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लाभांश भुगतान में वृद्धि की सुस्त रही रफ्तार

कृष्णकांत / मुंबई June 20, 2019

भारतीय उद्योग जगत द्वारा लाभांश भुगतान में कमजोर वृद्धि दिख रही है। वित्त वर्ष 2019 के दौरान बीएसई500 सूचकांक में शामिल कंपनियों के लाभांश भुगतान में महज 1.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई जो पिछले तीन साल की सबसे सुस्त रफ्तार है।  कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2019 में शेयरधारकों को बीएसई500 सूचकांक में शामिल कंपनियों से इक्विटी लाभांश के रूप में 1.64 लाख करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है। जबकि एक साल पहले उन्हें 1.62 लाख करोड़ रुपये की लाभांश आय हुई थी। लाभांश आय में वित्त वर्ष 2019 के दौरान शेयरधारकों की अंतरिम लाभांश आय और कंपनियों द्वारा प्रस्तावित अंतिम लाभांश, जिसका भुगतान होना अभी बाकी है, शामिल हैं। अंतिम इक्विटी लाभांश का भुगतान कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद की जाती है।
 
दूसरी ओर, शेयर पुनर्खरीद में वित्त वर्ष 2018 के दौरान भारी गिरावट के बाद पिछले वित्त वर्ष के दौरान एक साल पहले के मुकाबले 64 फीसदी की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई। इस तेजी को टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) और एचसीएल टेक्नोलॉजिज जैसी प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन एवं ओएनजीसी जैसी सरकारी ऊर्जा कंपनियों से बल मिला। कुल मिलाकर, बीएसई500 सूचकांक में शामिल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2019 के अंत तक 12 महीनों के दौरान करीब 45,000 करोड़ रुपये मूल्य की शेयर पुनर्खरीद की। जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा 27,500 करोड़ रुपये का रहा था।
 
यह विश्लेषण बीएसई 500 सूचकांक में शामिल 452 कंपनियों के स्थायी नमूनों पर आधारित है। लाभांश रकम में संबंधित वित्त वर्ष के लिए अंतरिम एवं प्रस्तावित अंतिम लाभांश शामिल हैं। पुनर्खरीद की रकम हर साल मार्च के अंत में समाप्त 12 महीनों के दौरान खर्च की गई वास्तविक रकम है।   कंपनियों में आईटी दिग्गज टीसीएस नकद भुगतान की सूची में लगातार दूसरे साल शीर्ष पर रही। जबकि इंडियन ऑयल दूसरे पायदान पर और ओएनजीसी इस सूची में तीसरे पायदान पर रही। टीसीएस ने वित्त वर्ष 2019 के लिए अपने शेयरधारकों को इक्विटी लाभांश के रूप में 11,257 करोड़ रुपये के भुगतान का प्रस्ताव दिया है। कंपनी ने सितंबर 2018 में शेयरधारकों से शेयर पुनर्खरीद पर 16,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए। इस प्रकार पिछले वित्त वर्ष के दौरान टीसीएस ने शेयरधारकों को कुल करीब 27,257 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए। यह रकम साल के दौरान कंपनी करीब 87 फीसदी समेकित शुद्ध मुनाफे के बराबर है।
 
इन्फोसिस ने वित्त वर्ष 2019 के लिए इक्विटी लाभांश के रूप में 9,366 करोड़ रुपये का भुगतान किया और इसी साल बाद में शेयरधारकों को पुनर्खरीद के जरिये अतिरिक्त 8,260 करोड़ रुपये लौटाने का प्रस्ताव दिया। इस प्रकार कंपनी का भुगतान अनुपात 115 फीसदी हो जाएगा। एचसीएल टेक्नोलॉजिज और टेक महिंद्रा ने भी पिछले वित्त वर्ष के दौरान शेयर पुनर्खरीद पर काफी खर्च किए। इंडियन ऑयल और ओएनजीसी के लाभांश भुगतान भी पिछले साल काफी अच्छे रहे। इंडियन ऑयल ने लाभांश एवं शेयर पुनर्खरीद के रूप में अपने शेयरधारकों को कुल 13,143 करोड़ रुपये का भुगतान किया जबकि ओएनजीसी के मामले में यह आंकड़ा 12,828 करोड़ रुपये का रहा।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में निवेश संभावनाओं के अभाव और अन्य फायदे के कारण प्रवर्तक शेयर पुनर्खरीद के लिए प्रोत्साहित हुए। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'कंपनियों के लिए इसका कोई औचित्य नहीं है कि यदि वह नई परियोजनाओं में मुनाफे के लिए निवेश नहीं कर सकती है तो अपनी आय को संचित कर नकदी भंडार तैयार करे। अर्थव्यवस्था में कुल मिलाकर मांग की कमी है जिससे कंपनियों के पूंजीगत खर्च में कमी दिख रही है।'
Keyword: company, profit, BSE,,
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