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इक्विटी फंड प्रवाह हो रहा मजबूत

जश कृपलानी /  June 16, 2019

अपनी डेट योजनाओं के जोखिम से जूझ रहे म्युचुअल फंड उद्योग को मई में पूंजी प्रवाह के संदर्भ में कुछ राहत मिली। इन योजनाओं में शुद्घ प्रवाह 17 प्रतिशत बढ़कर 5,407 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, क्योंकि चुनाव में नरेंद्र मोदी की जीत से निवेशक धारणा में सुधार आया है। इसके अलावा, निवेशकों में ज्यादा जोखिम भूख का भी संकेत दिखा, क्योंकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप योजनाओं ने सामूहिक रूप से इक्विटी योजनाओं में दर्ज किया गया लगभग 50 प्रतिशत पूंजी प्रवाह हासिल किया। इन दो श्रेणियों के लिए निवेश प्रवाह का कुल आंकड़ा 2,687 करोड़ रुपये रहा। मिड-कैप योजनाओं में प्रवाह (1,272 करोड़ रुपये) पूर्ववर्ती महीने में दर्ज स्तर के लगभग 2.6 गुना पर था। इस बीच, स्मॉल-कैप योजनाओं में पूंजी प्रवाह 48 प्रतिशत बढ़कर मई में 1,415 करोड़ रुपये रहा। विश्लेषकों का कहना है कि मिड-कैप श्रेणी में आ रही निवेशकों की रकम काफी हद तक उम्मीद के अनुरूप रही है।

 
मिरई ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी स्वरूप मोहंती ने कहा, 'निवेशक यह मान रहे हैं कि चुनाव परिणाम से बड़ी तेजी आ सकती है। सकारात्मक संकेतक लार्ज- और मिड-कैप श्रेणी में पूंजी आना होगा।' विश्लेषक इसे लेकर सतर्क हैं कि मिड- और स्मॉल-कैप योजनाओं में आ रही पूंजी की रफ्तार अस्थिर हो सकती है और यह कम टिकाऊ हो सकती है। इस उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'मिड-कैप और स्मॉल-कैप में उतार-चढ़ाव के आसार हैं। इसलिए, इन योजनाओं में आने वाली रकम ऊंचे स्तर के रिडम्पशन से जुड़ी हो सकती है।' पूंजी प्रवाह में अच्छी तेजी दर्ज करने वाली अन्य इक्विटी श्रेणी फोकस्ड कैटेगरी थी। इस श्रेणी में मई में प्रवाह पांच गुना बढ़कर 1,199 करोड़ रुपये पर रहा। 
 
मई के अंत में, उद्योग की परिसंपत्तियां 25 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंच गईं जो पूर्ववर्ती महीने की तुलना में 4.6 प्रतिशत की वृद्घि है। उद्योग ने आईएलऐंडएफएस संकट से बाजार प्रभावित होने से पहले पिछले साल अगस्त में यह स्तर हासिल किया था। इस बीच, निवेशक क्रेडिट-रिस्क फंडों से लगातार दूरी बनाए हुए हैं। इस श्रेणी में मई में लगभग 4,155 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई जिसके साथ ही पिछले दो महीनों की कुल पूंजी निकासी बढ़कर 5,408 करोड़ रुपये हो गई। विश्लेषकों का कहना है कि क्रेडिट-रिस्क फंडों में पूंजी प्रवाह सुधरने में कुछ समय लग सकता है। भारत में एम्फी के मुख्य कार्यकारी एन एस वेंकटेश ने कहा, 'निवेशक इस श्रेणी में पैसा लगाने से पहले हालात और अवसरों की लगातार समीक्षा करेंगे।'
 
एक डेट फंड प्रबंधक ने कहा, 'रेटिंग में कमी के बीच और कुछ कर्ज-ग्रस्त इकाइयों द्वारा भुगतान में विलंब से क्रेडिट-रिस्क फंडों से जुड़ी धारणा प्रभावित हुई है।' निर्धारित परिपक्वता योजनाओं (एफएमपी) जैसी क्लोज-एंडेड योजनाओं को लेकर धारणा कमजोर बनी हुई है। इस श्रेणी में 1,797 करोड़ रुपये की कुल पंूजी निकासी दर्ज की गई। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती से लंबी अवधि की योजनाओं में पूंजी प्रवाह आकर्षित हो सकता है। 
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