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बड़ी फर्मों के लिए ई-बिल स्वैच्छिक!

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली June 10, 2019

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की 20 जून को होने वाली बैठक में बड़ी कंपनियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस (ई-बिल) प्रणाली को स्वैच्छिक तौर पर लागू करने पर विचार किया जा सकता है। ई-बिल से वास्तविक समय पर लेनदेन पर नजर रखने में मदद मिलेगी। जीएसटी नेटवर्क पोर्टल के माध्यम से ई-बिल जेनरेट' करने पर बनी उच्च स्तरीय समिति द्वारा सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रणाली को शुरुआत में 500 करोड़ रुपये सालाना कारोबार वाली फर्मों के लिए लागू किया जाएगा। शुरुआत में कंपनियों को इस व्यवस्था को अपनाने का विकल्प दिया जाएगा।
 
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'नई व्यवस्था से व्यवधान आ सकती है लेकिन हम पूरी प्रणाली में इस तरह का व्यवधान नहीं चाहते हैं। इसलिए शुरू में इसे केवल बड़ी फर्मों तक सीमित रखा जाएगा। छोटी कंपनियां बड़ी तकनीकी बदलावों के लिए फिलवक्त तैयार नहीं होंगी जिससे समस्या हो सकती है। ऐसे में उन्हें इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा।' सरकार ने दक्षिण कोरिया, लैटिन अमेरिका और अन्य देशों में लागू ई-टैक्स इनवॉयस का अध्ययन और मूल्यांकन करने के लिए एक अधिकारियों की एक समिति गठित की है। समिति लक्षित करदाता और कारोबारी की सीमा पर सुझाव देने तथा रिटर्न दाखिल करने में सुगमता का मूल्यांकन करने का काम सौंपा गया था।
 
प्रस्तावित प्रणाली के तहत कंपनियों की प्रणाली को जीएसटीएन पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जहां से जेनरेट इनवॉयस 24 घंटे के अंदर जीएसटीएन पोर्टल से पास होगा। अधिकारी ने कहा, 'दिन में कम कारोबार की अवधि के दौरान ऐसे इन्वॉयस जीएसटीएन पोर्टल को बढ़ाए जाएंगे ताकि इससे सर्वाधिक कारोबार के घंटों में कोई दिक्कतें पेश नहीं आए।' इससे कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा, क्योंकि इस इन्वाइसिंग प्रणाली के आने से मासिक आधार पर अलग से रिटर्न दाखिल करने का झंझट खत्म हो जाएगा। जीएसटीआर 1, विक्रेता रिटर्न और जीएसटीआर 2, बायर रिटर्न फॉर्म स्वत: ही लोकप्रिय हो जाएंगे।  अधिकारी ने कहा, 'इसके साथ ही उन कंपनियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वे बिल की जरूरत भी समाप्त हो जाएंगी, जो यह प्रणाली अपनाएंगी।' उद्योग से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर अधिकारियों का कहना है कि खासकर वस्तु क्षेत्र इस प्रस्ताव को लेकर सहज है जबकि सेवा क्षेत्र इसके लिए तैयार नहीं दिख रहा है। हालांकि जानकारों के अनुसार इसके क्रियान्वयन से कुछ दिक्कतें आ सकती है। एक जानकारी ने कहा, 'इससे ऑर्डर अस्वीकार होने का जोखिम पैदा हो सकता है। अगर ग्राहक केवल कुछ हिस्सा लेकर खराब गुणवत्ता का हवाला देते हुए शेष हिस्सा  लेने से इनकार कर दे तो उस स्थिति में क्या होगा।' अन्स्र्ट ऐंड यंग में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा, 'ई-वे बिल प्रणाली समाप्त किए जाने संबंधी चर्चा के बीच वस्तु उद्योग में कई कंपनियां इस नई प्रणाली अपनाने पर विचार कर सकते हैं।'
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