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लिक्विड फंड को रिटर्न का सिददर्द
विशेषज्ञों के अनुसार अगर ब्याज दरों में कटौती हुई तो मुनाफे में आ सकती है और कमी
अंजू यादव / मुंबई March 17, 2009

बाजार में उतार-चढ़ाव के इस दौर में फौरी कर्ज दर (कॉल रेट) में गिरावट आई है और यह लगभग 3.25 फीसदी पर पहुंच गया है। इसी वजह लिक्विड फंड के रिटर्न में भी दिक्कतें आ रही हैं।

लिक्विड फंड लघु अवधि का डेट फंड है जिससे मुद्रा बाजार के उपकरणों मसलन सर्टिफिकेट ऑफ डिपोजिट, कमर्शियल पेपर्स, टे्रजरी बिल्स के जरिए एक रात, 10 दिन या फिर एक महीने के लिए निवेश किया जाता है। लिक्विड फंड पहले करीब 7 फीसदी का रिटर्न देती थी अब यह कम होकर 5 से 5.5 फीसदी तक हो चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरों में आगे अगर कटौती होती है तो लाभ में आगे और भी गिरावट हो सकती है। अगर रिटर्न पर असर पड़ता है तो लघु अवधि के फंड लिए लिक्विड फंड बेहतर विकल्प नहीं हो सकता है।

बजाज कैपिटल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरजीत मिश्रा का कहना है, 'लिक्विड प्लस फंड में मुद्रा का प्रवाह पहले से ही बढ़ गया है जो थोड़ी लंबी अवधि का पोर्टफोलियो होता है। लिक्विड फंड रिटर्न में आगे 2 फीसदी की गिरावट होगी।' बाजार नियामक सेबी ने पहले ही कहा था कि लिक्विड प्लस फंड के नाम को बदलने की जरूरत है क्योंकि निवेशकों को इस नाम से भ्रम होता है कि इसमें ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

डीएसपी ब्लैक रॉक इंवेस्टमेंट मैनेजर्स के प्रमुख(तयशुदा आय) का कहना है, 'पिछले चरण के रिवर्स रेपो दर की कटौती के बाद एक रात के लिए फौरी कर्ज दरों में तेजी से गिरावट आई और यह 3.5 फीसदी पर पहुंच गया है। आगे लघु अवधि के मुद्रा बाजार दरों में गिरावट हो सकती है। जिन फंडों की परिसंपत्ति परिपक्व हो चुकी है उसे फिर से बहुत कम दरों पर निवेश करना होगा।' 

वैसे लघु अवधि के लिए पैसे का निवेश करने वाले व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट निवेशकों को ज्यादा नेटवर्थ देने की वजह से यह फंड बहुत मशहूर हो रहा है। इसमें फिक्स्ड डिपोजिट के मुकाबले बेहतर रिटर्न भी मिल रहा है।

देश के एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड के आंकड़ों की मानें तो फरवरी में लिक्विड फंड को 14,906 करोड़ रुपये मिले। इन्कम फंड की श्रेणी जिसमें लिक्विड प्लस फंड भी शामिल है उसे सबसे ज्यादा 19,933 करोड़ रुपये मिले।

इससे यह बात साबित होती है कि लिक्विड प्लस की श्रेणी में मुद्रा का प्रवाह शुरू हो चुका है। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि सेबी के नए नियमों की वजह से भी ऐसा हो रहा है। सेबी के सभी लिक्विड फंड के लिए केवल तीन महीने के मैच्युरिटी पेपर का होना ही जरू री होता है। एक फंड मैनेजर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'इससे रिटर्न में आगे गिरावट हो सकती है। अब मार्क टु मार्केट पेपर को खत्म करना होगा।'

सेबी के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक फरवरी से लिक्विड फंड केवल 182 दिनों के पेपर में निवेश कर सकते हैं और मई से 90 दिनों के पेपर में निवेश कर सकते हैं। अक्टूबर में जब म्युचुअल फंड उद्योग को बहुत झटका लगा और एक महीने के अंदर 97,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ तब सेबी नए नियमों के साथ आई।

Keyword: headache of return to liquid fund,
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