बिजनेस स्टैंडर्ड - डिजिटल टैक्स पर सहमति
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 19, 2019 12:41 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

डिजिटल टैक्स पर सहमति

संपादकीय /  June 10, 2019

फुकोउका में आयोजित जी-20 शिखर बैठक में डिजिटल बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर कर लगाने को लेकर बनी आम सहमति से यह आशा बंधी है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के कामकाज में आमूलचूल बदलाव आएगा। इसकी बारीकियां विशद अध्ययन से सामने आएंगी लेकिन सैद्धांतिक तौर पर इस समझौते को एक सामान्य कराधान व्यवस्था के रूप में समझा जा सकता है जो तमाम जगहों पर स्वीकार्य है। इतना ही नहीं अमेरिका, जहां दुनिया की तमाम प्रमुख डिजिटल कंपनियां हैं, इस नए प्रस्ताव के खिलाफ है। जबकि ब्रिटेन और फ्रांस समेत तमाम देश इसके समर्थक हैं। उस लिहाज से देखें तो साझा डिजिटल कर संहिता लागू करने के लिए 2020 की प्रस्तावित समय सीमा हकीकत से दूर हो सकती है। बहरहाल, आगे देखें तो यह सहमति इस बात की द्योतक हो सकती है कि बड़े बहुराष्ट्रीय ऑनलाइन कारोबारों में कर व्यापकता में इजाफा हो। इससे ऐसी कंपनियों को आकर्षित करने में कर बचाने के लिए अनुकूल छोटे देशों की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी सीमित होगी।

 
वैश्विक डिजिटल कंपनियां मसलन गूगल, फेसबुक, एमेजॉन, ऐपल और तमाम अन्य को आलोचना का सामना करना पड़ रहा था क्योंकि वे कम कर दर वाले देशों में मुनाफा दिखाकर अपना कर घटाती थीं। भले ही अंतिम उपभोक्ता किसी भी देश में हो। ऐसा व्यवहार उचित नहीं है। ये कंपनियां एक प्रकार से कर वंचना का सहारा ले रही थीं। वे अपने क्षेत्रीय मुख्यालय को आयरलैंड, बोत्सवाना और लक्जमबर्ग जैसे देशों में स्थानांतरित करतीं जहां कर दरें कम हैं। परिणामस्वरूप अन्य देशों में कारोबार से राजस्व के मोर्चे पर अर्जित लाभ पर कम दर पर कर लगता। जी-20 का प्रस्ताव ऐसे मुनाफे पर एक साझा न्यूनतम कर लागू कर सकता है। या फिर यह ऐसी अंतरराष्ट्रीय सहमति बना सकता है कि ऐसे मुनाफे पर उन स्थानों पर कर लगेगा जहां वास्तविक राजस्व प्राप्ति हुई है। भले ही कंपनी वहां मौजूद हो या नहीं। एक और विकल्प यह है कि समझौते के तहत एक देश में पंजीकृत मुनाफे को उन देशों में पुनर्आवंटित किया जाए जहां मुनाफा हुआ हो।
 
इस सहमति को व्यावहारिक बनाने में कुछ बाधाएं भी हैं। पहली बात तो यह कि डिजिटल कंपनी की कोई स्वीकार्य परिभाषा नहीं है। कई मामलों में कंपनियों के पास अलग-अलग क्षेत्रों के विविध राजस्व माध्यम हैं। उदाहरण के लिए हो सकता है कंपनी भौतिक वस्तुओं की बिक्री कर रही हो जो आयातित भी हो सकती हैं। ऐसी कंपनी क्लाउड होस्टिंग सेवा भी दे सकती है और कई देशों में सर्वर भी चला सकती है। संभव है वह विज्ञापन राजस्व एक देश से जुटाए जबकि कार्यक्रम प्रसारण दूसरे देश में करे। वह विभिन्न देशों की सीमाओं से परे फिनटेक सेवाएं भी चला सकती है। ये बातें डिजिटल की परिभाषा को जटिल बनाती हैं। तमाम सीमाओं से परे कर के उचित आकलन के लिए और कंपनियों की करवंचना या अधिकारियों के दोहरे कराधान से बचने के लिए राष्ट्रीय कर अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय सहयोग की आवश्यकता होगी। भारत, चीन और रूस समेत तमाम देशों की यह मांग भी इसे जटिल बनाती है कि उनके यहां संग्रहीत डेटा उनकी सीमा के भीतर ही रहे। यह मुद्दा बातचीत में गतिरोध ला सकता है।
 
जमीनी बाधाओं के बावजूद, जी-20 का यह प्रस्ताव डिजिटल कारोबार के भविष्य को लेकर दुनिया के रुख में अहम बदलाव को प्रस्तुत करता है। इसका असर आगे चलकर कर संहिताओं में बदलाव के रूप में भी दिखना चाहिए। यह भारत और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े बाजारों के अनुकूल होगा बजाय कि बोत्सवाना जैसे छोटे टैक्स हैवन देशों के। यह बेहतर विकल्प नजर आता है: जिस देश में राजस्व अर्जित हो, अर्जित मुनाफे पर कर में उसकी भूमिका होनी ही चाहिए।
Keyword: G20, piyush goel, e commerce, digital tax,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जेट एयरवेज को एनसीएलटी में मिल जाएंगे खरीदार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.