बिजनेस स्टैंडर्ड - लौह अयस्क उत्पादन शीर्ष स्तर पर
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लौह अयस्क उत्पादन शीर्ष स्तर पर

जयजित दास / भुवनेश्वर June 07, 2019

देश का लौह अयस्क उत्पादन वित्त वर्ष 19 में 9.5 प्रतिशत बढ़कर 10 साल के शीर्ष स्तर 22 करोड़ टन तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 18 में यह 20.1 करोड़ टन था। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में भी लौह अयस्क उत्पादन की विकास गति जारी रहेगी। इस सकारात्मक धारणा को उन व्यापारी खनिकों से भी प्रेरणा मिल रही है जो अपने पट्टे की अंतिम तारीख 31 मार्च, 2020 से पहले खदानों के खनन में तेजी लाने पर विचार कर रहे हैं। केयर रेटिंग्स की अनुसंधान विश्लेषक (लौह अयस्क) वहिश्ता एम ऊनवाला ने कहा, 'हमारा मानना है कि इस वित्त वर्ष में उत्पादन (लौह अयस्क का) पांच से आठ प्रतिशत बढऩे की संभावना है। वे व्यापारी खनिक जिनकी पट्टे की वैधता 31 मार्च, 2020 को खत्म हो रही है, वे उत्पादन में तेजी लाने पर विचार करेंगे। जहां तक आयात की बात है तो हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 20 के दौरान इसमें नरमी आएगी। इसके उलट लौह अयस्क पैलेट के निर्यात में इजाफा होना चाहिए।'

 
व्यापारी खनिक उत्पादन अधिकतम करने और पर्यावरण मंजूरी के तहत अनुमोदित सीमा तक उत्पादन ले जाने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। केंद्रीय खान मंत्रालय की एक समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार 334 व्यापारिक या गैर-निजी उपभोग वाले खनन पट्टे 31 मार्च, 2020 तक समाप्त होने वाले हैं। इनमें से केवल 49 खदानें ही परिचालन में हैं और 33 क्रियाशील लौह अयस्क खदानें ओडिशा में हैं। ओडिशा की वार्षिक उत्पादन क्षमता 5.5 करोड़ टन है। वित्त वर्ष 18 में भी व्यापारी खनिक तेज रफ्तार से चलते दिखे थे। ओडिशा में इस घटना पर काफी गौर किया गया था। राज्य ने 11.8 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन किया और इससे भी अधिक 14 करोड़ टन की डिलिवरी की। भारतीय पैलेट निर्माता संघ के एक सूत्र ने कहा कि इस वित्त वर्ष के दौरान लौह अयस्क उत्पादन में आठ प्रतिशत वृद्धि दर्ज होने की संभावना है। हमें उन व्यापारी खनिकों से उत्पादन वृद्धि की उम्मीद है जिनकी खदानें इस वित्त वर्ष के बाद मान्य नहीं रहेंगी। वहीं व्यापारी खनिकों को लीज अवधि समाप्त होने के छह महीने बाद भी अयस्क की डिलिवरी करने की छूट होगी।
 
भारतीय लौह अयस्क निर्माताओं को अनुकूल वैश्विक रुख से भी लाभ होने वाला है। केयर रेटिंग्स के एक अध्ययन से पता चलता है कि वैश्विक लौह अयस्क की कीमतों में बढ़ोतरी से देश के लौह अयस्क की मांग बढ़ेगी। इस रिर्पोट में कहा गया है कि हाल ही में ब्राजील में वेल बांध टूटने के हादसे के कारण लौह अयस्क की आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक स्तर पर 6-7 करोड़ टन की कमी आई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ी कीमतों की वजह से घरेलू रूप से उत्पादित लौह अयस्क की मांग बढऩे की उम्मीद है। इससे साल भर घरेलू कीमतें अधिक रहेंगी।
 
चूंकि भारत के लौह अयस्क पैलेट के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेज हैं इसलिए इससे देश में उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। केयर रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार, विशेष रूप से चीन में मांग बढऩे के कारण पैलेट का घरेलू उत्पादन बढऩे की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय पैलेट निर्माताओं को मिलने वाले लाभ के आधार पर निर्यात की मात्रा अलग-अलग रहेगी। पैलेट के दामों में मजबूती के कारण निचले दर्जे केलौह अयस्क चूरे की मांग भी बढ़ी है। 62 प्र्रतिशत लौह तत्व वाले अयस्क के बेंचमार्क दाम कई सालों के शीर्ष स्तर पर जाने के बाद 100 डॉलर प्रति टन से नीचे आएहैं। बुनियादी किस्म वाले लौह अयस्क (जिसमें लौह तत्व की मात्रा 58 प्रतिशत से कम रहती है) के दाम बढ़कर 85 डॉलर प्रति टन हो गए थे जिससे भारत से अधिक मात्रा में खेप भेजने का प्रोत्साहन मिला। चीन की इस्पात मिलों ने ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया में खदानों की आपूर्ति बाधित होने के बाद भारतीय पैलेट के साथ-साथ निम्न श्रेणी का लौह अयस्क खरीदने में रुचि दिखाई है। पिछले दो वर्षों से नरम रुख रहने के बाद चीन की मजबूत मांग के कारण निर्यात जोर पकड़ता दिख रह है। वित्त वर्ष 18 के दौरान निर्यात में 21 प्रतिशत की गिरावट आई थी। वित्त वर्ष 19 में निर्यात में गिरावट आई थी और यह 33 प्रतिशत गिरकर 1.62 करोड़ टन रहा।
Keyword: iron ore, export, import, steel,,
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