बिजनेस स्टैंडर्ड - तकनीक के सहारे होगा नया शीत युद्ध
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, August 22, 2019 08:33 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

तकनीक के सहारे होगा नया शीत युद्ध

श्याम सरन /  June 20, 2019

अमेरिका और चीन के बीच मौजूदा द्वंद्व के मूल में तकनीकी उन्नति की होड़ भी है। इसका रक्षा-सुरक्षा क्षेत्र से सीधा संबंध है। भारत को भी इस पर ध्यान देना होगा। विस्तार से जानकारी दे रहे हैं श्याम सरन

 
अमेरिका और चीन एक ऐसे सामरिक विवाद में उलझे हुए हैं जो निकट भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेगा। इस विवाद में ऐसे दौर भी आ सकते हैं जो हमने पिछली सदी में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के दौरान देखे। परंतु ये अस्थायी होंगे। दोनो देशों की प्रतिद्वंद्विता शीतयुद्ध की तरह सैन्य और वैचारिक स्तर तक नहीं जाएगी। नया शीत युद्ध तकनीक में प्रवीणता पर होगा जहां वही ताकत का प्रतीक होगी। फिलहाल अमेरिका चीन के खिलाफ कई तरह के तकनीकी अवरोध तैयार कर रहा है और अपने साझेदारों और मित्र राष्ट्रों को भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह आसान नहीं है क्योंकि चीन  की अर्थव्यवस्था बहुत गहराई से शेष विश्व से जुड़ी हुई है और वह कई अहम आपूर्ति शृंखलाओं का हिस्सा भी है। उसे यूं जल्दबाजी में अलग-थलग नहीं किया जा सकता है। बीते दो दशक के दौरान चीन बहुत बड़े पैमाने पर और बहुत व्यवस्थित तरीके से पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका से उन्नत तकनीक हासिल करता और उसे अपनाता रहा है। सन 1978 में सुधारवादी और उदारीकरण की नीति अपनाने के बाद चीन ने अपने हजारों युवाओं को विश्वस्तरीय पश्चिमी संस्थानों में अध्ययन के लिए भेजा और उनके माध्यम से अकूत ज्ञान संचय किया। इसके साथ ही चीन में वह बुनियादी सुधार आरंभ हुआ जहां वह तकनीक चाहने वाले से तकनीक तैयार करने वाला बना। इससे न केवल बीते चार दशक में उच्च स्तरीय आर्थिक वृद्धि हासिल करने में कामयाब रहा बल्कि उसने आधुनिक और तकनीक संपन्न सैन्य उपकरण बनाने में भी कामयाबी हासिल की। अमेरिका के कदम चीन के शक्ति संचय में कमी ला सकते हैं, लेकिन जब तक घरेलू राजनीतिक विसंगति का हस्तक्षेप नहीं होता, लगता नहीं कि हालात उलटेंगे। इसकी आशंका बहुत कम है क्योंकि तकनीकी क्षमताएं अब व्यापक निगरानी तक पहुंच गई हैं और घरेलू सुरक्षा चुनौतियों को भी तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सकती है। 
 
तकनीकी पहुंच पर रोक की प्रतिक्रिया स्वरूप चीन अपने घरेलू नवाचार और विकास पर दोगुना जोर दे रहा है। वह कई मूलभूत प्रौद्योगिकी विकसित कर रहा है जो चीन 2025 योजना का हिस्सा हैं। इसमें आईटी, मशीन शिक्षण, क्वांटम कंप्यूटिंग और कृत्रिम मेधा जैसी चीजें शामिल हैं। फिलहाल चीन सेमी कंडक्टर के मामले में पीछे है और वर्ष 2018 में उसने करीब 30,000 करोड़ डॉलर मूल्य के सेमी कंडक्टर का आयात किया।  अब इस क्षेत्र में भारी निवेश की घोषणा की गई है। अगले कुछ वर्ष में इस क्षेत्र में 10,000 से 15,000 करोड़ डॉलर का निजी और सार्वजनिक निवेश किया जाएगा। बायडू, अलीबाबा और हुआवे जैसी चीन की बड़ी कंपनियां अपनी माइक्रोचिप बनाने पर काम कर रही हैं। अलीबाबा ने गत वर्ष सितंबर में अपना सेमी कंडक्टर विभाग पिंगटोग शुरू किया ताकि कृत्रिम मेधा वाली चिप बनाई जा सकें। इनका इस्तेमाल क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट से जुड़े उपकरणों में करना है। हुआवे अगले पांच वर्ष तक हर वर्ष 30,000 करोड़ डॉलर का निवेश नई पीढ़ी की चिप डिजाइन करने और बनाने में खर्च करेगा। गत वर्ष अगस्त में उसने 7 एनएम की चिप जारी की थी। क्वांटम कंप्यूटिंग में चीन अमेरिका से आगे है और वर्ष 2017 तक उसने अमेरिकी कंपनियों की तुलना में दोगुने पेटेंट फाइल किए थे।
 
बिना निजता की चिंता किए नागरिकों के आंकड़ों के भारी भरकम डेटा का लाभ लेते हुए चीन ने कृत्रिम मेधा क्षेत्र में क्षमताओं का विकास करने को प्राथमिकता पर रखा है। उसकी नई पीढ़ी की कृत्रिम मेधा विकास योजना देश को सन 2030 तक कृत्रिम मेधा और उससे संबंधित तकनीक के मामले में दुनिया का नेतृत्वकर्ता बनाना चाहती है। सन 2015 में चीन ने शोध और विकास पर 37,600 करोड़ डॉलर की राशि व्यय की। सन 1991 में यह राशि 130 करोड़ डॉलर थी। अब वह शोध एवं विकास व्यय के मामले में जापान, जर्मनी और दक्षिण कोरिया के मिलेजुले व्यय को पार कर गया है।
 
चीन की सैन्य नीति के केंद्र में भी तकनीक ही है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि बीते दो दशक में चीन ने असैन्य और सैन्य सम्मिश्रण पर काम किया है। वह बहुत सचेत ढंग से असैन्य क्षेत्र की तकनीक को सैन्य प्रयोग में लाता है। इनमें वे तकनीक भी शामिल हैं जो वह विदेश से वाणिज्यिक वजहों से हासिल करता है। वह अपनी साइबर क्षमताओं की सहायता से अमेरिकी फर्मों की वर्षों के शोध से हासिल सैन्य तकनीक को हासिल कर लेता है। चीनी मूल के अमेरिकी नागरिक और संवेदनशील जगहों पर काम कर रहे चीनी विद्वानों से अक्सर गोपनीय जानकारी और योजनाएं चीनी संस्थान हासिल करते रहे हैं। परंतु चीन अपने शोध के जरिये भी तमाम तकनीकी बढ़त हासिल कर रहा है जिसे नकारा नहीं जा सकता है। उसकी तकनीकी क्षमताओं में सुधार के साथ उसकी सैन्य नीति में भी बदलाव आया। पहले चरण में चीन ने सन 1991 में ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म से सबक लिए। इसमें अमेरिकी सेना ने प्रिसिशन गाइडेड मिसाइल और इंटीग्रेटेड इन्फॉर्मेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया और इराक की पारंपरिक सेना को पीछे छोड़ दिया। इससे सूचना आधारित युद्ध की शुरुआत हुई जिसने चीनी सैन्य नियोजकों को प्रभावित किया और उन्होंने इसमें सिद्धहस्त होने का प्रयास आरंभ किया। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का पुनर्गठन करके उसे जमीन, समुद्र और हवा में मार करने लायक बनाने के अलावा साइबर और इलेक्ट्रॉनिक जंग के लिए तैयार करना इसका हिस्सा है। सन 1996 में चीन को ताइवान की खाड़ी में दो अमेरिकी कैरियर ग्रुप के समक्ष शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। उसने तैयारी शुरू की कि भविष्य में अमेरिका के ऐसे किसी भी कदम से निपट सके। तब 1000 किमी तक मार करने वाली डीएफ-21 ऐंटी कैरियर बैलिस्टिक मिसाइल सामने आई। चीन ने दक्षिणी चीन सागर में जो कृत्रिम द्वीप बनाए और उनका सैन्यीकरण किए, उसमें कहीं न कहीं उसके मन में यह भावना थी कि उसके पास अमेरिका का प्रतिरोध करने की क्षमता है। हाल के दिनों में चीन के सैन्य रणनीतिकार कृत्रिम मेधा का इस्तेमाल करके इंटेलिजेंस आधारित युद्ध की ओर बढऩे की बात कर रहे हैं। अगर पहले मामला सूचनात्मक प्रणाली का था तो अब बात अलगोरिद्म आधारित प्रतिस्पर्धा की है जिसमें चीन को लगता है कि वह अमेरिका से आगे है।
 
अमेरिका में फिलहाल एक प्रभावी और विश्वसनीय प्रतिकार नीति की बात चल रही है लेकिन इन बातों का संबंध भारत की सुरक्षा से भी है। हमें इनका व्यापक और सावधानीपूर्वक आकलन करना होगा ताकि आगामी चुनौतियों से निपटा जा सके। शुरुआती दौर के चीन की तरह हमें अल्पावधि में ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी जो चीन की आक्रामकता का मुकाबला कर सकें। समय के साथ हमें उभरती तकनीकी क्षमता विकसित करनी होगी जो भूराजनैतिक प्रभाव का आधार है।
Keyword: technology, war, america, china,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या नरमी के बीच कर संग्रह का लक्ष्य हासिल कर पाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.