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क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध कितना मुमकिन!

वीरेश्वर तोमर /  06 19, 2019

क्रिप्टोकरेंसी पर अगर मगर

विश्व में कई सरकारें क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही हैं लेकिन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र की क्षमताओं का उपयोग करने के लिए नियमन कारगर साबित होगा

बिजनेस स्टैंडर्ड क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध कितना मुमकिन!दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने मंगलवार को घोषणा की है कि वह पूरे विश्व में एकीकृत भुगतान सेवा उपलब्ध कराने के लिए लिब्रा नाम से क्रिप्टोकरेंसी शुरू करने जा रही है। कंपनी का कहना है कि इससे न सिर्फ वैश्विक स्तर पर ग्राहकों और कारोबारियों के बीच होने वाले कारोबार को मजबूती मिलेगी, बल्कि बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोग भी वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। फेसबुक द्वारा की गई इस घोषणा से क्रिप्टोकरेंसी के समर्थक काफी उत्साहित हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे अभी वैश्विक स्तर पर नियामकीय बाधाओं को पार करना होगा। 

पूरे विश्व में क्रिप्टोकरेंसी की कानूनी वैधता को लेकर देशों की अलग अलग राय है। भारत में क्रिप्टोकरेंसी की कानूनी मान्यता पर फिलहाल अनिश्चितता बरकरार है और भारतीय रिजर्व बैंक क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित किभी भी तरह के लेनदेन को लेकर कई बार चेतावनी जारी कर चुका है।  समाचार वेबसाइट बिटकॉइन.कॉम के अनुसार जापान की संसद ने गत 21 मई को क्रिप्टोकरेंसी बिल को मंजूरी दे दी है जिसे वहां के वित्तीय नियामक 'वित्तीय सेवा एजेंसी' द्वारा तैयार किया गया था। हालांकि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर दूसरी समस्याओं के साथ साथ प्रारंभिक मुद्रा निर्गम (आईसीओ) की कार्यप्रणाली और धन जुटाने की प्रक्रिया को लेकर लगातार चिंताएं बनी हुई हैं। भले ही साल 2018 में आईसीओ के जरिए कुल 6.3 अरब डॉलर की वित्त उगाही हुई हो लेकिन आईसीओ की निगरानी करने वाली कंपनी टेकनडेटा के अनुसार वर्ष 2018 में 42 प्रतिशत और साल 2017 में 46 प्रतिशत आईसीओ विफल रहे गए थे। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी की मदद से आईसीओ द्वारा की जाने वाली वित्त उगाही को लगातार संदेह की नजर से देखा जाता रहा है। 

क्या लग सकती है रोक

निवेश सलाहकार फर्म फिनवे के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी रचित चावला बताते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जा सकता है और हो सकता है कि निकट भविष्य में भारत सरकार इस तरह के प्रतिबंध लगा दे। वह कहते हैं, 'क्रिप्टोकरेंसी की सहायता से धन शोधन, हवाला कारोबार, आदि काफी आसान हो जाता है। क्रिप्टोकरेंसी की अस्थिर कीमतें भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती हैं। जब किसी निश्चित साधन का दुरुपयोग किया जाए तो सरकार को उसकी रोकथाम के लिए कदम उठाने पड़ते हैं।' हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाना सरकारों के लिए काफी मुश्किल होगा। 

क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन के क्षेत्र में कानूनी परामर्श देने वाली फर्म क्रिप्टो कानून के मुख्य अधिवक्ता मोहम्मद दानिश बताते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी की विकेंद्रीकृत प्रकृति के चलते इनके लेनदेन या रखरखाव पर प्रतिबंध लगाना काफी मुश्किल होगा। वह कहते हैं, 'हमें प्रतिबंध लगाने से पहले देखना हेगा कि क्या इस तरह के प्रतिबंध कारगर हो सकेंगे। क्रिप्टोकरेंसी एक तरह के डिजिटल कोड के रूप में रहती हैं, जिनकी निगरानी करना दुष्कर कार्य है। अगर सरकारें इस पर प्रतिबंध को लेकर कानून बनाती भी हैं तो उसका अनुपालन सुनिश्चित करना अत्यंत जटिल होगा।' वर्तमान में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया,  और जर्मनी आदि में क्रिप्टोकरेंसी की अनुमति है। कई दूसरे देशों में इनका प्रयोग कानूनी ग्रे-क्षेत्र के तहत हो रहा है। 

तकनीकी जटिलताएं

क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग को प्रतिबंधित करने से पहले उससे संबंधित तकनीकी प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। क्रिप्टोकरेंसी एक तरह की डिजिटल मुद्रा है जिसपर किसी भी देश या संस्था का नियंत्रण नहीं होता। यह कंप्यूटर एल्गोरिद्म के आधार पर बनाई जाती है और इसके खरीदने, बेचने या संग्रह करने की सारी जानकारी ब्लॉक के सहारे ब्लॉकचेन में सहेजी जाती है। यह ब्लॉकचेन सार्वजनिक होती हैं और इसमे शामिल कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। देश के प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वजीरएक्स के संस्थापक निश्चल शेट्टी बताते हैं कि तकनीकी तौर पर क्रिप्टोकरेंसी को न तो प्रतिबंधित किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए। वह कहते हैं, 'भले ही कानून बनाकर क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया जाए लेकिन अगर इसके तकनीकी स्वरूप को देखें तो यह प्रतिबंध कारगर नहीं होगा। क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल कोड के रूप में सहेजी जाती हैं और इसे किसी भी स्थान पर रखा जा सकता है। जिसकी निगरानी करना जटिल चुनौती है।' शेट्टी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध को उद्योग के हित में नहीं मानते। वह कहते हैं, 'इस तरह के प्रतिबंध से देश का ब्लॉकचेन उद्योग खत्म हो जाएगा। देश का प्रतिभा पलायन बढ़ेगा और भारत नई तकनीक में प्रमुख भूमिका निभाने से वंचित रह जाएगा।' 

सरकार के लिए चुनौती

उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय पाल डालमिया के अनुसार क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कई तरह की अवैध गतिविधियों में हो रहा है, जिसके चलते सरकारें इस पर प्रतिबंध के बारे में विचार कर रही हैं। वह कहते हैं, 'क्रिप्टोकरेंसी की सहायता से धन शेधन (मनी लॉन्ड्रिंग) किया जा रहा है। इसकी मदद से फेमा कानून का उल्लंघन काफी आसान हो गया है और पहले जहां हवाला कारेबार की अपनी सीमाएं थीं, क्रिप्टोकरेंसी के चलतें वे सीमाएं भी समाप्त हो गई हैं।' डालमिया बताते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी के चलते आतंकवादी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना काफी आसान हो गया है। शेट्टी कहते हैं कि यह सरकार के नकारात्मक होने की बात नहीं है और इस क्षेत्र में व्याप्त अनिश्चितता एवं अस्थिरता के चलते क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की संभावनाओं का उपयोग करने के लिए भारत अपनी क्रिप्टोकरेंसी लेकर आ सकता है। 

क्या हों उपाय

विश्व के कई देश क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित नीतियां बनाने पर काम कर रहे हैं और भारतीय ब्लॉकचेन उद्योग सकारात्मक नीतियों की उम्मीद कर रहा है। शेट्टी कहते हैं, 'इस तकनीक के कई सकारात्मक पहलू हैं और अगर हम क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने के बजाय इसे विनियमित करें तो देश की अर्थव्यवस्था को काफी लाभ होगा।' उनका मानना है कि विश्व के दूसरे देशों की तरह भारत को भी उद्योग संगठनों के साथ मिलकर बातचीत करनी चाहिए और एक सकारात्मक हल निकालना चाहिए। क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में अस्थिरता के समाधान के लिए 'स्टेबल कॉइन' लाया गया,  जिसके दाम फिएट मुद्रा (सामान्यत: डॉलर) के समकक्ष बने रहते हैं। 

दानिश कहते हैं कि अगर सरकार क्रिप्टोकरेंसी में होने वाली धोखाधड़ी और पोंजी योजनाओं पर रोक लगाना चाहती है तो ग्राहकों के हितों का ध्यान रखते हुए इससे संबंधित कानून लाना होगा। उनके अनुसार, 'देश में एक नियामक बनाया जाए जिसके पास सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों को मान्यता देने और उनके लेखा परीक्षण की शक्ति हो। यह नियामक चयनित क्रिप्टोकरेंसी को ही एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराने की अनुमति दे और एक्सचेंजों के लिए केवाईसी नियम सख्त बनाए जाएं।' इसके जरिये देश में क्रिप्टो कारोबार करने वाले लोगों का डिजिटल डेटा सरकार द्वारा नियमित एक्सचेंजों के पास होगा और आवश्यकता पडऩे पर इसकी जांच की जा सकेगी। 
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