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अमेरिकी सामान पर शुल्क

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली June 14, 2019

करीब एक साल तक टालमटोल करने के बाद सरकार ने अंतत: अमेरिका से आयात होने वाली 29 महत्त्वपूर्ण कृषि एवं औद्योगिक जिंसों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की घोषणा की है। यह शुल्क आगामी 16 जून से प्रभावी हो जाएगा। पहले यह शुल्क 4 अगस्त, 2018 से लागू होना था, लेकिन तब से इसे आठ बार टाला गया, लेकिन अब सरकारी सूत्रों ने व्यापार पर टं्रप प्रशासन की आक्रामक नीतियों के जवाब में शुल्क लगाए जाने की पुष्टि कर दी है। हालांकि सीमा शुल्क अधिकारी इसे जवाबी शुल्क कहने से बच रहे हैं। इससे पहले अमेरिका ने भारत से इस्पात एवं एल्युमीनियम आयात पर क्रमश: 25 प्रतिशत और 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। भारत ने अमेरिका से शुल्कों से रियायत देने का आग्रह किया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन की तरफ से कोई उत्साहजनक जवाब नहीं दिया। वाणिज्य विभाग ने वित्त एवं विदेश मंत्रालय को शुल्क लगाने के निर्णय से अवगत करा दिया है। शनिवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी हो जाएगी। 
 
अहम उत्पादों पर शुल्क
 
वाणिज्य विभाग ने कहा है कि अमेरिका से आयात होने वाले उत्पादों पर शुल्क लगाने से जितनी कमाई होगी, उससे भारत से अमेरिका को इस्पात एवं एल्युमीनियम के निर्यात पर शुल्क से होने वाले नुकसान की भरपाई हो जाएगी। वैसे भारत अमेरिका को इस्पात एवं एल्युमीनियम का मामूली आायात ही करता है, लेकिन वह इस बात से खफा था कि अमेरिका ने उसके आग्रह को तरजीह नहीं दी। दिलचस्प है कि अमेरिका मैक्सिको और कनाडा को शुल्क से छूट दे चुका है। भारत ने जिन वस्तुओं पर शुल्क लगाया है, उस सूची में 18 लौह एवं इस्पात वस्तुएं हैं। भारत के इस कदम को इसी क्षेत्र में शुल्क लगाने की अमेरिका की कवायद का रानीजतिक जवाब माना जा रहा है। भारत और अमेरिका के बीच शुल्क लगाने की होड़ के पीछे 800 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाले मोटरसाइकिलों का मुद्दा खासा अहम रहा है। भारत ने 2017-18 में इस श्रेणी में केवल 1 करोड़ डॉलर मूल्य की मोटरसाइकिलों का ही आयात किया था, लेकिन टं्रप बार-बार इसकी आड़ में भारत पर हमले  करते आ रहे थे। हालांकि पिछले वित्त वर्ष के आधार पर वास्तविक आयात मूल्य के लिहाज से सेब एवं बादाम जैसे कृषि उत्पादों पर अधिक असर होगा। अमेरिका इन दोनों उत्पादों का भारत को सबसे अधिक निर्यात करता है। इसके अलावा काबुली चना, मसूर दाल, अखरोट और आर्टेमिया के सौदे भी ऊंचे शुल्कों के कारण रद्द हो सकते हैं।
 
टाल मटोल
 
हाल में भारत के दौरे पर आए अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने कहा था कि  बाजार पूरी तरह नहीं खोलने की वजह से भारत अमेरिका के लिए एक निर्यात बाजार के रूप में 13वें स्थान पर है। उन्होंने कहा था कि इसकी तुलना में अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और इसके कुल निर्यात की 20 प्रतिशत खेप अमेरिकी बाजार पहुंचती है। भारत ने टं्रप प्रशासन के फैसले के बाद काफी धैर्य दिखाया और उसे कोई न कोई रास्ता निकनले की उम्मीद थी। 
Keyword: america, india, import, export,,
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