बिजनेस स्टैंडर्ड - टायर कंपनियों पर पड़ी दोहरी मार
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टायर कंपनियों पर पड़ी दोहरी मार

टीई नरसिम्हन / मुंबई June 17, 2019

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय घरेलू बाजार में प्राकृतिक रबर के दामों का रुख दो साल के अंतराल के बाद सकारात्मक हो गया है। हालांकि यह किसानों के लिए एक अच्छी खबर है लेकिन टायर कंपनियों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है क्योंकि वाहनों की बिक्री में मंदी के कारण टायर की मांग तो नहीं बढ़ रही है लेकिन कच्चे माल की कीमतों में इजाफा हो रहा है। रबर बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में दाम 11,915 रुपये के निचले स्तर से करीब 23 प्रतिशत बढ़कर 14,579 रुपये के स्तर पर चल रहे हैं। रिलायंस सिक्योरिटीज के अनुसंधान विश्लेषक मितुल शाह ने कहा कि पिछले 4-5 महीनों से ऑटोमोबाइल की बिक्री में सुस्ती की वजह से टायर निर्माताओं को मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिस्थापन खंड में कमजोर मांग की स्थिति से सभी टायर निर्माताओं के वित्तीय प्रदर्शन पर भी असर पड़ा है।
 
जिन कंपनियों के व्यापार में विदेशों का योगदान ज्यादा है, ऐसी कुछेक कंपनियों को भी यूरोप में कमजोर मांग की वजह से उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है। किसी भी लागत वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना टायर निर्माताओं के मुश्किल रहेगा। कुछेक मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) द्वारा उत्पादन में और कटौती की घोषणा के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष की पहली तिमाही में टायर बिक्री कम हो जाएगी। इन कारणों से निश्चित रूप से सभी टायर निर्माताओं पर मार्जिन का दबाव बढ़ेगा और वित्त वर्ष 20 की पहली छमाही में उनकी लाभप्रदता प्रभावित होगी। दूसरी तरफ इन कंपनियों द्वारा जोरदार ढंग से पूंजीगत व्यय करने की योजना के कारण आगे चलकर इन कंपनियों की बैलेंस शीट पर और अधिक दबाव बनेगा।
 
भारतीय बाजार में दो साल के अंतराल के बाद रबर की कीमतों का रुख सकारात्मक हुआ है। इससे प्राकृतिक रबर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है जिसे किसानों ने कीमतों में गिरावट के कारण छोड़ दिया था। पिछले साल केरल की बाढ़ के कारण कम कीमतों के बीच रबर की बुआई को भारी नुकसान पहुंचा था। एक्युमेन कैपिटल मार्केटï्स इंडिया लिमिटेड के निदेशक गिबी मैथ्यू ने कहा कि घरेलू बाजार में कम उपलब्धता और आयात को कम रखने की उम्मीद से अधिक आयात शुल्क के कारण दाम 17,000 रुपये के स्तर पर पहुंचने की संभावना है क्योंकि केरल में उत्पादन कम है और अगले दो-तीन महीने में आवक कम रहने के आसार हैं।
 
चीन के युन्नान प्रांत में सूखा, तीन प्रमुख उत्पादकों - मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड द्वारा निर्यात में कटौती, आयात शुल्क में बढ़ोतरी से पहले चीनी कंपनियों द्वारा अधिक आयात और कच्चे तेल की कीमत बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप कृत्रिम रबर की कीमतों में इजाफा हो रहा है जो प्राकृतिक रबर का एक विकल्पहोता है। वैश्विक स्तर पर भी प्राकृतिक रबर की कीमतों में वृद्धि हुई है। 2018-19 में रबर उत्पादन 64.8 लाख टन रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 6.6 प्रतिशत कम है। केरल रबर का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। रबर बोर्ड के चेयरमैन और कार्यकारी निदेशक केएन राघवन का अनुमान है कि 2019-20 में उत्पादन 7.5 लाख टन रहेगा जबकि 2019 में खपत 12.7 लाख टन रहने का अनुमान है।  2018-19 में प्राकृतिक रबर का आयात 24 प्रतिशत तक बढ़कर 5.82 लाख टन हो गया और वित्त वर्ष 20 में आयात घटकर पांच लाख टन रहने की उम्मीद है।
Keyword: tyre, vehicle, rubber,,
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