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नए लेखा मानक से कर्ज पर होगा असर

सचिन मामबटा / मुंबई June 19, 2019

मौजूदा तिमाही से नतीजों में स्पष्ट हो चुके संशोधित लेखा मानकों से कर्ज, लाभ और प्रमुख वित्तीय अनुपातों की गणना के तरीके में अहम बदलाव हो सकते हैं। इसका असर पहले से ही कर्ज से ग्रसित क्षेत्रों मसलन दूरसंचार पर पड़ सकता है और उन्हें लेनदारों के साथ अपने समझौतों में बदलाव करना पड़ सकता है। जून तिमाही में देनदारी की लेखा विधि से नतीजे के सीजन में काफी उतारचढ़ाव हो सकता है और यह पहला ऐसा मामला होगा जहां नए लेखा मानकों का प्रभाव दिखेगा। नया लेखा मानक (इंड एएस) 116 प्रभावी तौर पर कंपनियों को लंबी अवधि के परिचालन खर्च मसलन बुनियादी ढांचा क्षेत्र या विमानन क्षेत्र में भारी मशीन के किराए को कर्ज दायित्व के तौर पर मानना अनिवार्य बनाता है। टैक्स फर्म बीडीओ इंडिया के पार्टनर प्रदीप सुरेश ने कहा, यह कदम कंपनी की भविष्य की प्रतिबद्धताओं के संबंध में पारदर्शिता में सुधार के लिए है। लेकिन इसका असर इन कंपनियों के खाते में दर्ज ऋण में बढ़ोतरी के तौर पर भी होगा क्योंकि भविष्य की देनदारी के खिलाफ तय अवधि में भुगतान वाले सभी अनुबंधों को कर्ज माना जाएगा।
 
उन्होंने कहा, दूरसंचार कंपनियोंं के पास टावर है जो परिचालन पट्टे पर आधारित हैं। ये उनकी बैलेंस शीट पर बड़ी उधारी के तौर पर दिखेंगी। विमानन व खुदरा कंपनियों के समान खर्चो पर भी असर होगा। पट्टे पर भारी मशीन का इस्तेमाल करने वाली बुनियादी ढांचा कंपनियां भी प्रभावित होंगी। अगर आप पट्टाधारक हैं और आपका अनुबंध अन्य मुद्राओं  में है तो पट्टे की देनदारी तिमाही आधार पर फिर से लिखी जाएगी। इसमें बदलाव काफी अहम हो सकता है, जब तक कि इस देनदारी की हेजिंग न की जाए, जो सामान्य चलन नहीं है। 
 
ग्रांट थॉर्नटन एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक आशिष गुप्ता ने कहा कि जिन कंपनियों का परिचालन काफी ज्यादा पट्टे पर हो रहा है, खास तौर से विमानन, लॉजिस्टिक्स, जहाजरानी आदि, वहां भुगतान एक साल से ज्यादा अवधि तक बंटा रहता है। लेकिन ये कंपनियां खास तौर से प्रभावित होंगी। भविष्य में पट्टे के भुगतान की मौजूदा कीमत को बैलेंस शीट पर कुल देनदारी की गणना में इस्तेमाल किया जाएगा। जहां भुगतान विदेशी मुद्रा में होता है वहां ऐसी देनदारी उनके लाभ-हानि खाते में उतारचढ़ाव में इजाफा कर सकती है।
 
उन्होंने कहा, अगर किसी कंपनी का पट्टा भुगतान एक अरब डॉलर है तो विनिमय दर में एक रुपये के बदलाव से उनके मुनाफे पर 100 करोड़ रुपये का असर पड़ सकता है। हाल में हुए एक अध्ययन के विश्लेषण से पता चलता है कि विमानन क्षेत्र में कुल कर्ज में बढ़ोतरी अनुमानित तौर पर 100 फीसदी हो सकती है। कंपनी कितनी कर्ज में है इसका आकलन कर्ज-इक्विटी अनुपात से होता है और इसमें बदलाव भी कुछ प्रमुख क्षेत्रों में दो अंकों मेंं हो सकता है। इसके अतिरिक्त एबिटा में बढ़ोतरी दिख रही है क्योंकि खर्च कम है।
 
पहले से ही कर्ज में फंसे लेनदार व कंपनियों को इस असर पर अपने समझौते में बदलाव करना पड़ सकता है।  फाइनैंशियल अकाउंटिंग एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर व नैशनल लीडर संदीप खेतान ने कहा कि नए लेखा मानक अपनाने वाली कंपनियों को सामान्य तौर पर लेनदारों के साथ अग्रिम बातचीत करनी चाहिए और उन्हें बैलेंस शीट व वित्तीय अनुपात पर पडऩे वाले असर की जानकारी देनी चाहिए। जब बैंक प्रस्तावित बदलाव को समझ जाएंगे और उसकी समीक्षा कर लेंगे, वे इसे आगे बढ़ाएंगे और मौजूदा कर्ज समझौते में संशोधन पर भी सहमत हो जाएंगे।
 
उन्होंने कहा, अगर बैंक सहमत न हों तो कंपनी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह मौजूदा कर्ज समझौतों का अनुपालन कर रही हैं, अन्यथा कर्ज से जुड़े करार पर डिफॉल्ट हो सकता है, जिसका प्रबंधन मौजूदा माहौल में संवेदनशीलता के साथ किए जाने की दरकार है।
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