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लॉटरी पर कर को लेकर जीएसटी परिषद की बैठक में हो सकता है टकराव

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली June 20, 2019

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक में लॉटरियों पर एकसमान कर की दरों को लेकर केंद्र व राज्यों के बीच खींचतान की स्थिति में पहली बार मतदान की स्थिति आ सकती है। शुक्रवार को इस मसले पर परिषद की बैठक उग्र रहने की संभावना है। केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजक ने लॉटरी पर दोहरे कर की वकालत की है। उन्होंने कहा कि अगर इस मसले को आगे के लिए नहीं टाला जाता है तो वह मतदान के लिए दबाव डाल सकते हैं। यह नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में पहली बैठक होने जा रही है। 
 
जीएसटी परिषद की बैठक के पहले राज्यों के वित्त मंत्री सीतारमण के साथ बजट पूर्व बैठक करेंगे। आइजक ने कहा कि वह गैर भाजपा शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों को अपने पक्ष में करने के लिए उनके साथ बात करेंगे।  सरकारी व निजी लॉटरी पर एकसमान कर लगाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ केरल विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है। दोहरे कर ढांचे के कारण कर चोरी रोकने के मकसद से केंद्र ने एकसमान कर का प्रस्ताव किया है।  परिषद की आधे दिन की बैठक में शामिल किए जाने वाले मसलों में जीएसटी मुनाफाखोरी रोधी निकाय को एक साल के लिए विस्तार देने, इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दर घटाकर 5 प्रतिशत करने, बड़ी फर्मों के लिए इलेक्ट्रॉनिक इनवाइसिंग की सुविदा पेश करने व ईवे बिलों के लिे रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन टैगिंग शामिल हो सकते हैं। 
 
इस समय राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही लॉटरी पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है, वहीं राज्य सरकारों द्वारा अधिकृत और निजी पक्षों द्वारा संचालित लॉटरी पर 28 प्रतिशत कर लगता है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस अंतर का दुरुपयोग कारोबारी कर रहे हैं और उनमें से ज्यादातर 12 प्रतिशत कर का भुगतान कर रहे हैं। करों में अंतर बहुत ज्यादा होने की वजह से छोटे कारोबारी कर का अनुपालन न करने को प्रेरित हो रहे हैं।  यह मामला तब सामने आया जब हाइब्रिड मॉडल के रूप में लॉटरी का संचालन राज्य के नाम पर किया जाता था, जबकि प्रभावी रूप से वे निजी लॉटरियां थीं। केंद्र सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक दो कर दरों 16 प्रतिशत का भारी अंतर होने की वजह से बड़े राज्यों को ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूलने में मदद मिल रही है। 
 
सरकार के अनुमान के मुताबिक सरकारी लॉटरियों पर कर बढ़ाकर 28 प्रतिशत करने से 1,250 करोड़ रुपये के करीब राजस्व का लाभ होगा। केरला उन कुछ राज्यों में शामिल है, जहां सरकारी लॉटरी से अतिरिक्त राजस्व आय होती है।   परिषद में महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार की अध्यक्षता में बनी समिति की रिपोर्ट पर विचार होगा, जिसने राज्य सरकार की लॉटरी और राज्य सरकार की ओर से अधिकृत लॉटरी दोनों पर ही एकसमान जीएसटी दरों का पक्ष लिया है, चाहे वह 18 प्रतिशत हो या 28 प्रतिशत। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'केरल राज्य द्वारा अधिकृत लॉटरियों पर कर कम करने के पक्ष में नहीं है, जबकि गोवा, महाराष्ट्र और असम दरें कम करने को इच्छुक हैं।' 
 
परिषद की बैठक के पहले केरल ने मंगलवार को लॉटरी पर एकसमान कर लगाए जाने के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया और तर्क दिया कि इससे केरल में हजारों की संख्या में लॉटरी एजेंट और विक्रेता प्रभावित होंगे, इसके अलावा इससे राज्य व केंद्र का राजस्व भी प्रभावित होगा। वहीं दूसरी तरफ असम ने लॉटरी पर 18 प्रतिशत की दर से एकसमान कर लगाने की मजबूती से वकालत की है। 
 
एनएए को और वक्त  
 
एनएए के पास अभी 354 मामले लंबित हैं, ऐसे में उसे एक साल के लिए दिसंबर 2020 तक का विस्तार मिल सकता है। हर महीने करीब 6 से 7 मामले निपटाए जाते हैं, ऐसे में विस्तार को जरूरी माना जा रहा है। एक अधिकारी ने कहा, 'यह विस्तार एक बार में एक साल के लिए होगा। लंबा विस्तार दिया जाना इसके गठन के मूल उद्देश्यों के खिलाफ होगा।' एनएए ने अब तक 60 मामले बंद करने का आदेश दिया है और करीब 13 मामलों में पक्षकारों को मुनाफाखोरी का दोषी पाया गया है। एनएए के प्रमुख बीएन शर्मा हैं और संयुक्त सचिव व उसके ऊपर के स्तर के 4 अधिकारी उनका सहयोग करते हैं। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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