बिजनेस स्टैंडर्ड - द्वितीयक उत्पादकों को घाटे का डर
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द्वितीयक उत्पादकों को घाटे का डर

दिलीप कुमार झा / मुंबई 06 19, 2019

कच्चे माल और तैयार उत्पादों पर व्युत्क्रम शुल्क संरचना की वजह से अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहे द्वितीयक धातु उत्पादकों को भारी नुकसान की चिंता सता रही है और उनके सामने अपना वजूद बचाने की भी चुनौती है। अलौह धातु कबाड़ पर शुल्क दर बढ़ाए जाने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उद्योग में लगे लगभग 25 लाख श्रमिकों का भविष्य प्रभावित होगा। दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन - आसियान के सदस्य देशों के बीच हुए क्षेत्रीय सहयोग समझौते के तहत भारत तैयार अलौह धातुओं पर कोई आयात शुल्क नहीं लगाता है लेकिन अलौह धातु कबाड़ आयात पर 2.5 प्रतिशत शुल्क जारी है।
 
इस प्रतिलोम शुल्क संरचना के परिणामस्वरूप भारत के कई द्वितीयकधातु उपयोगकर्ता अब धातु कबाड़ के स्थान पर तैयार उत्पादों का रुख करने लगे हैं। हालांकि संयंत्रों और मशीनों की स्थापना पर भारी निवेश करने वाली मौजूदा रीसाक्लिंग इकाइयां घरेलू रूप से प्रसंस्करण के लिए धातु कबाड़ का आयात जारी रखे हुए हैं। लेकिन कच्चे माल के रूप में धातु कबाड़ का उपयोग करने वाले भागीदारों का लाभ मार्जिन आयातित तैयार उत्पादों का उपयोग करने वाले भागीदारों की तुलना में कम है। भारतीय धातु रीसाक्लिंग संघ (एमआरएआई) के अध्यक्ष संजय मेहता ने कहा कि प्रतिकूल शुल्क संरचना ने कई भारतीय भागीदारों को कबाड़ रीसाक्लिंग की अपनी दुकानें बंद करने और उत्पादन के लिए वॉल्व, नलकियों, पैनल, इंजन के टुकड़ों आदि तैयार उत्पादों का आयात करने के लिए प्रेरित किया है। अगर ऐसा जारी रहता है तो भारतीय धातु रीसाइक्लिंग इकाइयों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। इस समय देश भर में मुख्य रूप से एसएमई (लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र में लगभग 3,500 इकाइयां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 25 लाख लोगों को रोजगार देती हैं। आयात शुल्क में किसी भी और इजाफे से पूरा उद्योग बंद हो जाएगा तथा इन श्रमिकों को बेरोजगार कर देगा।
 
दिलचस्प बात यह है कि प्राथमिक धातु उत्पादकों ने बजट से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से धातु कबाड़ पर आयात शुल्क बढ़ाने का अनुरोध किया है। कबाड़ पर अधिक आयात शुल्क की वजह से अगर कारोबारियों को अपने कारोबार में कमी करनी पड़ती है या उसे बंद करना पड़ता है तो सालाना 330 करोड़ रुपये का शुल्क संग्रह प्रभावित हो सकता है। बाजार में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मिश्र धातु बनने के लिए एल्युमीनियम कबाड़ को रीसाइक्लि करने वाली सेंचुरी मेटल रीसाइक्लिंग के प्रबंध निदेशक मोहन अग्रवाल ने कहा कि धातु कबाड़ पर आयात शुल्क वृद्धि इस उद्योग के लिए हानिकारक होगी और इसके परिणामस्वरूप कई इकाइयां बंद हो जाएंगी और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी होगी। भारत में वाहनों की बिक्री में गिरावट के कारण धातु रीसाइक्लिंग उद्योग पहले ही भारी गिरावट का सामना कर रहा है। वाहन उद्योग की कमजोर मांग को व्यवस्थित करने के लिए कई एल्युमीनियम रीसाइक्लिरों ने अपने उत्पादन में कटौती की है।

Keyword: metal, scarp, aluminium,,
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