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रिलायंस कैपिटल से पीडब्ल्यूसी के इस्तीफे में कुछ लेनदेन पर संदेह का जिक्र

जश कृपलानी / मुंबई June 13, 2019

रिलायंस कैपिटल और रिलायंस होम फाइनैंस के अंकेक्षक से इस्तीफे वाले प्राइस वाटरहाउस ऐंड कंपनी के पत्र से पता चलता है कि फर्म को अनिल अंबानी समूह की फर्मों के बीच कुछ निश्चित लेनदेन की उपयुक्तता पर संदेह था। पत्र में पीडब्ल्यूसी ने कंपनी अधिनियम की धारा 143 (12) और कंपनी अंकेक्षण व अंकेक्षक नियम 2014 के नियम 13 का हवाला दिया है, जो अंकेक्षण करने वाली फर्म को 60 दिन के भीतर कंपनी को मामलों के मंत्रालय को रिपोर्ट देने की अनिवार्यता से जुड़ा है, अगर उसके पास यह मानने की वजह हो कि यह कृत्य धोखाधड़ी से जुड़ा हो सकता है।
 
अंकेक्षक की स्वीकार्यता के मुताबिक, मामले पर पहला पत्र आरकैप को 24 अप्रैल को लिखा गया और आरएचएफएल के मामले में पहला पत्र 18 अप्रैल को लिखा गया। पत्र लिखने के दोनों ही मामले में 60 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। गुरुवार को एक्सचेंज को किए खुलासे में आरकैप (जो आरएचएफएल की मूल कंपनी भी है) ने इससे इनकार किया कि वहां किसी तरह की अनियमितता हुई है और पीडब्ल्यूसी के आकलन को पूरी तरह आधारहीन व अनुचित बताया। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, हेराफेरी का सवाल ही नहींं है और पीडब्ल्यूसी के अंकेक्षण की अवधि में किसी लेनदार ने कोई भी कर्ज या नकदी मुहैया नहीं कराया।
 
उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक रिलायंस कैपिटल के लिए सिर्फ समूह की इकाइयों को फंड देना जरूरी है क्योंकि वह मुख्य रूप से निवेश कंपनी है। सभी संसाधनों का इस्तेमाल पिछले 14 महीने में शुद्ध रूप से 35,000 करोड़ रुपये के कर्ज के भुगतान में समूह को सहारा देने के लिए हुआ। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा स्थिति पीडब्ल्यूसी की भूमिका को भी जांच के घेरे में ला सकता है। एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा, सवाल उठाया जा सकता है कि क्या अंकेक्षण करने वाली फर्म ने एजेंसियों को सचेत करने से पहले मौजूदा नियमों के तहत जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया।
 
आरकैप ने कहा कि उसे मौजूदा अंकेक्षक पाठक एचडी ऐंड एसोसिएट्स की स्वतंत्र रिपोर्ट पर भरोसा है और यह रिपोर्ट स्थापित कर देगी कि वहां किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई है। सूत्रों ने कहा कि आरकैप को अगर मौजूदा अंकेक्षक से उसे क्लीन चिट मिल जाती है तो वह पीडब्ल्यूसी के खिलाफ कानूनी कदम की संभावना भी तलाश सकती है। पीडब्ल्यूसी ने इस्तीफे वाले पत्र में कहा है, उसे दोनों कंपनियों ने कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी, अगर उसने अंकेक्षक के तौर पर उसने अपना कर्तव्य निभाया। अंकेक्षक ने कहा है, अगर हम कानून के मुताबिक अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं तो 9 जून 2019 और 7 जून 2019 के पत्र में कंपनियों ने कानूनी व आपराधिक प्रक्रिया की चेतावनी दी। ऐसा कदम हमें कंपनी के सांविधिक अंकेक्षक के तौर पर अपना काम करने से रोकता है।
Keyword: reliance, capital, care rating, finance,,
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