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डीएचएफएल के प्रवर्तक बेचेंगे अपना आधा हिस्सा

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली 06 12, 2019

तीन पीई फर्मों से चल रही है बातचीत

कपिल वाधवान कंपनी का प्रबंध निदेशक पद छोड़ने को तैयार
रणनीतिक साझेदार को करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकते हैं प्रवर्तक

बिजनेस स्टैंडर्ड डीएचएफएल के प्रवर्तक बेचेंगे अपना आधा हिस्सादीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉर्पोरेशन (डीएचएफएल) के प्रवर्तकों ने आवास वित्त कंपनी में अपनी बहुलांश हिस्सेदारी बेचने और रणनीतिक निवेशक के साथ संयुक्त रूप से कंपनी का परिचालन करने की इच्छा जताई है। डीएचएफएल के निदेशक मंडल में प्रवर्तकों को प्रतिनिधित्व करने वाले कपिल वधावन कंपनी के प्रबंध निदेशक का पद छोडऩे की भी इच्छा जताई है और वे केवल चेयरमैन बने रह सकते हैं।  मामले के जानकार सूत्रों ने कहा कि वधावन परिवार अपनी आधी हिस्सेदारी (20 फीसदी) रणनीतिक निवेशक को बेचेंगे। तीन पीई फर्में लोनस्टार, केकेआर और एऑन कैपिटल इस सौदे पर बातचीत कर रही हैं और जांच-परख के बाद इस बारे में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

प्रवर्तकों ने पीई फर्म ओकट्री के साथ बातचीत कर रही है जो कंपनी के थोक ऋण पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा करीब 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक खरीदने पर विचार कर रही है। इस सौदे से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'हमने सभी विकल्प खुले रखे हैं। थोक ऋण पोर्टफोलियो की आंशिक बिक्री की जा सकती है या मुख्य कंपनी में हिस्सेदारी बेची जा सकती है या फिर दोनों हो सकता है। अगले एक महीने में कुछ सौदे पूरा करने की योजना है।' 

सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तक ने कंपनी के निदेशक मंडल पद से हटने की इच्छा जताई है ताकि रणनीतिक निवेशक सहज हो सकें और डीएचएफएल का परिचालन पेशेवर प्रबंधन द्वारा किया जा सके। इससे कारोबारी प्रशासन में भी सुधार आएगा क्योंकि कुछ पीई ने इसे मसले को उठाया था। पीई फंड एआईओएन और ओकट्री ने इस मसले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, वहीं अन्य ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पीई फर्मों के साथ बातचीत में प्रवर्तक डीएचएफएल को निदेशक मंडल द्वारा चलाने पर सहमति जतााई है, जिसमें दोनों साझेदारों को संयुक्त नियंत्रण होगा।

सूत्रों ने कहा कि कंपनी को अगस्त में 1,400 करोड़ रुपये के कर्ज का और भुगतान करना होगा। समझा जाता है कि पीई फर्म बेयरिंग्स शुरुआत में डीएचएफएल के निवेश को इच्छुक थी लेकिन वह केवल खुदरा ऋण पोर्टफोलियो को ही लेना चाहती थी। बेयरिंग्स से इस बारे में पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं आया। डीएचएफएल का खुदरा ऋण पोर्टफोलियो करीब 86,000 करोड़ रुपये का है, वहीं थोक ऋण पोर्टफोलियो करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। 

गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर पर ब्याज भुगतान में चूक करने और भुगतान के लिए सात दिन मोहलत मांगने को लेकर डीएचएफएल सुर्खियों में रही है। इससे डीएचएफएल के चूक करने का खतरा बढ़ सकता है। इन खबरों से कंपनी की ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले म्युचुअल फंडों के शुद्घ परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) में खासी गिरावट आई है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने इसकी प्रतिभूतियों को 'डिफॉल्ट' श्रेणी में डाल दिया है। 160 से ज्यादा म्युचुअल फंडों का कंपनी की ऋण और वाणिज्यिक प्रतिभूतियों में निवेश है जिसे क्रिसिल और इक्रा ने डी रेटिंग दी है। हालांकि कंपनी डिबेंचरधारकों को 961 करोड़ रुपये का ब्याज अदा कर दिया है।

कंपनी ने बयान में कहा कि सितंबर 2018 से उसने बिना कोई नया कर्ज लिए 36,000 करोड़ रुपये की देनदारियों का भुगतान किया है। डीएचएफएल और उसके प्रवर्तक कुछ समय से संपत्तियां बेचकर धन जुटा रहे हैं। प्रवर्तकों के साथ ही डीएचएफएल ने शिक्षा ऋण कंपनी अवेंस फाइनैंशियल में अपनी पूरी हिस्सेदारी वारबर्ग पिनकस को 1,200 करोड़ रुपये में बेचने की सहमति हासिल की है। कंपनी ने आधार हाउसिंग फाइनैंस में अपनी हिस्सेदारी ब्लैकस्टोन को 800 करोड़ रुपये में बेची है।

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