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विफल पट्टों की नीलामी हो: निर्माता

जयजित दास / भुवनेश्वर June 09, 2019

स्पंज आयरन निर्माताओं ने ओडिशा में उन पट्टों की नीलामी की मांग की है जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार अनिवार्य मुआवजा भुगतान न करने के कारण परिचालन से बाहर हो चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज द्वारा दायर एक मुकदमे में अपने फैसले में ओडिशा सरकार को निर्देश दिया था कि 2000-01 और 2010-11 के बीच अतिरिक्त खनन की वजह से खननकर्ताओं से मुआवजा लिया जाए। नुकसानदायक लोभपूर्ण खनन के अभियोग में शीर्ष अदालत ने माना कि खनिकों को 100 प्रतिशत मुआवजा देना चाहिए। न्यायालय के इस आदेश का अर्थ यह है कि खनिकों को 17,576 करोड़ रुपये का भुगतान करना है जो न्यायालय द्वारा नियुक्त केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी) द्वारा जताई गई मुआवजा राशि है। सीईसी की रिपोर्ट से पता चलता है कि खनिकों ने स्वीकृत सीमा से परे 21.55 करोड़ टन लोहे और मैंगनीज अयस्क का खनन किया है। न्यायालय ने खनिकों द्वारा 31 दिसंबर, 2017 को या इससे पहले मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया था।

 
लेकिन अदालती आदेश के लगभग दो साल बाद भी सभी खनिकों ने निर्देश का पालन नहीं किया। राज्य सरकार संबंधित खनिकों से लगभग 13,000 करोड़ रुपये निकलवाने में सफल रही है। मुआवजे का भुगतान करने में नाकाम रहने वाले खनिकों के पट्टे अधिकारियों द्वारा खत्म कर दिए गए। हालांकि स्पंज आयरन के भागीदारों ने कहा है कि अभी तक गलत काम करने वाले पट्टेदार तय नहीं किए गए हैं बल्कि संशोधित खदान एवं खनिज विकास और विनियमन (एमएमडीआर) अधिनियम-2015 की धारा-4 के तहत कार्रवाई की गई है।
 
छत्तीसगढ़ स्पंज आयरन निर्माता संघ (सीएसआईएमए) के अध्यक्ष विजय झंवर ने केंद्रीय खान सचिव को लिखा है कि दुर्भाग्य से इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यदि इन पट्टों की नीलामी की जाती है तो इससे उद्योग के साथ-साथ सरकार को भी देश में खनिज उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा सीएसआईएमए ने अलग से भी 31 मार्च, 2020 तक ओडिशा में व्यापारी खनन पट्टों के संबंध में चिंता जताई है। पत्र में कहा गया है, 'हमारे अनुमानों के अनुसार हमें उम्मीद है कि सभी कार्यशील खदानों की तुरंत नीलामी की जाती है तो सरकार कम से कम 10,000 करोड़ रुपये की पेशगी भुगतान के साथ-साथ 60 प्रतिशत औसत प्रीमियम की कमाई करेगी। इससे सरकार को रॉयल्टी और डीएमएफ (जिला खनिज फाउंडेशन) के अलावा 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी। यदि नीलामी नियमों में कुछ छोटे बदलाव किए जाएं तो इससे पट्टों में सुचारु रूप से परिवर्तन करने में मदद मिलेगी और घरेलू इस्पात उद्योग भी प्रतिस्पर्धी होगा। हमें उम्मीद है कि सरकार नीलामी प्रक्रिया तुरंत शुरू करेगी और छोटे उत्पादकों को समूहों में बोली लगाने की अनुमति देगी।' 
 
केंद्रीय खदान मंत्रालय की समिति द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2020 तक देश भर में 334 गैर-निजी उपभोग वाली खदानें बंद होने की संभावना है। इसमें से केवल 49 खदानें ही परिचालन में हैं जिनमें से 33 लौह अयस्क खदानें ओडिशा में हैं जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 5.5 करोड़ टन है। जब ओडिशा में नए लौह अयस्क खंडों को ऑनलाइन नीलामी के लिए लाया गया था तो उन्होंने 100 फीसदी तक प्रीमियम प्राप्त किया था।
Keyword: iron ore, export, import, steel,,
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