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बेवजह देरी

संपादकीय /  June 20, 2019

राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट (एनसीएलटी) ने गुरुवार को ऋणदाताओं के एक समूह की वह याचिका स्वीकार कर ली जिसमें उन्होंने जेट एयरवेज के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। इससे पहले स्टेट बैंक के नेतृत्व में बैंकों का एक समूह कंपनी के लिए खरीदार तलाश कर पाने में नाकाम रहा था। गत मार्च में बैंकों के समूह द्वारा विमानन कंपनी के परिचालन का नियंत्रण करने के पहले से ही खरीदार की तलाश जारी थी। बैंकों को लग रहा था कि जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल के परिदृश्य से बाहर होने के बाद कंपनी को कोई न कोई खरीदार मिल जाएगा। परंतु बोली की औपचारिक प्रक्रिया के बाद भी केवल एक ही प्रभावी बोली सामने आई, वह भी जेट की अल्पांश हिस्सेदार और नकदी की कमी से जूझ रही अबू धाबी की एतिहाद एयरवेज की ओर से। बैंकों को इस बोली में भी तमाम समस्याएं नजर आ रही थीं, इसलिए उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। पहली बात, एतिहाद बहुलांश हिस्सेदार नहीं बन सकती थी। दूसरा, उसे भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड से नियामकीय रियायत की आवश्यकता थी और आखिरी बात, बैंक एतिहाद की शर्तों पर जेट को बचाने पर जिस हद तक बैंकों के कर्ज की राशि बट्टे खाते में डालनी पड़ती, बैंक उसे लेकर भी असहज थे।

 
कर्जग्रस्त विमानन कंपनी की दिक्कत तब शुरू हुई जब वह गत दिसंबर में एक कर्ज चुकाने में चूक गई। अज्ञात वजहों से कर्जदाताओं ने गोयल को पर्याप्त अवसर दिया। इसे उचित ठहराना मुश्किल है। बैंकों की इस गड़बड़ी के परिणामस्वरूप जेट एयरवेज अब दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। उसकी उड़ानों का संचालन अप्रैल के मध्य से ही बंद है। महंगे लैंडिंग स्लॉट को लेकर बढ़ती चिंता, भविष्य की तिथियों के लिए बुक टिकट आदि की बात करें तो वह विमानन कंपनी की तुलना में कहीं अधिक मूल्यवान हैं। कंपनी पूर्व प्रबंधन और ऋणदाताओं की गलतियों की वजह से ठप हुई। यह देखना होगा कि बैंकों ने अपना कितना मूल्यह्रास किया है। क्या जेट को दिवालिया प्रक्रिया में न डालकर उन्होंने वही नुकसान तो नहीं कर लिया जिसे लेकर एतिहाद की पेशकश में वे घबरा रहे थे। फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है लेकिन इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता। चाहे जो भी हो अब कंपनी एनसीएलटी के हवाले है तो कर्जदाता 8,400 करोड़ रुपये की बकाया राशि में से एक छोटे हिस्से की ही वसूली की प्रत्याशा कर सकते हैं।  सच का सामना करने के बजाय बैंक समूह ऐसी बड़ी बड़ी बातें करने में लगा रहा कि 31 मई तक खरीदार मिल जाएगा। किसे पता बैंक कोई ठोस कदम उठाने के बजाय कितने समय तक यूं ही जेट की परिसंपत्तियां खराब होने देते? गैर वित्तीय ऋणदाताओं द्वारा गत 9 जून को एनसीएलटी का रुख करने के बाद उनके हाथ बंध गए।
 
यह बात हमें एक बार फिर याद दिलाती है कि दिवालिया प्रक्रिया में वित्तीय कर्जदाताओं की ओर से नाकामी की स्वीकारोक्ति अहम है। जब कोई परिसंपत्ति तनावग्रस्त हो जाए तो बैंकों को सुसंगत तरीके से काम करना चाहिए। वे जितनी प्रतीक्षा करेंगे उनका उतना ही नुकसान होगा। यह खेद की बात है कि बैंकिंग जगत के तमाम लोग जल्दी कदम उठाने के फायदे को समझने में नाकाम रहे। गुरुवार की सुनवाई के बाद एनसीएलटी ने निस्तारण से जुड़े पेशेवरों से कहा है कि वे इस मामले को तीन महीने के भीतर निपटाने का प्रयास करें। यह अच्छी खबर है लेकिन इससे बहुत भरोसा नहीं पैदा होता क्योंकि ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता के तहत निस्तारण के लिए गए मामलों में भी बहुत अधिक देरी और विवाद देखने को मिले हैं। 
Keyword: aviation, flight, airport, jet airways, NCLT,,
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