बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रदर्शन, कर्ज कटौती पर जोर
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प्रदर्शन, कर्ज कटौती पर जोर

शैली सेठ मोहिले और देव चटर्जी / मुंबई 06 16, 2019

टाटा समूह बड़े अधिग्रहणों से करेगा परहेज

बिजनेस स्टैंडर्ड प्रदर्शन, कर्ज कटौती पर जोरटाटा समूह अब अपनी कंपनियों के परिचालन मानदंडों में सुधार और कर्ज कम करने पर जोर देगा। एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह बड़े अधिग्रहणों से भी परहेज करेग और जहां तक होगा अपने दम पर सभी कंपनियों में सुधार एवं इनके कारोबार विस्तार पर जोर देगा। पिछले वर्ष समूह की कंपनी टाटा स्टील ने भूषण स्टील और उषा मार्टिन का अधिग्रहण किया था और ये दोनों दांव काफी सफल रहे थे। इस बारे में टाटा समूह के एक अधिकारी ने कहा, 'टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टाटा पावर निकट भविष्य में अपने ऊपर कर्ज कम से कम 30 प्रतिशत तक घटा सकती हैं।'

अधिकारी ने कहा कि चंद्रशेखरन समूह की सभी कंपनियों के परिचालन मानदंड दुरुस्त करने पर विशेष जोर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल सितंबर से उपभोग के मोर्चे पर सुस्ती के बाद आर्थिक हालात काफी बदल गए हैं। अधिकारी ने कहा कि चंद्रा बेहतर नतीजे पाने के लिए हालात भांपकर नीतियां बनाते हैं।  अधिकारी ने चेयरमैन के शब्द दोहराते हुए कहा, 'अगर आप मैराथन दौड़ में हिस्सा ले रहे हैं तो आपको अपनी हृदय गति, रफ्तार और शारीरिक हावभाव पर खास ध्यान देना होगा। ऐसा नही करने पर आप मैराथन जरूर पूरी कर लेंगे, लेकिन इसका मजा शायद नहीं ले पाएंगे।'

कैपिटालाइन के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2019 के अंत तक टाटा समूह पर कुल 2.77 लाख करोड़ रुपये संचयी कर्ज था। इस कर्ज का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा टाटा स्टील (भूषण स्टील के कर्ज सहित), टाटा मोटर्स और टाटा पावर के हिस्से में है। दिसंबर तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद समूह के शीर्ष प्रबंधन ने अपना इरादा पहले ही जाहिर कर दिया था। समूह की कंपनियां कर्ज कम करने और वित्तीय सेहत सुधारने के लिए सभी उपाय कर रही हैं। सितंबर 2018 के अंत तक टाटा स्टील पर कुल 1.19 लाख करोड़ रुपये सकल कर्ज था, जो मार्च 2019 में कम होकर 1 लाख करोड़ रुपये रह गया। अब समूह ने इस वित्त वर्ष के अंत तक कर्ज कम कर 90,000 करोड़ रुपये और अगले कुछ वर्षों में इसके  घटाकर 70,000 करोड़ रुपये तक करने की योजना तैयार की है।

टाटा स्टील के मुख्य वित्तीय अधिकारी और कार्यकारी निदेशक कौशिक चटर्जी ने पिछले महीने निवेशकों को कहा था, 'यह पहले के  हमारे तय लक्ष्य के मुकाबले खासा बड़ा मुकाम होगा।' चटर्जी ने कहा था कि अब टाटा स्टील एक रणनीतिक पहल के तौर पर लगातार कर्ज कम करने और बहीखाता संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

उन्होंने निवेशकों को कहा था कि कलिंगनगर सहित समूह अपनी कंपनियों के विस्तार के लिए दीर्घ अवधि की रणनीति तैयार कर रही है। टाटा समूह के अधिकारी ने कहा कि यह लक्ष्य हासिल करने के लिए घरेलू परिचालनों पर खासा जोर दिया जाएगा, जिसमें सालाना आधार पर खासी तेजी दिखी है। टाटा स्टील कर्ज कम करने और बहीखाता दुरुस्त करने के लिए टिसेनक्रुप सौदे पर आस टिकाए हुई थी। हालांकि टाटा स्टील इससे बहुत चिंतित नहीं है क्योंकि इसकी कुल 2.8 करोड़ टन उत्पादन क्षमता में यूरोप का हिस्सा बहुत अधिक नहीं है। अब कंपनी अपना देसी परिचालन मजबूत करने पर ध्यान दे रही है और यूरोपीय कारोबार पर निर्भरता भी कम करना चाहती है। 

समूह की एक अन्य कंपनी टाटा पावर पर करीब 45,000 करोड़ रुपये कर्ज है और यह बोझ कम करने के लिए कंपनी प्रयास कर रही है। टाटा पावर के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक प्रवीर सिन्हा ने कहा, 'हम हालत सुधारने खासकर कर्ज कम करने के लिए कई उपाय कर रहे हैं।' दो वर्ष पहले तक समूह में एक खास स्थान रखने वाली टाटा मोटर्स भी कर्ज तले जूझ रही है।  घरेलू व्यवसाय में टाटा मोटर्स का वाणिज्यिक वाहन व्यवसाय हर साल 12,000 करोड़ रुपये का नकदी प्रवाह आकर्षित कर रहा है, जबकि यात्री कार व्यवसाय के लिए यह आंकड़ा 2,000 करोड़ रुपये का है। जेएलआर का मुक्त नकदी प्रवाह एक अरब पौंड का है। उन्होंने कहा, 'पिछले साल सितंबर तक, हमारी यात्री कार बिक्री काफी अच्छी थी। लेकिन उसके बाद से बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। यह मुख्य रूप से नकदी समस्या के बजाय उपभोक्ताओं के विश्वास के अभाव की वजह से है।'

कंसल्टिंग फर्म रोलैंड ऐंड बर्जर में पार्टनर राहुल गांगल का कहना है कि स्टील एवं ऑटोमोबाइल्स समेत समूह के ज्यादातर विकास इंजन मजबूत घरेलू बाजार का लाभ उठाने में सक्षम होंगे और साथ ही परिचालन दक्षता में सुधार से कर्ज घटाने में मदद मिलेगी। गांगल का कहना है, 'समूह को शानदार परिचालन प्रदर्शन के साथ साथ नई व्यावसायिक क्षमताओं के हासिल होने से दीर्घावधि में फायदा होगा।'

घरेलू व्यवसाय के प्रदर्शन में सुधार लाने की चंद्रा की कोशिश ऐसे समय में सामने आई है जब भारत को खपत संबंधित खर्च में मंदी की स्थिति का सामना करना पड़ा है। ग्रामीण दबाव के साथ साथ आईएलऐंडएफएस घटनाक्रम के बाद पैदा हुए नकदी संकट से भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) प्रभावित हुईं और कंज्यूमर ड्यूरेबल, पैकेज्ड सामान और वाहन क्षेत्रों में मांग में कमी आई।

एसबीआईकैप सिक्योरिटीज में रिटेल रिसर्च के प्रमुख महंतेष सैबेअर्ड ने कहा, 'ऐसा लगता है कि समूह अब विकास को लेकर कुछ नरमी दिखा रहा है। यदि आप किसी कंपनी को मजबूत बनाने की संभावना तलाशेंगे तो आपको उस वृद्घि को नजरअंदाज करना होगा जो कुछ हद तक अस्थिरता और अनिश्चितता से जुड़ी हो।' चूंकि समूह कर्ज स्तरों पर भी ध्यान दे रहा है जिसका यह भी मतलब है कि टाटा समूह की कंपनियां ऋण पूंजी से दूर होंगी। उन्होंने कहा कि आप यह देख सकते हैं कि टाटा मोटर्स जैसी कुछ कंपनियां पहले से ही इस मार्ग पर चल रही हैं, किसी बड़े पूंजीगत खर्च या परियोजना की घोषणा नहीं की गई है, और सिर्फ मौजूदा परियोजनाओं पर ही ध्यान दिया जा रहा है।

चूंकि एनबीएफसी क्षेत्र पर संकट बना हुआ है, इसलिए चंद्रा का मानना है कि समूह की वित्तीय सेवा कंपनियां वृद्घि पर बहुत ज्यादा जोर न दें बल्कि जोखिम और परिचालन मानकों पर ध्यान दें। समूह का वित्तीय सेवा व्यवसाय बदलते व्यावसायिक मिश्रण पर काम कर रहा है और अधिक निवेश जोखिम वाले क्षेत्रों की भागीदारी घटा रहा है।  टाटा समूह की कंपनियों में निवेशक मौजूदा घटनाक्रम पर ध्यान दे रहे हैं। आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्युचुअल फंड के मुख्य कार्याधिकारी ए बालासुब्रमण्यन ने कहा, 'चंद्रा के नेतृत्व में, समूह ने व्यावसायिक मानकों पर खास ध्यान दिया है।' वर्टिकल से संबंधित दृष्टिकोण और अनुकूलन पहले कदम थे और अब बैलेंस शीट की तुलना में व्यावसायिक लक्ष्यों को अनुकूल बनाना पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'वित्त पर इस तरह ध्यान केंद्रित करने से शेयरधारक वैल्यू का निर्माण होता है।'
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