बिजनेस स्टैंडर्ड - राजकोषीय अनुशासन पर जोर
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राजकोषीय अनुशासन पर जोर

पूर्ण बजट में 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में बदलाव की संभावना नहीं
अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 06 09, 2019

पीएमओ राजकोषीय लक्ष्य में बदलाव के खिलाफ

अधिकारियों को वित्त वर्ष 2020 में कर राजस्व संग्रह कम रहने का अंदेशा
सरकार को आरबीआई से अतिरिक्त प्राप्तियों की है उम्मीद
विनिवेश और रणनीतिक बिक्री को लेकर सकारात्मक नजरिया
पीएम-किसान जैसी योजनाओं से बढ़ेगा अतिरिक्त व्यय
चुनाव घोषणा पत्र के कुछ वादे भी हो सकते हैं बजट में शामिल
सब्सिडी बकाया आगे बढ़ा सकती है सरकार, ज्यादा उधारी भी संभव

बिजनेस स्टैंडर्ड राजकोषीय अनुशासन पर जोरवित्त मंत्री निर्मला सीतामरण 5 जुलाई को जब लोकसभा में अपना पहला बजट पेश करेंगी तब इसकी पूरी संभावना है कि वह 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.4 फीसदी पर रखने का अनुमान बरकरार रखेंगी। 1 फरवरी को पेश 2019-20 के अंतरिम बजट में भी इस लक्ष्य को बरकरार रखा गया था। कर राजस्व सरकार के अनुमान से कम रहने और संभावित व्यय ज्यादा होने की संभावना के बावजूद नॉर्थ ब्लॉक राजकोषीय घाटे को यथावत रखने की संभावना तलाश रहे हैं। 

वित्त मंत्रालय के अधिकारी इस बात से वाकिफ हैं कि 3.4 फीसदी के कठिन लक्ष्य को हासिल करना चुनौतियों से भरा होगा। उन्हें 15वें वित्त आयोग की आसन्न सिफारिशों का भी भान है, जिसमें कर प्राप्तियों को केंद्र और राज्यों के बीच बांटने का खाका आ सकता है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि वित्त वर्ष 2020 के लिए राजकोषीय घाटे का कठिन लक्ष्य में बदलाव की संभावना काफी कम है। मामले के जानकार एक शख्स ने बताया, 'केंद्र वित्त आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करेगा और देखेगा कि केंद्र के संसाधनों से कितना निकाला जा सकता है।'

अंतरिम बजट के इस लक्ष्य से पीछे नहीं हटने की एक वजह यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस कठिन लक्ष्य को बनाए रखना चाहते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'प्रधानमंत्री राजकोषीय अनुशासन को बनाए रखने में यकीन करते हैं। वस्तु एवं सेवा कर लागू करने के साल में भी इसमें किसी तरह की चूक नहीं हुई।' उक्त अधिकारी ने कहा कि राजकोषीय घाटे का लख्य अब आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक महत्व का निर्णय हो गया है।

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को अपनी पूर्ववर्ती सरकार से राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.1 फीसदी विरासत में मिला था। मोदी सरकार ने 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटे के साथ अपनी पहली पारी पूरी की थी और दूसरी पारी में भी सरकार इस लक्ष्य को बनाए रखने पर जोर देगी।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने कई अधिकारियों से बात की, जिन्होंने कहा कि अर्थिक नरमी से वित्त वर्ष 2020 में कर राजस्व पर असर पड़ सकता है। अंतरिम बजट में निगमित कर संग्रह वित्त वर्ष 2018-19 के वास्तविक संग्रह से 15 फीसदी ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया है, वहीं व्यक्तिगत आयकर में 34 फीसदी वृद्घि का अनुमान है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अर्थव्यवस्था में नरमी को देखते हुए कर संग्रह के लक्ष्य को कम करने की अपील की है। वस्तु एवं सेवा कर संग्रह 2019-20 में 31 फीसदी बढऩे का अनुमान है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सीबीडीटी के कर संग्रह लक्ष्य को घटाने का अनुरोध स्वीकार किया जाएगा या नहीं लेकिन कुल राजस्व संग्रह में कमी करने की संभावना नहीं है। इसके लिए सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से कुछ प्राप्तियां होने की उम्मीद कर रही है, वहीं विनिवेश का लक्ष्य 90,000 करोड़ रुपये से भी अधिक होने की उम्मीद की जा रही है। जहां तक व्यय की बात है तो केंद्र सरकार पहले ही पीएम-किसान योजना का विस्तारसभी किसानों तक कर दिया है। इससे खजाने पर करीब 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। किसानों और व्यापारियों की पेंशन योजना पर भी अतिरिक्त व्यय करना होगा। इसके अलावा अधिकारियों को उम्मीद है कि बजट में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र के कुछ वादों को शामिल किया जा सकता है। एक अधिकारी ने कहा, 'कुल बजट का आकार थोड़ा बढ़ सकता है। हालांकि लक्ष्य नई योजनाओं के लिए पैसे का बंदोबस्त करने पर होगा, और इसके लिए व्यय प्रतिबद्घताओं में कुछ बदलाव किया जा सकता है।'
Keyword: nirmala sitaraman, economy, budget,,
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