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कम से कम वितरण प्रक्रिया का जरूर निजीकरण करें: बंगा

ज्योति मुकुल और श्रेया जय /  June 07, 2019

विश्लेषक उदय के जरिये विद्युत वितरण सुधारों पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय राजधानी की तीन निजी विद्युत वितरण कंपनियों में से एक टाटा पावर दिल्ली में प्रक्रियाओं के निजीकरण को क्षेत्र के घाटे एवं कर्ज के चक्र से उबरने के अहम कारक के रूप में देख रही है। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी संजय बंगा के ज्योति मुकुल और श्रेया जय के साथ साक्षात्कार के अंश : 

 
उदय कार्यक्रम के बारे में आपकी क्या राय है। क्या इससे सार्वजनिक क्षेत्र की विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रदर्शन में सुधार आया है? 
 
केंद्र सरकार के बड़ी मात्राा में धन मुहैया कराने से पिछले 3-4 वर्षों के दौरान नेटवर्क में सुधार हुआ है। सौभाग्य और आरएपीडीआरपी योजनाओं की बदौलत विद्युत नेटवर्क प्रत्येक घर तक पहुंच गया है। डिस्कॉम के प्रबंधन के लिहाज से नुकसान का स्तर अब भी ऊंचा है और परिचालन एवं प्रशासनिक कुशलता कमजोर है। अब भी दिन में कटौती होती है और ट्रांसफॉर्मरों के खराब होने की दर 10 से 12 फीसदी है, जिससे उनका घाटा बढ़ता है। उन्हें अपनी संसाधन क्षमता, जवाबदेही और ग्राहक सेवा  सुधारने की जरूरत है। इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी की जरूरत है। अगर वे निजीकरण भी नहीं करती हैं तो कम से कम प्रक्रियाओं का निजीकरण किया जाना चाहिए और स्वामित्व सरकार के पास रखा जा सकता है। आखिर यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिससे सरकार को बाहर हो जाना चाहिए और इसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए खोलना चाहिए ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें। 
 
पूर्णतया निजीकरण के बजाय दिल्ली जैसे वितरण फ्रैंचाइजी (डीएफ) मॉडल को आप किस तरह आंकते हैं? 
 
सार्वजनिक-निजी भागीदारी का दिल्ली मॉडल सबसे अच्छा है क्योंकि आप ग्राहकों के प्रति जवाबदेह होते हैं। यह कारोबारी मॉडल पारेषण या उत्पादन परियोजना के समान है, जहां आपको इक्विटी पर निश्चित प्रतिफल मिलता है और शेष लाभ ग्राहकों को मुहैया कराया जाता है। जवाबदेही से लंबी अवधि की योजना बनाने में मदद मिलती है। डीएफ मॉडल निवेश को बढ़ावा नहीं देता है लेकिन अल्पावधि में कमाई करने में मदद करता है। इस क्षेत्र को प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने की जरूरत है। 
 
दिल्ली के कुछ हिस्सों में स्मार्ट मीटर लगाने का आपका अनुभव कैसा रहा है? क्या इसे शुरू करना व्यावहारिक है? 
 
केंद्र सरकार स्मार्ट मीटरों को लेकर राष्ट्रीय शुल्क नीति लेकर आई है। उदय योजना में भी सुझाव दिया  गया है कि डिस्कॉम की कुशलता में सुधार का एक तरीका स्मार्ट मीटर लगाना है। हमने नियामक से दिल्ली में स्मार्ट मीटर लगाने की मंजूरी देने के लिए कहा था। टाटा पावर के लिए यह फायदेमंद है क्योंकि यह घाटे को कम करने, भार का पूर्वानुमान लगाने और चोरी का बेहतर विश्लेषण करने में मदद करता है। 
 
क्या मीटरों पर खर्च से शुल्क में बढ़ोतरी होगी?
 
इस पर आने वाले खर्च की वसूली अन्य तरीकों से की जाएगी। शुल्क में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे भविष्य में शुल्क कम करने में मदद मिलेगी। 
 
क्या प्रीपेड मीटर की कोई योजना है? 
 
हमारे पास दिल्ली के लिए फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। हमारा घाटा 8 फीसदी से कम है। ऐसे मीटर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा उपयोगी हैं। 
 
दिल्ली में नेट मीटरिंग में बढ़ोतरी क्यों नहीं हुई?
 
दिल्ली में छतों पर सौर ऊर्जा प्लेटों से बिजली का उत्पादन बहुत अधिक नहीं है। इसकी वजह यह है कि यहां मांग से अधिक बिजली उपलब्ध है। इसके अलावा जगह की किल्लत है। 
 
ई-वाहन चार्जिंग को लेकर आपकी योजना कहां तक पहुंची है? 
 
हम चार्जिंग बुनियादी ढांचा स्थापित करना चाहते हैं क्योंकि डिस्कॉम ऐसा करने में बेहतर स्थिति में हैं। हालांकि ऐसा करने में दिल्ली सरकार की नीति कोई प्रोत्साहन नहीं देती है। 
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