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रेनो की भारतीय रणनीति में शामिल नहीं है डीजल

अरिंदम मजूमदार /  June 20, 2019

फ्रांस की प्रमुख वाहन कंपनी रेनो के 56 वर्षीय मुख्य कार्याधिकारी थिएरी बोलोर ने पिछले साल कार्लोस गोन की गिरफ्तारी के बाद कंपनी की कमान संभाली थी। वह कंपनी के नए मॉडल ट्राइबर के लॉन्च के लिए भारत आए थे। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने अरिंदम मजूमदार को बताया कि वैश्विक वाहन क्षेत्र की स्थिति, भारत में कंपनी की रणनीति और साझेदार निसान के साथ संबंध के बारे में चर्चा की। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

 
पिछले एक साल के दौरान बाजार में काफी नरमी दर्ज की गई है। ऐसे में रेनो के लिए आप क्या संभावनाएं देख रहे हैं?
पहला, ऐसा नहीं है कि केवल भारतीय बाजार में नरमी दर्ज की जा रही है बल्कि यह दुनिया भर में दिख रही है। रेनो के लिए भारत सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। हमें विश्वास है कि हम 2022 तक यहां अपने कारोबार को दोगुना करने में सफल होंगे। ऐसा नहीं है कि वैश्विक परिस्थिति से यहां की वृद्धि प्रभावित होगी।भारतीय बाजार को सबसे चुनौतीपूर्ण बाजार के तौर भी देखा जाता है। यहां के ग्राहक वास्तव में काफी मांग करते हैं। ऐसे में वाहन कंपनियों को लागत और मूल्य के बीच काफी संतुलन स्थापित करना पड़ता है। हमने कुछ गलतियां भी की हैं। लेकिन हमने उन गलतियों से सीखा भी है। क्विड यहां हमारी सफलता का एक प्रमुख कारक है। नया मॉडल ट्राइबर उसे आगे बढ़ाएगा। भारत से वाहनों के निर्यात के लिए हमारे पास काफी योजनाएं हैं।
 
विश्व की एक प्रमुख वाहन विनिर्माता के तौर पर डीजल वाहनों के लिए आपका क्या नजरिया है? भारत की सबसे बड़ी वाहन कंपनी मारुति ने धीरे-धीरे उसे खत्म करने का निर्णय लिया है। आपकी टिप्पणी?
अनुपात के लिहाज से डीजल वाहनों में स्वाभावित तौर पर तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। यह गिरावट 2015 के बाद कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई और आज इसके लिए नियामकीय रुख भी स्पष्ट है जिसके तहत डीजल को बढ़ावा नहीं दिया गया है। नियम कानून इस तरीके से तैयार किए जा रहे हैं जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को रफ्तार मिल सके। हम यूरोप में डीजल वाहनों का उत्पादन पहले ही सीमित कर चुके हैं। ट्राइबर को केवल पेट्रोल ईंधन विकल्प में उतारा गया है और इससे भारतीय बाजार के प्रति कंपनी की भविष्य की रणनीति स्पष्ट 
होती है।
 
सरकार 2030 तक 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन की बात कर रही है। क्या आपको लगता है कि यह व्यावहारिक समय-सीमा है? क्या आप इलेक्ट्रिक वाहनों का स्थानीय उत्पादन की योजना बना रहे हैं?
विश्व के कई देशों में हमने सरकारों का लगभग यही रुख देखा है। यहां तक कि बड़े शहरों से भी इस प्रकार के प्रस्ताव आ रहे हैं। लेकिन उस क्षेत्र में हमारा अनुभव हमारे लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है। जैसा कि आप जानते हैं कि यूरोप में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र की हम अग्रणी कंपनी हैं। हमें पता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए माहौल कितना महत्त्वपूर्ण होता है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री भी अन्य वाहनों के मुकाबले अलग होती है। इलेक्ट्रिक वाहनों को इस तरीके से तैयार किया जाता है ताकि ग्राहकों घर पर अथवा बाहर उसे चार्ज करने में आसानी हो। यह माहौल उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि इलेक्ट्रिक वाहन। इसलिए हमारी रणनीति इलेक्ट्रिक वाहन के लिए माहौल तैयार करने पर भी होनी चाहिए। मैं यह नहीं कह सकता कि 2030 पर्याप्त समय-सीमा नहीं होगी क्योंकि यह देश की तैयारी और क्षमता पर निर्भर करता है। फिलहाल यही चलन दिख रहा है और इसलिए हम अचंभित नहीं हैं।
 
क्या आप इलेक्ट्रिक वाहन भारत में बनाएंगे?
हमें प्रतिस्पर्धी बनना पड़ेगा। जहां तक क्विड का सवाल है तो हमें सफलता इसलिए मिली क्योंकि हमने उसे भारत में बनाया। इसलिए फिलहाल ऐसा कोई कारण नहीं दिख रहा है कि हमें अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए उस रणनीति को क्यों नहीं अपनाना चाहिए। वास्तव में यदि आप एक व्यापक ग्राहक आधार चाहते हैं तो आपको भारत में बनाना होगा।
Keyword: renault, car, vehicle,,
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