बिजनेस स्टैंडर्ड - मॉनसून की आस में कृषि जिंस नरम
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मॉनसून की आस में कृषि जिंस नरम

राजेश भयानी / मुंबई June 12, 2019

मॉनसून के सामान्य रहने की उम्मीद से कई और कृषि जिंसों के दामों में नरमी आई है। मई के पूर्वाद्र्ध में लू में आई तेजी और मॉनसून के सामान्य रहने को लेकर आशंका खत्म होने के बाद कृषि जिंसों में नरमी का रुख नजर आया है। पिछले महीने के मध्य में कई जिंसों के दामों में नरमी आनी शुरू हुई थी जिसका विस्तार पिछले एक सप्ताह में कई और जिंसों तक हो गया। ग्वार और अरंडी के बाद मक्का और बाजरे में भी तेज गिरावट देखी गई है। सोयाबीन, गेहूं, मसाले और यहां तक ​​कि कपास की कीमतों में भी गिरावट आई है। केडिया कमोडिटीज के निदेशक अजय केडिया ने कहा कि जून की शुरुआत से अरंडी, सोयाबीन, धनिया, हल्दी, जीरा और कपास जैसी सभी प्रमुख जिंसों की कीमतों में गिरावट आई है। इसके कई कारण हैं जैसे नकदी संकट से जूझ रहे किसानों और यहां तक कि व्यापारियों ने भी अपना स्टॉक बेचा है। मॉनसून के नजरिये से आने वाले दिनों में दबाव और बढ़ेगा।
 
आम चुनावों के समय में भारतीय मौसम विभाग की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई थी लेकिन चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद मौसम विभाग ने अपने दूसरे अग्रिम पूर्वानुमान में कहा कि मॉनसून सामान्य रहेगा। व्यापारी इस पूर्वानुमान से सचेत हो गए। वायदा बाजार के भागीदार मुनाफाखोरी या तरलता निर्माण के लिए ऐसी ही किसी शुरुआत का इंतजार कर रहे थे, जबकि हाजिर बाजार के भागीदार पहले से ही नकदी से जूझ रहे थे। उन्होंने अपने शेयर भी बेच दिए थे जिसके परिणामस्वरूप कीमतें गिरने लगीं। मई के उत्तराद्र्ध में प्रमुख कृषि जिंसों में कीमतें गिरने लगीं तो कुछ व्यापारियों ने अनुमान लगाया की दीर्घावधि में बाजार को नुकसान होगा जिससे उन पर बिक्री का दबाव बना।
 
नई खरीद के लिए भंडारण की जगह तैयार करने की खातिर एफसीआई द्वारा स्टॉक से गेहूं बेचना शुरू करने के बाद गेहूं के दामों में गिरावट आने लगी जो अब भी जारी है। हालांकि इससे कीमतें संतुलित हुई हैं। कम आपूर्ति के कारण मक्के के दाम अधिक थे। आयात में कुछ सशर्त छूट से भी नरमी में मदद मिली।  ऐंजल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेजीडेंट (जिंस और मुद्रा अनुसंधान) अनुज गुप्ता ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि मॉनसून के आगमन और राष्ट्रों के बीच व्यापार युद्ध बढऩे से कृषि जिंसों की कीमत में और गिरावट आ सकती है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव को हल करने का कोई चिह्न नहीं दिखता है जिससे जिंसों की कीमतों पर वैश्विक रूप से दबाव बना रहेगा।'
 
मई 2019 में चने के दाम 4,790 के शीर्ष स्तर से लगभग आठ प्रतिशत कम होकर 4,350 के स्तर पर आ गए हैं। गुप्ता को लगता है कि  मॉनसून की बारिश और सरकारी एजेंसियों द्वारा अपने स्टॉक से खुले बाजार में बिक्री करने के कारण चने में और गिरावट आ सकती है। सरकारी अनुमानों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दलहन का उत्पादन कम रहने की संभावना है। इससे पहले भारतीय मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य रहने के अपना अप्रैल का पूर्वानुमान दोहराया था जिसमें 50 वर्षीय दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 95 प्रतिशत की 89 सेमी बारिश की संभावना जताई गई थी। मौसम विभाग ने प्रशांत महासागर पर अल नीनो की स्थिति की भी भविष्यवाणी की थी। हालांकि मौसम का पूर्वानुमान बताने वाली निजी क्षेत्र की एजेंसी स्काईमेट ने कुछ दिन पहले ही में कहा है कि मॉनसून अपने दीर्घकालिक औसत के 93 प्रतिशत के साथ सामान्य से कम रहेगा।
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon, IMD, jins,,
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