बिजनेस स्टैंडर्ड - जीवन बीमा क्षेत्र: लंबी अवधि का अच्छा दांव
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जीवन बीमा क्षेत्र: लंबी अवधि का अच्छा दांव

हंसिनी कार्तिक /  June 16, 2019

जीवन बीमा कंपनियों द्वारा अर्जित बीमा प्रीमियम से संबंधित ताजा आंकड़ों से सकारात्मक रुझान का संकेत मिलता है। मई में लगातार दूसरे महीने निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियों ने 27 प्रतिशत की प्रीमियम वृद्घि दर्ज की। इस वृद्घि का कुछ हद तक असर प्रमुख सूचीबद्घ जीवन बीमा कंपनियों एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ (एचडीएफसी लाइफ) और एसबीआई लाइफ की शेयर कीमतों पर दिखा है। इन शेयरों की कीमतें अप्रैल 2019 से 16 प्रतिशत तक चढ़ी हैं। जहां आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ (आई-प्रू लाइफ) द्वारा आंकड़े जारी किए जाने बाकी हैं। हालांकि एक वर्षीय समय-सीमा के आधार पर इन तीनों शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है और इनमें वृद्घि सपाट रही है। यही वजह है कि इन्विजन कैपिटल के नीलेश शाह इसे लेकर सतर्क हैं कि उद्योग अभी शुरुआती चरण में है और निवेशकों को कुछ जोखिमों को ध्यान में रखने की जरूरत होगी।
 
शाह कहते हैं, 'बैंकों के विपरीत, शेयर बाजारों पर जीवन बीमा अपेक्षाकृत नया व्यवसाय है। नियामकीय ढांचे और प्रबंधन रणनीतियों में बदलाव को देखते हुए यह लंबी अवधि के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है और निवेशकों को निवेश बनाए रखने के लिए इंतजार करने की जरूरत होगी।' कंपनी-केंद्रित कारणों से शाह की चिंताओं की पुष्टि हुई है। आई-प्रू लाइफ ने अपनी यूनिट-लिंक्ड बीमा पॉलिसी या यूलिप मॉडल में बदलाव किया है। यह एक ऐसी योजना है जो काफी हद तक इक्विटी बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करती है और वित्त वर्ष 2019 में बीमा कंपनी के व्यवसाय में इसका लगभग 80 फीसदी योगदान रहा। एसबीआई लाइफ और एचडीएफसी लाइफ के बीच कांटे की टक्कर से इनके शेयरों में वृद्घि की गुंजाइश सीमित हो गई है। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2019 ताकत पुन: हासिल करने, कमजोरी और कई खिलाडिय़ों के लिए संभावनाओं की अवधि रही है और इसलिए वित्त वर्ष 2020 के बेहतर रहने की उम्मीद है।
 
जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2019-वित्त वर्ष 2021 में जीवन बीमा उद्योग के लिए औसत प्रीमियम इक्विलेंट (एपीई) में सालाना 16 प्रतिशत की वृद्घि का अनुमान जताया है। उनका कहना है, 'इक्विटी बाजार में ताजा तेजी यूलिप के लिए अच्छा संकेत है और घटती ब्याज दों से खासकर मियादी जमाओं जैसी अन्य बचत योजनाओं से प्रतिस्पर्धा घट रही है।' व्यक्तिगत रूप से, आई-प्रू लाइफ के नुकसान से दो बड़ी प्रतिस्पर्धियों, खासकर एसबीआई लाइफ को फायदा मिला है। एसबीआई लाइफ ने रैंकिंग चार्ट में देर से बढ़त बनाई है, चाहे यह नए व्यवसाय की वैल्यू के संदर्भ में हो या एपीई के संदर्भ में। 
 
विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2020 में एसबीआई लाइफ अपना दबदबा बनाए रख सकती है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों को एपीई में सालाना आधार पर 20 प्रतिशत और नए व्यवसायों की वैल्यू (एनवीबी) में 21.3 प्रतिशत की वृद्घि का अनुमान है। उनका कहना है, 'बचत व्यवसाय में अच्छे मार्जिन और सुरक्षा व्यवसाय में मामूली वृद्घि के साथ साथ निरंतरता में सुधार प्रमुख वाहक साबित होंगे।' एचडीएफसी लाइफ दूसरे स्थान पर बरकरार है और 25 प्रतिशत वीएनबी मार्जिन ने उसकी हैसियत बेहद लाभदायक बीमा कंपनी के तौर पर बनाए रखी है। सीएलएसए के अनुसार, कंपनी वित्त वर्ष 2019-21 में 19 प्रतिशत की सालाना एपीई वृद्घि दर्ज कर सकती है जबकि उसका वीएनबी मार्जिन बढ़कर 26 प्रतिशत पर पहुंच सकता है। 
 
वहीं आई-प्रू लाइफ को यह साबित करने की जरूरत होगी कि यूलिप पर उसकी नई रणनीति एपीई में गिरावट दूर करने के लिहाज से काफी प्रभावी है और इससे खोई हुई कुछ भागीदारी वापस लौटाने में मदद मिलेगी। मई में व्यक्तिगत एपीई में महज 1 प्रतिशत की वृद्घि को देखते हुए एमके ग्लोबल फाइनैंशियल के विश्लेषकों का कहना है कि बीमा कंपनी ने पोर्टफोलियो पुनर्गठन में विलंब किया है जिससे नए व्यवसाय पर दबाव बढ़ रहा है और अगले तीन वर्षों के दौरान मुनाफे की रफ्तार धीमी रहने की आशंका है। जेफरीज के विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2019-21 में 14.9 प्रतिशत वीएनबी वृद्घि की उम्मीद है जो वित्त वर्ष 2015-18 में 68.3 प्रतिशत रही। विश्लेषकों को धीमी एपीई वृद्घि की वजह से वीएनबी वृद्घि पर दबाव पडऩे का अनुमान है।
 
हालांकि मूल्यांकन सभी शेयरों के लिए अनुकूल हो गया है। आई-प्रू लाइफ और एसबीआई लाइफ के शयेर वित्त वर्ष 2020 की अनुमानित वैल्यू के 2.3-2.6 गुना पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि एचडीएफसी लाइफ 3.3 गुना की कीमत पर बना हुआ है। मुख्य जोखिम हालांकि इसे लेकर है कि क्या कंपनियां वित्त वर्ष 2020 में अपने पिछले वृद्घि रुझान को बरकरार रख पाएंगी या नहीं। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि सभी कंपनियों के लिए वृद्घि अलग अलग है और वर्ष के शेष समय में इसमें बदलाव आ सकता है। उनका कहना है, 'यह जरूरी है कि वित्त वर्ष 2019 की वृद्घि को पार करने के प्रयास में आगामी तिमाहियों में वृद्घि की रफ्तार कायम रहे।'
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