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कारोबार सुगम बनाने की कवायद

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली June 13, 2019

भारत ने सीमा शुल्क को हरी झंडी देने में तेजी लाने के लिए विश्व बैंक के सामने 'लाल, अंबर, हरा' मॉडल पेश किया है। सरकार की यह कवायद कारोबार सुगमता की श्रेणी में सुधार करने की दिशा में एक कदम है, जिसका लक्ष्य चालू साल में प्रमुख 50 देशों में शामिल होना है। इस तरह के 'खुले मॉडल' से सीमा शुल्क विभाग अपने अधिकारियों, न्यायिक क्षेत्र, बंदरगाहों, ब्रोकरों व सेक्टरों की निगरानी पूरे देश में वास्तविक समय के आधार पर करने में सक्षम होगा और डैश बोर्ड पर प्रदर्शन के आधार पर लाल, अंबर और हरी बत्तियां जलेंगी। हरी बत्ती इस बात का संकेत होगा कि विश्व बैंक की ओर से तय अवधि में कार्गो को मंजूरी मिली है, जबकि लाल का मतलब होगा कि तय समय से बहुत ज्यादा देरी हुई है। यह मॉडल बंदरगाहों के प्रदर्शन की निगरानी के लिे जनवरी में पेश किया गया था, जिसके माध्यम से मई से अधिकारियों की निगरानी को शामिल कर लिया गया है। 
 
कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत की स्थिति सुधरी है और पिछले साल वह 23 स्थान ऊपर उठकर 77 वें पायदान पर रहा है। वहीं सीमा पार कारोबार में 66 स्थान ऊपर उठकर 80 पर पहुंच गया है। इस कदम से सरकार को सुस्त काम कर रहे बंदरगाहों, क्षेत्रों और अधिकारियों को चिह्नित किया जा सकता है और लक्षित नीतियों से प्रदर्शन बेहतर किया जा सकता है। भारत के नीति निर्माताओं के साथ विश्व बैंक की बैठक में यह मॉडल प्रस्तुत किया गया था, जिससे इसके इनपुट को अक्टूबर में पेश की जाने वाली आगामी कारोबार सुगमता रिपोर्ट में शामिल किया जा सके। 
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'खुले मॉडल से सरकार को सीमा शुल्क अधिकारियों, बंदरगाहों, और अधिकारक्षेत्रों मेंं प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे।' उन्होंने कहा कि आंकड़ों के संग्रह के आधार पर कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे कुशलता सुनिश्चित की जा सके और यह तय हो सके कि समुद्री मार्ग से ढुलाई को 48 घंटे और हवाई कार्गो को 24 घंटे के भीतर हरी झंडी मिल जाए। खुले की अवधारणा व्यावहारिक अर्थशास्त्र की है, जिसका मकसद सकारात्मक सुदृढीकरण और अप्रत्यक्ष सुझाव होता है जिससे समूहों व व्यक्तियों के निर्णय लेने के व्यवहार को प्रभावित किया जा सके। 
 
विश्व बैंक के मानकों के मुताबिक समुद्री रास्ते से माल ढुलाई को 48 घंटे और हवाई कार्गो को 24 घंटे के भीतर हरी झंडी मिलनी चाहिए। भारत को कार्गो को मंजूरी देने में औसतन 105 घंटे लगते हैं। समुद्री मार्ग से ढुलाई के मामले में डैशबोर्ड पर हरी बत्ती जलने का मतलब होगाा कि कार्गो को 48 घंटे के भीतर मंजूरी मिली है। इसी तरह से बंदरगाह पर अंबर श्रेणी में 72 घंटे और इससे ज्यादा वक्त लगने पर लाल की श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह से हवाई कॉर्गो के मामले मेंं 24 घंटे तक के लिए हरी, 48 घंटे तक के लिए अंबर और इससे ज्यादा समय लगने पर लाल की श्रेणी में रखा गया है। 
 
एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'हम उन अधिकारियों व अधिकार क्षेत्र को साफ तौर पर चिह्नित कर सकेंगे, जो ज्यादातर लाल की श्रेणी में आए हैं और हम इसकी वजहों को जान सकेंगे। बहरहाल ज्यादा जोखिम वाले कुछ क्षेत्र लाल की श्रेणी में रहेंगे क्यों कि वे सीमा शुल्क अधिकारियोंं की जांच से होकर गुजरेंगे।' केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की इस पहल के बारे में विभाग ने दरअसल विश्व बैंंक से यह भी कहा है कि अन्य देश भी इस मॉडल को अपना सकते हैं।  अधिकारी ने कहा कि यह विश्व में अलग तरह की पहल है। 
Keyword: excise, world bank, india, business,,
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