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सुस्त वाहन क्षेत्र धीमा करेगा सामान्य बीमा कारोबार की रफ्तार

श्रीपाद ऑटे /  June 09, 2019

वाहन क्षेत्र के विभिन्न खंडों में बिक्री लगातार सातवें महीने कमजोर रही। अधिक वित्तीय लागत, नकदी की कमी और लोगों का उत्साह नरम रहने से मई 2019 में बिक्री भी नरम रही। वाहन क्षेत्र में मांग की हालत खस्ता रहना सामान्य बीमा क्षेत्र के लिए भी नकारात्मक है, क्योंकि यह (बीमा क्षेत्र) कारोबार के लिए वाहन क्षेत्र पर काफी हद निर्भर रहता है। सामान्य बीमा परिषद (जीआईसी)-मोटर खंड- के अनुसार ऑन डैमेज (ओडी) और थर्ड-पार्टी (टीपी) खंडों की वित्त वर्ष 2018-19 में गैर-जीवन बीमा कंपनियों की कुल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय (जीडीपीआई) में 38 प्रतिशत  हिस्सेदारी रही। 

 
रिलायंस जनरल इंश्योरेंस में कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी राकेश जैन कहते हैं, 'वाहन खंड में तेजी से हमेशा जीवन बीमा कंपनियों का कारोबार बढ़ता है। वाहन बिक्री के लिहाज से अच्छे वर्ष में नए कारोबारों से बीमा उद्योग में 15 प्रतिशत तक तेजी आती है।' पूर्व के रुझानों से भी पता चलता है कि वाहन बिक्री और गैर-जीवन बीमा कंपनियों की आय में नजदीकी संबंध है। जीआईसी के अनुसार मोटर खंड से जीडीपीआई में सालाना आधार पर अप्रैल 2019 में 1.4 प्रतिशत मामूली वृद्धि हुई, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 14.2 प्रतिशत रहा है। इससे अग्नि एवं स्वास्थ्य जैसे खंडों में दो अंकों में तेजी रहने के बाद पूरे बीमा क्षेत्र की कुल जीडीपीआई दर 14.5 प्रतिशत पर सिमट कर रह गई। 
 
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2019 में वाहनों की कुल बिक्री में महज 5.2 प्रतिशत तेजी आई, जबकि पिछले वर्ष इसमें 14 प्रतिशत तेजी आई थी। हालांकि दीर्घ अवधि के टीपी कवर के मामले में नियामक के हस्तक्षेप (दोपिहया के लिए 3 साल और यात्री वाहनों के लिए 5 साल) के बाद गैर-जीवन बीमा कंपनियों के राजस्व को अल्पकालिक राहत मिली, लेकिन मोटर-ओडी बुरी तरह प्रभावित होगा। इसकी वजह यह है कि मोटर-ओडी पॉलिसी नए वाहनों के लिए ली जाती है और मोटर-टीपी की तरह यह अनिवार्य नहीं है। अप्रैल 2019 में मोटर-ओडी में जीडीपीआई 5.4 प्रतिशत कम हो गई, जबकि मोटर-टीपी में 7 प्रतिशत तेजी देखी गई। 
 
बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) ने हाल में ही लंबी अवधि के मोटर-टीपी का प्रीमियम अपरिवर्तित रखने का प्रस्ताव दिया था, जबकि एक साल के मोटर बीमा का प्रीमियम 3 से 15 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के अनुसार नए वाहनों की बिक्री कमजोर पडऩे के बीच दीर्घ अवधि की टीपी पॉलिसियों के लिए प्रीमियम नहीं बढ़ाना वाहन कल-पुर्जा विनिर्माताओं के खेमे की ओर से आने वाले दबाव दिए जाने का संकेत है। वित्त वर्ष 2019 में यात्री वाहन और दोपहिया की बिक्री सबसे अधिक प्रभावित हुई और मूल्य के हिसाब से मोटर-टीपी में इनकी हिससेदारी मोटे तौर पर 40 प्रतिशत है। सायम के अनुसानों के अनुसार इन दोनों वाहन खंडों की बिक्री दर क्रमश: 3 से 5 प्रतिशत (कार) और  5 से 7 प्रतिशत (दोपहिया खंड) रहने की उम्मीद है। हालांकि वाहन उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार वित्त वर्ष 2019 के कम आधार के मद्देनजर अनुमानित वृद्धि अभी भी सुस्त लगती है।
 
हालांकि वाहन क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन की आस एक बार फिर दिखने लगी है। एक देसी ब्रोकरेज कंपनी के विश्लेषक ने कहा कि चुनाव खत्म होने, मॉनसून के लगभग सामान्य रहने और भारत स्टेज-6 दिशानिर्देश लागू होने से पहले वाहनों की बुकिंग की उम्मीद बढ़ गई है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि मोटर-ओडी में बढ़ोतरी से बीमा कंपनियों को निकट अवधि में मदद मिल सकती है। सूचीबद्ध गैर-जीवन बीमा कंपनियों में आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस की कुल जीडीपीआई में मोटर-ओडी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत है, दूसरी तरफ न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी की हिस्सेदारी मार्च 2019 तक करीब 16 प्रतिशत रही। इससे थोड़ी राहत जरूर मिलती है, हालांकि मोटर-टीपी की इन कंपनियों की जीडीपीआई में 21 प्रतिशत हिस्सेदारी है। विश्लेषक आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस की वितरण मजबूती और मजबूत ब्रांड को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि ऊंचा मूल्यांकन (वित्त वर्ष 2019 की अनुमानित आय का 39 गुना) शेयर में तेजी सीमित कर सकता है। 
Keyword: vehicle, car, electric, petrol, diesel,,
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