बिजनेस स्टैंडर्ड - नियामकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत
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नियामकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत

सुदीप्त दे /  June 16, 2019

हाल की दो घटनाओं पर गौर करने से पता चल जाएगा कि आईएलऐंडएफएस संकट के बाद आगामी महीनों में विनियमित होने वालों और नियामकों के बीच संबंध में किस प्रकार का बदलाव आने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 20 मई को चेन्नई में अपने केंद्रीय बोर्ड की बैठक के बाद एक पर्यवेक्षक काडर गठित करने की घोषणा की ताकि देश के वित्तीय क्षेत्र में बढ़ रही जटिलताओं और आपसी तालमेल के अभाव के कारण पैदा होने वाली समस्याओं से निपटा जा सके। वर्तमान में आरबीआई के भीतर तीन पर्यवेक्षी विभाग- बैंकिंग पर्यवेक्षी विभाग, सहकारी बैंकिंग पर्यवेक्षी विभाग और गैरबैंकिंग पर्यवेक्षी विभाग- मौजूद हैं। बैंकिंग नियामक ने कहा है कि पर्यवेक्षी संसाधनों की बेहतर उपयोगिता के लिए इन विभागों को एकीकृत किया जाएगा। नियामक ने बेहतर पर्यवेक्षण के लिए इन विभागों को एकीकृत करते हुए बाहर से विशेषज्ञ उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।

 
दूसरी घटना है कंपनी मामलों के मंत्रालय और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के बीच डेटा विनिमय के लिए सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर। बाजार नियामक की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले कॉरपोरेट धोखाधड़ी के परिप्रेक्ष्य में निगरानी की बढ़ती जरूरतों के मद्देनजर इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि एमओयू यह सुनिश्चित करेगा कि नियामकीय कार्यों के लिए कंपनी मामलों के मंत्रालय और सेबी के बीच निर्बाध संपर्क है।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि आईएलऐंडएफएस मामले में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के मामले में आरबीआई का पर्यवेक्षण पर्याप्त न होने के कारण स्थिति को दुरुस्त करने के लिए विभिन्न नियामकों द्वारा तत्काल कार्रवाई की जा सकती है। स्टेकहोल्डर्स एम्पावरमेंट सर्विसेज (एसईएस) के प्रबंध निदेशक जेएन गुप्ता ने कहा, 'आईएलऐंडएफएस मामले से आंशिक तौर पर नियामकीय बैंडविड्थ का मामला उजागर होता है। इससे यह भी पता चलता है कि आईएलऐंडएफएस जैसी कंपनियों के पर्यवेक्षण के मामले में नियामकों के अधिकारों का एक-दूसरे में घालमेल भी है।'
 
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख नियामकों- आरबीआई, सेबी और कंपनी मामलों के मंत्रालय- को अब साथ मिलकर काम करना सीखना होगा। उन्होंने एक विशेषज्ञ पर्यवेक्षी काडर तैयार करने की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि कुछ तिमाहियों के दौरान व्यावहारिक समस्याएं दिख सकती हैं क्योंकि अधिक परतें खुलने पर अधिक अक्षमता दिख सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग नियामक के लिए यह जरूरी है कि वह पारंपरिक प्रावधान के बजाय नकदी संबंधी जोखिम और पूंजी पर्याप्तता अनुपात पर अधिक ध्यान दे।
 
ईवाई इंडिया के प्रमुख (वित्तीय सेवा एवं पुनर्गठन एवं पुनरुद्धार सेवाएं) अबीजर दीवानजी ने कहा, 'बैंकिंग नियामक को मूल संस्थानों  के विस्तृत पर्यवेक्षण के बजाय जोखिम आधारित पर्यवेक्षण की ओर रुख करना चाहिए जिसमें डेटा एनालिटिक्स शामिल हो। इससे बैंकों एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के परिचालन एवं कामकाज संबंधी प्रमुख अनियमिताएं उजागर होंगी।' जाहिर तौर पर नियामकों को धोखाधड़ी एवं बाजार संबंधी विफलताओं का अनुमान लगाने के लिए अपेक्षाकृत बेहतर पैठ वाली प्रणाली के लिए काम करने की जरूरत है।
 
फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के मैनेजिंग पार्टनर संदीप पारेख ने कहा, 'एक पर्यवेक्षी काडर गठित करने संबंधी आरबीआई की पहल अच्छी है क्योंकि इससे बैंक एवं गैर-बैंकिंग संस्थानों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा सकेगी जिससे पहचान न होने वाली धोखाधड़ी के मामलों को कम करने और बाजार पर उसके प्रभाव को सीमित करने में मदद मिलेगी।' विशेषज्ञों ने कहा कि प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और उचित प्रकिया की जरूरतों के लिहाज से मौजूदा बैंकिंग विनिमय अधिनियम पर्याप्त नहीं है। कार्नेजी इंडिया के फेलो सुयश राय ने अपनी रिपोर्ट 'रेग्युलेशन इन इंडिया: डिजाइन, कैपेसिटी, परफॉर्मेंस' में कहा है, 'ऐसा नहीं लगता है कि निरीक्षण करने की शक्ति का आशय निरीक्षण एवं जांच में अंतर से है। इन शक्तियों का इस्तेमाल किन मामलों में किया जाए इसका कानून में स्पष्ट तौर पर उल्लेख नहीं किया गया है।' आज के भारत में बैंकिंग नियामक की चुनौतियां न केवल ढांचागत समस्याओं से निपटने की है बल्कि उसे उन नए उभरते कारोबारी मॉडलों पर भी नजर रखना होगा जो पारंपरिक बैंकिंग कारोबार में उथल-पुथल मचा सकते हों। 
 
विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार फिर बाजार नियामक सेबी की क्षमता कम दिखने लगी है। मार्च 2017 तक सेबी में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या 788 थी जिसमें से 692 अधिकारी और 96 सचिव एवं अन्य कर्मचारी थे। इसके विपरीत अमेरिकी बाजार नियामक यूएस सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन के कर्मचारियों की संख्या करीब 4,600 (वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार) थी। कोटक समिति की रिपोर्ट में कहा गया है, 'अमेरिकी बाजार नियामक के पास प्रत्येक सूचीबद्ध कंपनी के लिए लगभग एक कर्मचारी उपलब्ध है।' जबकि 'सेबी के पास छह सूचीबद्ध कंपनियों के लिए एक कर्मचारी उपलब्ध है।'
 
आईएलऐंडएफएस संकट के बाद विनियामक एवं विनियमित होने वालों के बीच उभरते संबंध के बारे में विशेषज्ञों ने कहा है कि नियामकीय ओवरलैप आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविकता है। एलऐंडएल पार्टनर्स की पार्टनर अलीना अरोड़ा ने कहा, 'उम्मीद है कि नियामकों के बीच सूचनाओं के बेहतर प्रवाह के लिए नियामकीय संस्थान अपने ढांचे को बेहतर करेंगे।' दीवानजी का मानना है कि किसी प्रभावी विनियमन के लिए विनियमित होने वालों में विनियामक का डर होना जरूरी है। उन्होंने कहा, 'यह अनुशासन के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है। नियामकों को भी अपनी ओर से पहल करनी चाहिए और उान्हें अपने काम के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।'
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