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छोटे शहरों में बड़े रियल एस्टेट ब्रॉन्डों का जलवा

विनय उमरजी / अहमदाबाद June 16, 2019

सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं, छोटे और मझोले शहरों में ब्रॉन्ड के रूप में पहचान बना चुके रियल्टी डेवलपरों का खरीदारों के बीच जलवा बढ़ा है। आवासीय मकान खरीदने वाले अब असंगठित डेवलपरों को छोड़कर ब्रांडेड नामों का रुख कर रहे हैं।  2018 में मकानों की कुल बिक्री में नामी रियल एस्टेट ब्रॉन्डों की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 56 प्रतिशत हो गई है, जिसमें 2015 के बाद से हर साल बढ़ोतरी हो रही है। 2015 में इनकी हिस्सेदारी 41 प्रतिशत थी। रियल एस्टेट सलाहकार फर्म एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंड के आंकड़ों से यह जानकारी मिलती है।

 
एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के निदेशक और प्रमुख (शोध) प्रशांत ठाकुर के मुताबिक ब्रॉन्डेड डेवलपरों में सिर्फ सूचीबद्ध कंपनियां ही शामिल नहीं हैं। एक दशक या उससे भी ज्यादा समय से काम कर रहे रियल एस्टेट डेवलपर, बड़े उद्योग घरानों द्वारा हाल में स्थापित कंपनियां और किसी इलाके या पूरे देश में बड़े पैमाने पर काम करने वाले डेलवपरों को ब्रॉन्डेड डेवलपर के रूप में चिह्नित किया जाता है।   ठाकुर ने कहा, 'इन कंपनियों की नई आपूर्ति प्रीमियम और लग्जरी सेग्मेंट तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपना प्रसार सबसे ज्यादा मांग वाले सस्ते आवास और मझोले आवास तक किया है, जिनका बजट 80 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है। खुदरा क्षेत्र में अब हम देख रहे हैं कि कि कुछ डिजाइनर कपड़े बनाने वाले ब्रॉन्ड अब तुलनात्मक रूप से सस्ते परिधान पेश कर रहे हैं, जो गैर इलीट ग्राहकों के लिए हैं। रियल एस्टेट में मध्य वर्ग का प्रसार उच्च वर्ग और मजदूर वर्ग के बीच काफी व्यापक है। यह ऐसा वर्ग है, जहां अंतिम उपभोक्ताओं की मांग सबसे ज्यादा है। निवेशक भी अंतिम ग्राहक की मांग के मुताबिक काम करते हैं और डेवलपर भी उसी के मुताबिक चल रहे हैं।'
 
नोटबंदी, रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसे नियामकीय बदलावों से भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में अनियमित काम करने वालों का कारोबार प्रभावित हुआ है।  ठाकुर ने कहा, 'कम बिक्री, पूंजी की कमी और निजी इक्विटी फंडों में शून्य अधिभार की वजह से तमाम छोटे डेवलपरों को या तो कारोबार से बाहर होना पड़ा है, या विलय, अधिग्रहण और बड़े संगठित बिल्डरों के साथ मिलकर काम करने को विवश होना पड़ा है।' नोटबंदी के  बाद से गैर ब्रांडेड डेवलपरों की नए मकानों की पेशकश में हिस्सेदारी 2017 में घटकर 48 प्रतिशत रह गई, जो इसके पहले साल 58 प्रतिशत थी। उसके बाद से ही इसमें लगातार गिरावट आ रही है। वहीं ज्यादा सुविधाओं वाली परियोजना की मांग बढ़ रही है। इसकी वजह से ब्रॉन्डेड डेवलपरों की मांग में तेज बढ़ोतरी हुई है। 
 
नाइट फ्रैंक इंडिया में इंडस्ट्रियल ऐंड एसेट सर्विसेज के नैशनल डायरेक्टर बलबीर सिंह खालसा ने कहा, 'ज्यादा सुविधाओं वाली परियोजनाएं ब्रॉन्डेड और संगठित बिल्डर पेश कर रहे हैं, जिनके खरीदार ज्यादा हैं। लोग बड़े डेवलपरों द्वारा विकसित किए जा रहे टाउनशिप का रुख कर रहे हैं और असंगठित डेवलपरों की एकल परियोजनाओं में नहीं जा रहे हैं।' एकल परिवार की वजह से भी कम्युनिटी में रहने का प्रचलन बढ़ रहा है, जिससे ब्रॉन्डेड डेवलपरों द्वारा पेश की जा रही बड़ी परियोजनाओं की मांग बढ़ी है।
Keyword: real estate, property, GST,,
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