बिजनेस स्टैंडर्ड - खपत आधारित फंडों के निवेशक लंबे समय तक करें निवेश
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, October 16, 2019 08:24 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

खपत आधारित फंडों के निवेशक लंबे समय तक करें निवेश

संजय कुमार सिंह /  June 16, 2019

ऐसा लगता है कि भारत में खपत को एक अस्थायी झटका लगा है। वाहनों, विशेष रूप से निजी परिवहन के साधनों और फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) की मांग में कमी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि गैर-जरूरी वस्तुओं के खंड में मांग में कमी पूरी तरह साफ नहीं दिखाई दे रही है। जिन निवेशकों ने उपभोग क्षेत्र पर केंद्रित फंडों पर दांव लगाया है, उन्हें इन फंडों से निकट भविष्य में कमजोर प्रतिफल मिलने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस मंदी के लिए जिम्मेदार एक कारक आधार प्रभाव है। 

 
मिरे ऐसेट म्युुचुअल फंड के फंड प्रबंधक अंकित जैन ने कहा, 'वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से बहुत सी वस्तुओं पर कर की दरों में कमी आई, जिससे पिछले डेढ़ साल के दौरान उनकी बिक्री में बढ़ोतरी हुई। नोटबंदी और जीएसटी के बाद संगठित उद्यमियों ने असंगठित उद्यमियों की बाजार हिस्सेदारी हासिल की है। आधार प्रभाव वह एक कारक है, जिसकी वजह से अब बिक्री में धीमी वृद्धि हो रही है।' जैन मिरे एसेट ग्रेट कंज्यूमर फंड का प्रबंधन करते हैं।  कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अब जीएसटी और नोटबंदी के दीर्घकालिक असर दिखने लगे हैं। इन नीतिगत बदलावों ने उन छोटे कारोबारों को बुरी तरह से प्रभावित किया, जिनका रोजगार पैदा करने में अहम योगदान देते हैं। इन नीतिगत बदलावों से सबसे पहले असर इन कारोबारों पर पड़ा, फिर रोजगार वृद्धि पर और अंत में उपभोक्ता खर्च पर पड़ रहा है। 
 
शहरी इलाकों में एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों में संकट का भी मांग पर असर पड़ा है। इक्वेरियस वेल्थ मैनेजमेंट के सीईओ अंकुर माहेश्वरी ने कहा, 'इस संकट की वजह से इन ऋणदाताओं ने कम ऋण दिए हैं।' बैंक भी ऋण देने को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। ऋण देने में सख्ती से खर्च पर असर पड़ा है। शहरी इलाकों में रियल एस्टेट निवेश से कमजोर प्रतिफल के कारण भी उपभोक्ता रुझान प्रभावित हुआ है। ग्रामीण इलाकों में पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रति व्यक्ति आय वृद्धि सुस्त हुई है। 
 
जैन ने कहा, 'किसानों की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनकी उपज की कीमत में इस अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो रही है।' इससे उनकी खरीद क्षमता पर असर पड़ा है। मांग पर तात्कालिक कारकों का भी असर पड़ रहा है। टाटा म्युचुअल फंड के फंड प्रबंधक सोनम उदासी ने कहा, 'आम तौर पर ग्राहक चुनावी समय में बड़ी खरीद टाल देते हैं।' उदासी टाटा इंडिया कंज्यूमर फंड का प्रबंधन करते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि उपभोक्ता क्षेत्र में ऐसी मंदी हर तीन साल बाद आती है, इसलिए निवेशकों को अनावश्यक चिंतित नहीं होना चाहिए। 
 
ज्यादातर विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोग आधारित फंडों के वर्तमान निवेशकों को अपना निवेश बनाए रखना चाहिए। वजह- भारत की लंबे समय तक अच्छी मांग बने रहने की स्थितियां यथावत हैं। उदासी ने कहा, 'भारत की प्रति व्यक्ति आय पिछले 11 वर्षों के दौरान दोगुनी हो गई है। यह दोबारा दोगुनी कितनी जल्दी होती है, यह सरकारी नीतियों और अन्य कारकों पर निर्भर करेगा। लेकिन यह आम तौर पर जल्द दोगुनी होती है इसलिए हम 6-7 वर्षों में ऐसा होने की उम्मीद कर सकते हैं।' इसके अलावा टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की सभी तक उपलब्धता को एक लंबा सफर तय करना है। उदासी ने कहा, 'जब तक प्रति व्यक्ति आय और उपलब्धता में बढ़ोतरी जारी रहेगी, तब तक खपत अच्छी बनी रहने की संभावना है।' इसके अलावा प्रीमियम उत्पादों से इस क्षेत्र की कंपनियों की आमदनी में बढ़ोतरी की संभावना है। संगठित क्षेत्र के असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी हासिल करने का रुझान भविष्य में और तेज होगा। 
 
उपभोग ऐसा क्षेत्र है, जहां निवेशक बड़ी कंपनियां पा सकते हैं। इन कंपनियों में अच्छा प्रबंधन है, स्थापित ब्रांड हैं, कम ऋण और ऊंचा मुक्त नकदी आवक है। ऐसी कंपनियों के शेयर निवेशकों को 5 से 10 साल की अवधि में लगातार अच्छा चक्रवृद्धि प्रतिफल दे सकते हैं। नए निवेशकों को कुछ समय इंतजार करना चाहिए। माहेश्वरी ने कहा, 'मूल्यांकन ऊंचे स्तरों से नीचे आए हैं, लेकिन आगे और नीचे आ सकते हैं। सभी नकारात्मक खबरों के बने रहने तक इंतजार कीजिए और मूल्यांकन ज्यादा आकर्षक होने पर प्रवेश करें।'
Keyword: fund, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बिजली वितरण में फ्रेंचाइजी मॉडल होगा कारगर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.