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पांच नियमों का रखें ध्यान तो वित्तीय सफर बनेगा आसान

तिनेश भसीन /  June 16, 2019

एक नियम सभी परिस्थितियों में लागू नहीं होता है। लेकिन वित्तीय मामलों में कुछ बुनियादी सिद्धांतों से उन लोगों को मदद मिल सकती है, जो वित्तीय सफर की शुरुआत कर रहे हैं और अपने बिना किसी विशेषज्ञ सलाह के वित्तीय योजना बना रहे हैं। हर व्यक्ति की स्थिति अलग-अलग होती है, लेकिन बिना किसी सलाहकार की मदद के मूल सिद्धांत आपको सही रास्ते पर ले जा सकते हैं।  भले ही ये बहुत आसान लगते हैं, लेकिन निवेश सलाहकार भी कहते हैं कि ये बहुत मददगार हैं। सेबी में पंजीकृत एक निवेश सलाहकार दीपेश राघव ने कहा, 'अगर एक निवेशक वित्तीय योजना में बुनियादी नियमों को अपनाता है तो वह भारी भूलों से बच सकता है।' लैडर 7 फाइनैंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक सुरेश सदगोपन ने भी इससे सहमति जताते हुए कहा, 'ये ऐसे शॉर्ट-कट हैं, जो गलत निवेश फैसले लेने से बचाते हैं।' ऐसे बहुत से विस्तृत सिद्धांत हैं, जिनमें से कुछ आपको बेहतर संगठित बनने में  मदद करते हैं। यहां हम इस चीज का जिक्र कर रहे हैं, उनका कैसे इस्तेमाल करें। 

 
अनुशासन के लिए बजट 
 
50-20-30 का नियम आपको अपनी आवश्यकताओं, बचतों और इच्छाओं के आधार पर आमदनी का बजट बनाने में मदद करता है। इस सिद्धांत के मुताबिक मासिक आय का 50 फीसदी पैसा बिलों, समान मासिक किस्तों (ईएमआई) जैसे आवश्यक खर्च के लिए रखा जाना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को वित्तीय लक्ष्यों के लिए कम से कम 20 फीसदी पैसा रखना चाहिए। शेष 30 फीसदी पैसा छुट्टियां मनाने और बाहर खाने जैसे गैर-जरूरी खर्चों में इस्तेमाल किया जा सकता है। 
 
कैसे मिलती है मदद 
 
यह व्यक्ति को संगठित और खुद को अनुशासित बनाने में मदद करता है। ऐसे आवंटन से आपकी देनदारियों, लक्ष्यों और खर्च में संतुलन आता है। 
 
क्या नहीं करें 
 
जिन परिवारों का मासिक खर्च बहुत अधिक है, उन्हें भी भविष्य की जरूरतें पूरी करने के लिए पैसे बचाने की जरूरत है। सदगोपन ने कहा, 'जब आप भविष्य की योजना बनाते हैं तो अपनी वर्तमान जीवन शैली को देखते हैं और उसे बनाए रखने के लिए जरूरी धनराशि का आकलन हैं। आज ज्यादा पैसा खर्च करने का मतलब है कि परिवार को आगे अपनी आमदनी में से ज्यादा बचत करनी होगी।' इसके अलावा आमदनी बढऩे और देनदारियां कम होने पर बचत का हिस्सा बढ़ाकर 30 फीसदी किया जाना चाहिए। 
 
संपत्ति आवंटन से नियंत्रण 
 
इक्विटी में पैसा लगाने का सबसे लोकप्रिय नियम यह है कि 100 में से निवेशक की उम्र घटा दी जाए। अगर किसी व्यक्ति की उम्र 35 साल है तो उसे इक्विटी में 65 फीसदी (100-35) पैसा निवेश करना चाहिए। दिल्ली में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर नितिन गर्ग ने जब पहली बार म्युचुअल फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) शुुरू किया तो उन्होंने पांच साल तक इस नियम का पालन किया। गर्ग ने कहा, 'मेरी बेटी के जन्म के बाद मैंने इक्विटी में ज्यादा निवेश शुरू किया। इस बुनियादी नियम से मुझे शुरुआती वर्षों में एक अच्छी खासी रकम बनाने में मदद मिली।'
 
कैसे मिलती है मदद 
 
इक्विटी में लंबे समय तक अधिक निवेश से ज्यादा प्रतिफल मिलता है। बहुत से निवेशक शेयरों के अच्छा प्रदर्शन करने पर इक्विटी में निवेश और बाजारों में गिरावट शुरू होने पर उनसे दूरी बनाने की गलती भी करते हैं। संपत्ति को अलग-अलग जगह निवेश करने की रणनीति से उन्हें बाजार के सभी दौरों में निवेश करने में मदद मिलती है। 
 
क्या नहीं करें 
 
विभिन्न योजनाओं में निवेश लक्ष्य के लिए आवश्यक धनराशि और समयसीमा पर निर्भर करता है। प्रोफिशिएंट फाइनैंशियल प्लानर्स के संस्थापक स्टीवन फर्नांडिस कहते हैं, 'जो व्यक्ति अपने 30 के दशक के अंतिम वर्षों में है, उसे बच्चों की शिक्षा और उनकी शादी के लिए इक्विटी में ज्यादा निवेश की जरूरत पड़ सकती है। माता-पिता के साथ रहने वाले युवा इक्विटी में 80 से 100 फीसदी भी निवेश कर सकते हैं क्योंकि अमूमन उन पर कोई जिम्मेदारी नहीं होती है।'
 
आपात कोष  
 
किसी भी व्यक्ति को अपने छह महीने के खर्च लायक धनराशि एक आपात कोष में रखनी चाहिए। यह कोष उसे बेरोजगार होने या आय नुकसान वाली अन्य आपात स्थितियों से निपटने में मदद करता है। कोलकाता के अनिरुद्ध रॉय ने दो साल पहले अपना कारोबार शुरू किया। उस समय उनके बैंक खाते में महज तीन महीने के खर्च लायक राशि थी। कारोबार शुरुआत में ठीक नहीं चला और उनका पूरा पैसा खत्म हो गया। रॉय ने कहा, 'तब मैंने यह महसूस किया कि मुझे एक बड़ा आपात कोष रखना चाहिए था। अब मैंने एक आपात कोष बनाना शुरू कर दिया है।'
 
किससे मिलती है मदद 
 
अपनी बचतों को भुनाने के बजाय आपके पास एक आपात विकल्प होता है। 
 
क्या नहीं करना चाहिए  
 
किसी व्यक्ति को कितना आपात कोष रखना चाहिए, यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। दोहरी आमदनी वाले परिवार का काम तीन महीनों के खर्च लायक राशि के कोष से भी चल सकता है। निवेश सलाहकारों का सुझाव है कि कारोबारों के मालिकों को एक साल के खर्च लायक धनराशि रखनी चाहिए। वही, जो लोग उद्यमी बनने जा रहे हैं, उन्हें कम से कम दो वर्ष के खर्च लायक आपात कोष रखना चाहिए। अगर किसी के वृद्ध माता-पिता हैं तो उनकी चिकित्सा जरूरतों के लिए एक अलग आपात कोष बनाया जा सकता है। 
 
बीमा आय का विकल्प नहीं 
 
एक बुनियादी नियम के मुताबिक पर्याप्त सुरक्षा के लिए जीवन बीमा कवर सालाना आय का 10 गुना होना चाहिए। 
 
किससे मिलती है मदद 
 
ज्यादातर सर्वेक्षणों में इस ओर इशारा किया गया है कि भारत में परिवार के कमाऊ लोगों के पास जरूरत से कम बीमा है। सालाना आय का 10 गुना जीवन बीमा लेने से परिवार चलाने व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में परिवार को बड़ी मदद मिलती है। 
 
क्या नहीं करें 
 
जीवन बीमा में वे सभी खर्च शामिल होने चाहिए, जो परिवार को घर चलाने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद उठाने होंगे। इसमें देनदारियों और वित्तीय लक्ष्य भी शामिल होने चाहिए। अगर इन सभी को जोड़ते हैं तो बहुत से लोगों के लिए 10 गुना बीमा भी पर्याप्त नहीं होगा। 
 
सेवानिवृत्ति कोष कम नहीं 
 
बहुत से लोग अपनी उम्र के 40 के दशक में सेवानिवृत्ति के लिए बचाना शुरू करते हैं। इससे वे उतनी धनराशि नहीं जुटा पाते हैं, जिससे वे आसानी से अपना जीवन व्ययीत कर सकें। इस तरह मासिक बचत का 10 फीसदी पैसा सेवानिवृत्ति के लिए आवंटित करने से मदद मिल सकती है। 
 
किससे मिलती है मदद 
 
जब व्यक्ति युवा, अविवाहित और जिम्मेदारी-मुक्त होता है तो उस समय सेवानिवृत्ति के लिए जरूरी धनराशि का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। आपको 10 फीसदी के नियम से जल्द शुरुआत करने में मदद मिलती है। 
 
क्या नहीं करें 
 
हालांकि 10 फीसदी के नियम से आपको सेवानिवृत्ति के लिए जल्द बचत शुरू करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसके सेवानिवृत्ति के बाद के सभी खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होने के भी आसार हैं। आम तौर पर वित्तीय योजनकार परिवार के वर्तमान खर्च को देखते हैं और उसके आधार पर यह आकलन करते हैं कि व्यक्ति के सेवानिवृत्त होने पर यह खर्च कितना होगा। खर्च के इस आकलन में महंगाई को जोड़ा जाता है। फिर वे व्यक्ति के जीवनकाल को देखते हैं और उसके आधार पर सेवानिवृत्ति के समय फंड की जरूरत का आकलन करते हैं। 
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