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डीएचएफएल संकट : निवेशकों का भरोसा बनाए रखना एनबीएफसी के लिए मुश्किल

हंसिनी कार्तिक / मुंबई June 10, 2019

आईएलऐंडएफएस संकट के कारण सितंबर से निवेशकों को जिस तरह के संक्रमण की आशंका थी, वह संभावित तौर पर अनुमान के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैल रहा है। नकदी संकट की पहली शिकार दीवान हाउसिंग फाइनैंस हुई, जब वह ब्याज का भुगतान नहीं कर पाई और उसकी क्रेडिट रेटिंग घटाकर डिफॉल्ट कर दी गई। डीएचएफएल में बैंकों व म्युचुअल फंड उद्योग के एक लाख करोड़ रुपये के निवेश को देखते हुए कई का मानना है कि इस क्षेत्र को चोट पहुंचाने के लिए एक और संकट प्रतीक्षा कर रहा है। निवेशकों के लिए बड़ा सवाल यह है कि अगले कुछ वर्षों में राह कैसी होगी।
 
यह सवाल उनके लिए प्रासंगिक है जिन्होंने एनबीएफसी शेयरों का दामन पिछले साल की शुरुआत मेंं थामा था जब एनबीएफसी शेयर ज्यादातर फंड मैनेजरों व शेयर बाजार के विश्लेषकों के लिए तरजीही दांव थे। आंकड़े बताते हैं कि करीब तीन चौथाई शेयर साल 2018 की शुरुआत के स्तर से नीचे कारोबार कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में ये शेयर मालामाल करने वाले शेयरों का तमगा हटाने वाले और पोर्टफोलियो को चोट पहुंचाने वाले बन गए। इसका मतलब यह भी होता है कि उम्दा रिटर्न के दिन काफी पीछे रह गए। वास्तव में क्षेत्र के लिए हो रहे मौजूदा नियामकीय बदलाव को देखते हुए निवेशकों को भरोसा दोबारा हासिल करने में इस क्षेत्र को एक या दो साल लग जाएंगे।
 
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने कहा, काफी ज्यादा तरल संपत्तियों के जरिए नकदी बनाए रखने की अनिवार्यता और सख्त परिसंपत्ति-देनदारी प्रबंधन के चलन से एनबीएफसी को अभी बैंकों के मुकाबले मिलने वाला परिचलनात्मक फायदा खत्म हो सकता है। हम कह सकते हैं कि अच्छे परिचालन वाला एनबीएफसी प्रस्तावित बदलाव से बहुत अलग नहीं है और ऐसे दिशानिर्देश से एनबीएफसी को हर समय परिसंपत्ति-देनदारी प्रबंधन व नकदी का अनुशासन बनाए रखना होगा। रिपोर्ट में कहा गया है, नरम दिशानिर्देश से एनबीएफसी ब्याज दरों में बढ़त के दौर में ब्याज दर व नकदी पर आक्रामक फैसला ले सकती है।
 
विश्लेषकों ने कहा, इन बदलावों के साथ लागत का अतिरिक्त बोझ करीब 50-80 आधार अंक होगा। यह लागत नकदी संकट के बाद ज्यादातर एनबीएफसी की तरफ से उठाए जाने वाले 30 से 70 आधार अंकों की लागत बढ़ोतरी के अतिरिक्त होगी। आईडीएफसी सिक्योरिटीज ने कहा, फंडों की लागत की स्थिति थोड़ी नरम हो रही है, लेकिन दो साल से ज्यादा लंबी अवधि की रकम आसानी से उपलब्ध नहीं है। दबाव वाली एनबीएफसी या हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों की तरफ से डिफॉल्ट के चलते एक बार फिर फंडों की सीमांत लागत व नकदी की समस्या में बढ़ोतरी होगी।
 
थोक व बिल्डरों को कर्ज देने वाली और परिसंपत्ति के बदले कर्ज देने वाली एनबीएफसी के लिए बढ़ी लागत काफी कष्टदायक हो सकती है। मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों ने चेताया कि थोक उधारी देने वाली एनबीएफसी प्रभावित हो सकती है। एलऐंडटी फाइनैंंस होल्डिंग, पीएनबी हाउसिंग, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस इस साल अब तक 12 से 18 फीसदी फिसल चुकी हैं। प्रतिकूल लागत ढांचा भी लेनदारों को कर्ज आवंटन व वितरण के मामले में सही कदम उठाने के लिए बाध्य कर रहा है, जो मार्च तिमाही में बजाज फाइनैंंस को छोड़कर हर कंपनी के मामले में स्पष्ट था। अगर लंबे समय तक सतर्कता भरा रुख जारी रहा तो यह एनबीएफसी के लिए बढ़त की राह अगले दो-तीन वर्षों में दोबारा तैयार कर सकती है। भारी भरकम लाभ वाले एनबीएफसी शेयरों की वजह क्षेत्र के मुकाबले उनमें तेज गति से आगे बढऩे की क्षमता बताई जाती है। मैक्वेरी कैपिटल के सुरेश गणपति ने कहा, फंडों की लागत बढऩे से एनबीएफसी कम मार्जिन वाले क्षेत्र मसलन शेयर के बदले कर्ज व होम लोन में धीमी रफ्तार से आगे जा सकते हैं, ताकि स्प्रेड बनाए रखा जा सके।
 
इस बीच, परिसंपत्ति गुणवत्ता अभी तक मसला नहीं बना है। हालांकि लंबे समय तक बढ़त में सुस्ती से यह बदल सकता है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि यह चीज वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में असर दिखाएगी। इस क्षेत्र की अनिश्चितता को देखते हुए नोमूरा, सीएलएसए, क्रेडिट सुइस और मॉर्गन स्टैनली जैसी ब्रोकिंग फर्में एनबीएफसी के मुकाबले बैंकों को तरजीह दे रही हैं। नोमूरा के विश्लेषकों ने कहा, एनबीएफसी व एचएफसी को लेकर हम सतर्क हैं क्योंकि हमें लगता है कि निर्माण क्षेत्र के वित्त पोषण में दबाव बढ़ेगा और इसका असर एचएफसी व एनबीएफसी के थोक कर्ज पर पड़ेगा। हम सापेक्षिक आधार पर ग्रामीण क्षेत्र में वाहनों के लिए कर्ज में वैल्यू दिख रही है, लेकिन हम कॉरपोरेट बैंकों को तरजीह देना जारी रखे हुए हैं। 
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