्ता' को अहम भूमिका देने का प्रयास किया जाता है। अपने नए मंत्रिमंडल का चयन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई ऐसे मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जिन्हें 'बाहरी' माना जा रहा था। इनमें सुरेश प्रभु, मेनका गांधी, जयंत सिन्हा और राज्यवद्र्धन सिंह राठौर का नाम भी शामिल है। उज्जैन में फैक्टरी कर्मचारी के तौैर पर काम शुरू करने वाले भाजपा कार्यकर्ता और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद्र गहलोत अब राज्य सभा में पार्टी के नेता है। बिरला राजस्थान के कोटा-बूंदी लोकसभा सीट से दूसरी बार सांसद बने हैं और उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के पद के लिए चुना जाना अचंभित करने वाला कदम था। 56 वर्षीय बिरला पीढ़ीगत बदलाव को भी इंगित कर रहे हैं। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष के पद पर 76 वर्षीय सुमित्रा महाजन के स्थान पर चुना गया है। पार्टी द्वारा टिकट बंटवारे पर संदेह के बाद महाजन ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। 

 
इसका प्रभाव कांग्रेस पार्टी पर भी दिखाई दे रहा है जहां अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में पार्टी का नेता चुना गया है। पांचवीं बार लोकसभा सदस्य बने चौधरी को शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे कद्दावर नेताओं के बीच यह पद मिला है। बुधवार को बिरला सर्वसम्मति से लोकसभा अध्यक्ष चुन लिए गए। पहली बार वह 2014 में सांसद बने थे लेकिन उस दौरान राष्ट्रीय राजनीति में उनकी उपस्थिति नगण्य रही। राजस्थान में वह सहकारी आंदोलन और उपभोक्ता संरक्षण पहल जैसे सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे। इससे पहले बिरला साल 2003, 2008 और 2013 में कुल तीन बार कोटा दक्षिण सीट से विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2003-08 के वसुंधरा राजे सरकार में बिरला राज्य मंत्री पद के साथ संसदीय सचिव थे। 
 
लोकसभा वेबसाइट पर अपने परिचय में बिरला ने खुद को ऐसा व्यक्ति बताया है जो गरीब, असहाय और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की 'सामाजिक और वित्तीय' सहायता करते हैं। इसमें कहा गया, 'प्राकृतिक आपदाओं के शिकार लोगों को आश्रय, भोजन, और चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के साथ राहत कार्यों में सहायता करना।' बताया गया कि बिरला ने दिव्यांगों को मुफ्त में ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, कान का मशीन बांटी, रक्तदान शिविर कराए, वनीकरण के लिए अभियान चलाए और वह राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र में नियमित रूप से कुपोषण और बेरोजगारी दूर करने के प्रयास करते रहे हैं। 
 
रोचक बात यह है कि बुधवार सुबह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) द्वारा बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए नामित करने से पहले तक लोकसभा वेबसाइट पर उनके परिचय में लिखा था कि राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के लिए वह जेल भी गए थे। उन्होंने स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्राथमिक सदस्य भी बताया है। हालांकि उनके अद्यतन परिचय में ये दोनों जानकारियां नहीं हैं। परिचय में उनके द्वारा साल 2006 से नेहरू युवा केंद्र में आयोजित कराए गए खेल कार्यक्रमों, सामाजिक गतिविधियों के साथ साथ स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति, बलिदान तथा राष्ट्रवाद की भावना की याद में 'आजादी के स्वर' जैसे देशभक्ति से भरे कार्यक्रम कराने की भी चर्चा है। बिरला ने गरीबों के लिए कपड़े, कंबल और दवाइयां एकत्रित करने के भी कई अभियान चलाए हैं। बिरला अपेक्षाकृत संपन्न परिवार से आते हैं। उनके पिता श्रीकांत बिरला सहकारी आंदोलन से जुड़े थे। वह वर्ष 1992 से 1995 के दौरान राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ के अध्यक्ष रहे। वह नई दिल्ली स्थित नैशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष भी रहे। बिरला कॉलेज के दिनों में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के सक्रिय सदस्य रहे हैं। वह छह साल तक युवा इकाई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर रहे। भाजपा के हालिया कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डïा उस समय युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे। उन्होंने अजमेर के महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से वणिज्य में स्नातक की शिक्षा ग्रहण की है। उनकी पत्नी चिकित्सक है और उनकी दो बेटियां हैं। मित्र, सहयोगी और प्रतिद्वंद्वी, सभी इस बात से सहमत हैं कि बिरला हमेशा चेहरे पर मुस्कान रखने वाले एक मिलनसार व्यक्ति हैं। हालांकि उन्हें कुछ विवादों का भी सामना करना पड़ा है लेकिन राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में उनके पूर्व निजी सचिव महेंद्र गौतम द्वारा दायर किया गया अवैध संपत्ति का मामला खारिज कर दिया था। 
 
तीन बार राजस्थान के विधायक रहे बिरला का सांसद के तौर पर यह दूसरा ही कार्यकाल है और लोकसभा अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति उस परिपाटी से अलग है जहां अधिक अनुभवी सांसद को ही यह पदभार दिया जाता था। साल 2004 में 10 बार लोकसभा सदस्य रहे सोमनाथ चटर्जी को लोकसभा अध्यक्ष चुना गया था। उनके बाद वर्ष 2009 में पांच बार सांसद रहीं मीरा कुमार को लोकसभा अध्यक्ष चुना गया और आठ बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन वर्ष 2014 में लोकसभा अध्यक्ष बनीं।
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