बिजनेस स्टैंडर्ड - दो खंडों में आएगी आर्थिक समीक्षा
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दो खंडों में आएगी आर्थिक समीक्षा

नितिन सेठी और सोमेश झा / नई दिल्ली June 11, 2019

जब अरविंद सुब्रमण्यन मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) थे तो इसके पहले की 4 आर्थिक समीक्षाएं दो खंडों में आई थीं। इस बार भी यही होने जा रहा है। वित्त मंत्रालय के कई सूत्रों ने कहा कि मौजूदा सीईए कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन भी पहले खंड के लेखन के प्रमुख हैं, जिसमें विचार केंद्रित और भविष्य की रणनीतियों की बातें होंगी। उन्होंने कहा कि सुब्रमण्यन ने आर्तिक समीक्षा पर जनवरी और उसके बाद से काम शुरू किया था। एक अधिकारी ने कहा, 'उन्होंने यह काम पहले शुरू कर दिया था और जनवरी से कई दौर की बैठकें मंत्रालय के अधिकारियों व अन्य लोगों के साथ की, जिसमें प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। यह पहले खंड में शामिल किया गया है।'
 
समीक्षा के दूसरे हिस्से में परंपराओं के मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति दिखाई गई है और विस्तृत सांख्यिकीय आंकड़े दिए गए हैं।  अधिकारियों ने कहा कि समीक्षा के पहले खंड में कुछ प्रमुख थीम हो सकते हैं, जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के  दूसरे कार्यकाल की प्राथमिकताओं के ज्यादा निकट होंगे। ध्यान वाले प्रमुख क्षेत्रों में क्लीन इंजिया शामिल किए जाने की उम्मीद है,  जिसमें 2024 तक सबसे लिे पेयजल की आपूर्ति की सरकार की प्रतिबद्धता और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा दिया जाना शामिल हो सकता है। 
 
अन्य प्रमुख क्षेत्रों में तकनीक के इस्तेमाल से बेहतर प्रशाशन और नागरिकों को लाभ पहुंचाना शामिल हो सकता है।  सूत्रों ने कहा कि पहले खंड में के्र डिट रेटिंग एजेंसियों (सीआरए) के लिए नियामकीय ढांचे पर केंद्रित अध्याय हो सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का नियमन संयुक्त रूप से भारतीय प्रतिभूति एवं  विनिमय बोर्ड (सेबी) और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है। इन एजेंसियों की भूमिका विभिन्न निकायों की जांच के घेरे में आई है, जिनमें कुछ जांच एजेंसियां शामिल हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) और अन्य इकाइयों की रेटिंग और इनके द्वारा बॉन्ड की बिक्री व चूक करने को लेकर एजेंसियों की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आई है। सीआरए ने इन बॉन्डों को उच्च निवेश श्रेणी से घटाकर चूक या जंक स्टेट्स में डाल दिया था। 
 
कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन शिकागो बूथ से पीएचडी और आईआईटी-आईआईएम के छात्र रहे हैं। वह बैंकिंग कॉर्पोरेट गवर्नेंस और श्रम नीतियों पर भी ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जो उनके शोध का प्रमुख क्षेत्र है। वह उधारी लेने वालों के व्यवहार और भुगतान को लेकर ुनकी इच्छा की निगरानी के लिए लिवरेज टेक्नोलॉजी की जरूरत पर भी जोर दे सकते हैं।  एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, 'मुझे लगता है कि समीक्षा का तरीका अब करीब तय हो चुका है। पहले भाग में ऐसे विचार रखे जाते हैं, जिन्हें लागू करने पर सरकार विचार कर सकती है। पहले हिस्से में यह दिखाया जाता है कि वित्त मंत्रालय मौजूदा स्थिति का किस तरह से आकलन कर सकता है।'  सुब्रमण्यन वित्त मंत्रालय के कदमोंं को जारी रखने को समीक्षा में डाल सकते हैं। उनके पूर्ववर्ती अरविंद सुब्रमण्यन ने 2014-15 में दो खंडों में समीक्षा पेश करने की शुरुआत की थी। 
Keyword: economy survey, arvind,,
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