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डेट फंडों के जोखिम को लेकर सतर्क हुए निवेशक

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई June 07, 2019

डेट फंडों को इक्विटी फंडों की तरह जोखिम भरा नहीं माना जाता था। लेकिन रेटिंग घटाने की हालिया घटनाओं से पता चलता है कि डेट में निवेश जोखिम भरा है और अगर कंपनियां ऋण भुगतान में डिफॉल्ट करती हैं तो निवेशक अपनी पूंजी गंवा सकते हैं। पिछले कुछ महीनों में हुई परेशानी निवेशकों के लिए शायद सतर्क होने का इशारा कर रहा है, जिनकी प्राथमिकता सुरक्षा व नकदी से ज्यादा रिटर्न की थी। यहां प्रमुख श्रेणियों व उससे जुड़े जोखिम का ब्योरा पेश किया जा रहा है।
 
लिक्विड फंड
 
ये फंड डेट व 91 दिन तक की परिपक्वता अवधि वाली मनी मार्केट प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। डेट श्रेणी में इन फंडों को सबसे सुरक्षात्मक माना जाता है क्योंकि इसकी अवधि काफी कम होती है, लेकिन इसमें क्रेडिट जोखिम भी है। उदाहरण के लिए 10 सितंबर को कुछ लिक्विड फंडों का एनएवी 1 फीसदी घट गया जब रेटिंग एजेंसियों ने आईएलऐंडएफएस की तरफ से जारी ऋण प्रतिभूतियों की रेटिंग घटा दी। हालांकि लिक्विड फंडों के एनएवी में ऐसी बड़ी गिरावट के उदाहरण नगण्य हैं।
 
अल्पावधि-मध्यम अवधि वाले फंड
 
ये फंड डेट और एक से चार साल तक परिपक्व होने वाले मनी मार्केट प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। ये योजनाएं परिपक्वता अवधि के अलावा क्रेडिट जोखिम के साथ आते हैं। फंड्सइंडिया डॉट कॉम की म्युचुअल फंड शोध प्रमुख विद्या बाला ने कहा, इन श्रेणियों में यह स्पष्ट तौर पर नहीं बताया जाता है लेकिन फंड हाउस के पास क्रेडिट जोखिम उठाने की छूट होती है। इन श्रेणियों का कोई विशिष्ट मानक नहीं होता कि उनका क्रेडिट जोखिम कितना होना होगा। इसके परिणामस्वरूप जब तक फंड हाउस के पास स्पष्ट रणनीति नहीं होती, यह संभव है कि फंड हाउस क्रेडिट जोखिम से दूर र हे और ऐसे फंड पर हमें अतिरिक्त प्रतिफल मिले।
 
क्रेडिट रिस्क फंड
 
ये फंड अपनी परिसंपत्तियों का न्यूनतम 65 फीसदी एए रया इससे नीचे रेटिंग वाली प्रतिभूतियों में करते हैं। ऐसे फंड जानबूझकर क्रेडिट जोखिम उठाते हैं और उन मौकों से फायदा उठाने की कोशिश करते हैं जहां उच्च क्रेडिट रेटिंग के अभाव वाले कॉरपोरेट बॉन्डों में ज्यादा फायदा मिले। इस श्रेणी में एक साल का रिटर्न 3.2 फीसदी है और डेट श्रेणियों में यह दूसरा सबसे कमजोर आंकड़ा है। वैल्यू रिसर्च से यह जानकारी मिली।  ऐसे फंड आर्थिक माहौल में सुधार से फायदा उठा सकते हैं और उससे भी जब रेटिंग बढ़ाए व घटाए जाने का अनुपात बढ़े। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे फंड धनाढ्य निवेशकोंं आदि के लिए उपयुक्त होते हैं। इसमें निवेश पर विचार करने से पहले एक चीज का ध्यान रखना होता है और वह है पोर्टफोलियो में उतारचढ़ाव। अगर दो फंड हाउस के पोर्टफोलियो का 40 फीसदी ए रेटिंग वाली प्रतिभूतियों में है तो उस पोर्टफोलियो में निवेश करना चाहिए जिसका निवेश 20-30 प्रतिभूतियों में फैला होता है, न कि 10 प्रतिभूतियों में फैले निवेश में हमें अपनी रकम झोंकनी चाहिए।
 
लंबी अवधि, डायनेमिक व गिल्ट 
 
ये लंबी अवधि वाले फंड होते हैं और पोर्टफोलियो की अवधि सात साल से ज्यादा होती  है। ये ब्याज दर के जोखिम के साथ आते हैं क्योंकि ये प्राथमिक तौर पर अवधि पर भरोसा करते हैं। ये फंड कभी-कभी उतारचढ़ाव भरे व नकारात्मक रिटर्न की अïवधि के साथ होते हैं और ब्याज दर के चक्र के सुधरने तक यानी लंबी अवधि तक निवेशकों को निवेशित रहना पड़ सकता है। पिछले कुछ महीनों में लगातार तीन बार ब्याज कटौती और आगामी महीनों में और कटौती की संभावना ऐसे फंडों के रिटर्न के लिए सही रही है।
 
फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान 
 
एफएमसी हालांकि निवेशकों को ब्याज दर के जोखिम से बचने में मदद कर सकता है, लेकिन यह क्रेडिट जोखिम के प्रति अतिसंवेदनशील होता है। खास तौर से मौजूदा माहौल में यह प्रासंगिक है जब कई कॉरपोरेट डिफॉल्ट व रेटिंग में कमी के जोखिम का सामना कर रहे हैं। क्लोज ऐंडेड होने के चलते एफएमपी में जोखिम का स्तर ज्यादा होता है, जिसका मतलब यह हुआ कि सभी प्रतिभूतियां एक ही दिन परिपक्व होते हैं। बाला ने कहा, हम सामान्य तौर पर निवेशकों को एफएमपी की सलाह नहींं देते क्योंकि जोखिम के प्रति जागरूक होने के बाद भी आप निवेश की निकासी नहीं कर सकते।
Keyword: fund, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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