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रिजर्व बैंक के फॉरेक्स के खुदरा प्लेटफॉर्म से घटेगा बैंकों का मुनाफा

अनूप रॉय और अनीश फडणीस / मुंबई June 09, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा खुदरा ग्राहकों के लिए विदेशी विनिमय कारोबार प्लेटफॉर्म पेश करने से बैंकों की शुल्क से होने वाली आमदनी पर बहुत ज्यादा असर होगा। इससे विदेशी मुद्रा चेंजर्स का परिचालन दीर्घावधि के हिसाब से प्रïभावित हो सकता है क्योंकि यह सुविधा ग्राहकों को सीधे मिलने लगेगी। हालांकि ग्राहकों को बैंकों पर जाना जारी रहेगा, क्योंकि प्लेटफॉर्म से विनिमय करने के लिए केवाईसी की मंजूरी जरूरी होगा और यह तमाम लोगों के लिए बहुत श्रमसाध्य होगा। खासकर ऐसे ग्राहकों के लिए एक्सचेंज पर मुश्किल होगी, जिन्हें कम मुद्रा की जरूरत है।
 
एक वरिष्ठ बैंकर ने कहा, 'हर कोई बैंंक पर मुद्रा की जरूरतों के लिए नहीं आता। फॉरेक्स चेंजर्स का काम जारी रहेगा क्योंकि उनका परिचालन सरल है और सिर्फ नोट बदले जाते हैं।'  बैंकरों का कहना है कि ट्रैवल कंपनियों, जो करेंसी सर्विस के कारोबार में हैं, पर असर पड़ सकता है। लेकिन कॉक्स ऐंड किंग्स ने दावा किया कि इसका कंपनी के मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। थॉमस कुक ने इस सिलसिले में भेजे गए ई मेल का कोई जवाब नहीं दिया। कॉक्स ऐं किंग्स फाइनैंशियल सर्विस लिमिटेड के फॉरेन एक्सचेंज के सीईओ और कार्यकारी निदेशक रवि मेनन ने कहा, 'रिजर्व बैंक के कदम से निश्चित रूप से फॉरेन एक्सचेंज की ऑनलाइन सेवा लेने वालों को फायदा मिलेगा। हमारे मुनाफे पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि हम पहले से ही बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर काम कर रहे हैं और हमारी प्राथमिकता बाधा रहित विदेशी मुद्रा अदला बदली सेवा में रही है और ग्राहक के दरवाजे पर हम यह सुविधा मुहैया कराते हैं। यह जारी रहेगा और कॉर्पोरेट्स और एसएमई का बड़ा हिस्सा हमारी सेवाएं लेता रहेगा क्योंकि हमारी सेवाएं और बेहतर होंगी।' 
 
बैंकों की कुल आमदनी में फॉरेक्स से होने वाली आमदनी का हिस्सा 15 से 20 प्रतिशत तक हो सकता है, खासकर निजी बैंकों के मामले में। एक बैंकर ने कहा कि इस आमदनी पर असर पडऩे जा रहा है।  रिजर्व बैंक ने अक्टूबर 2017 पर इस तरह के प्लेटफॉर्म को लेकर परिचर्चा पत्र जारी किया था, जहां फॉरेन एक्सचेंज की खरीद और बिक्री की सकेगी और यह इंटरनेट आधारित ऐप्लिकेशन से होगा, जिस पर बाजार भाव से विदेशी मुद्रा की खरीद और बिक्री की जा सकेगी।  गुरुवार की मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक ने कहा कि विदेशी विनिमय करेंसी प्लेटफॉर्म से विदेशी विनियम का इस्तेमाल करने वालों (जैसे छोटे व मझोले उद्यो, निर्यातक व आयातक, व्यक्तिगत आदि) के लिए साफ और पारदर्शी मू्ल्य नीति सुनिश्चित हो सकेगा। रिजर्व बैंक ने कहा है, 'मौजूदा बंटे हुए बाजार के सूक्ष्म ढांचे के एकीकरण से यह प्लेटफॉर्म कीमतों को लेकर पारदर्शिता मुहैया कराएगा और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी व आकार से इतर सभी ग्राहकों को बेहतरीन भाव मिल सकेगा।' 
 
इस तरह का प्लेटफॉर्म अगस्त से उपलब्ध होगा।  रिजर्व बैंंक का विदेशी विनिमय कारोबार प्लेटफॉर्म एक स्थान पर सभी बैंकों की ग्राहक दरें दिखाएगा। ग्राहक अपनी विदेशी मुद्रा की जरूरतों के मुताबिक सबसे बेहतर दरें चुन सकेगा। ग्राहक का बैंक उसके खाते से धन काट लेगा और फॉरेक्स सुविधा देने वाले बैंक के साथ इसका निपटान करेगा। पूरी प्रक्रिया को क्लियरिंग कॉर्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड देखेगा, जो इस प्लेटफॉर्म का डेवलपर है।  सबसे अहम है कि यह प्लेटफॉर्म सभी बोलियों को एक साथ लाने का काम करेगा और इससे 5,00,000 डॉलर के कारोबार का सृजन हो सकता है। ऐसी स्थिति में ग्राहकों के लिए दरें बहुत बेहतर हो जाएंगी और यह बाजार दर पर होगा। बाजार दर सामान्यतया बैंक के कॉर्ड की दर से 1-2 प्रतिशत कम होता है। इस मामले में बैंक ग्राहकोंं से सुविधा शुल्क के रूप में कुछ शुल्क लेंगे। 
 
मसौदा दिशानिर्देशों में रिजर्व बैंक ने कहा है कि इसमें न्यूनतम राशि तय हो सकती है, जो 1,000 डॉलर या 500 डॉलर का गुणक हो सकता है। लेकिन सूत्रों ने कहा कि अगस्त में प्लेटफॉर्म के ऑनलाइन होने पर इसमें बदलाव हो सकता है। इसके पीछे विचार यह है कि खुदरा ग्राहकों को उनकी जरूरत के मुताबिक सटीक राशि मिल सके।  इस समय केवल डॉलर के लिए सुविधा दी गई है, लेकिन बाद में और ज्यादा मुद्राएं पेश की जा सकती हैं। यह प्लेटफॉर्म सीसीआईएल के एफएक्स-क्लियर का विस्तार होगा, जिसका इस्तेमाल बड़ी मात्रा में इंटरबैंक ट्रेडिंग में होता है। 
Keyword: bank, RBI, KYC,,
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