बिजनेस स्टैंडर्ड - नए सीमा पार दिवाला प्रावधान की तैयारी
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नए सीमा पार दिवाला प्रावधान की तैयारी

वीणा मणि / नई दिल्ली June 16, 2019

कंपनी मामलों के मंत्रालय ने सीमा पार दिवाला को लेकर कैबिनेट नोट तैयार किया है। उम्मीद है कि इसके लिए जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी।  ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) में सीमा पार दिवाला के प्रावधान शामिल किए जाने से विदेशी कर्जदाताओं को भारत की दिवाला कंपनियों व भारतीय कर्जदाताओं को विदेश की दिवाला कंपनी के मामले में ताकत मिलेगी।  कैबिनेट नोट में आईबीसी की धारा 234 और 235के तहत मौजूदा प्रावधानों से इतर एक अलग अध्याय लाने की बात कही गई है। प्रावधान के तहत नियम को अधिसूचित नहीं किया गया है और इसके कारण सीमा पार दिवाला अब तक प्रभावी नहीं हुआ है। 
 
आईबीसी में यह अध्याय इसलिए जोड़ा जा रहा है कि मौजूदा धाराओं के तहत सीमा पार दिवाला को तभी लागू किया जा सकता है, जब भारत ने विदेशी सरकारों के साथ द्विपक्षीय संधियां की हों, जो एक लंबी प्रक्रिया होगी।  इन संधियों के  प्रभाव में आए बिना विदेशी निवेशकों में अनिश्चितता की स्थिति रहेगी। इससे भारतीय न्यायालयों व राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण के लिए अनिश्चितता की स्थिति पैदा होगी, जिन्हें हर मामले के मुताबिक अलग अलग फैसला करना होगा। यह अध्याय शामिल किए जाने के बाद आईबीसी में संशोधन के लिए संसद से मंजूरी की जरूरत होगी।
 
इस मकसद के लिए सरकार ने यूनाइटेड नेशंस कमीशन ऑन इंटरनैशनल ट्रेड लॉ या यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल अपनाया है। इस मॉडल के मुताबिक भारत को न्यायक्षेत्रों के लिए पारस्परिक व्यवस्था करनी होगी, जो सीमा पार दिवाला कानून होगा।  इससे दो देशों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान का समय कम होगा।  अधिकारियों ने कहा कि यह विदेशी निवेशकों और बहुपक्षीय एजेंसियों जैसे विश्व बैंक के लिए संकेत होगा कि देश के वित्तीय क्षेत्र में तेजी से सुधार हो रहा है। विश्व बैंक की कारोबार सुगमता रिपोर्ट 2018 में भारत 190 देशों में 77वें पायदान पर था, जबकि 2017 में 100वें पायदान पर था। 
 
कंपनी मामलों के सचिव इंजेति श्रीनिवास की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल पर कानून बनाने की सिफारिश की थी। यह मॉडल मुख्य रूप से 4 प्रमुख सिद्धांतों पर निर्भर है- घरेलू चूककर्ता के मामले में विदेशी दिवाला पेशेवरों और विदेशी कर्जदाताओं की घरेलू दिवाला प्रक्रिया में सीधी पहुंच, उपचार के विदेशी प्रक्रिया व प्रावधानों को मान्यता देना, घरेलू व विदेशी न्यायालयों और घरेलू व विदेशी दिवाला पेशेवरों के बीच सहयोग व अलग अलग देशों में दो या दो से अधिक समवर्ती दिवाला मामलों की प्रक्रिया में समन्वय। इस मॉडल को 44 देशों ने स्वीकार किया है, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर शामिल हैं। इसके पहले आईबीसी में धारा 29 (ए) को शामिल करने के लिए संशोधन किया गया था, जो दिवाला कंपनी के प्रमोटर को उस कंपनी की बोली में शामिल होने से रोकती है। 
Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,,
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