बिजनेस स्टैंडर्ड - व्यक्तिगत ऋणशोधन के बदलेंगे नियम
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व्यक्तिगत ऋणशोधन के बदलेंगे नियम

रुचिका चित्रवंशी / नई दिल्ली June 07, 2019

व्यक्तिगत ऋणशोधन के लिए नियमों को दुरुस्त करते हुए सरकार ऋण की राशि के मुताबिक कर्ज समाधान की तीन श्रेणियां प्रस्तुत कर सकती है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'व्यक्तिगत ऋणशोधन के लिए वर्तमान मसौदा कॉरपोरेट ऋणशोधन प्रक्रिया की तरह ही है, जो चूककर्ता के लिहाज से थोड़ा असंगत प्रतीत होता है और हमें इसे दुरुस्त करने की जरूरत है।' 35,000 रुपये के प्रवेश स्तर का कर्ज किसी न्यायाधिकरण प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। कंपनी मामलों का मंत्रालय नए सिरे से ऐसे कर्ज के समाधान के लिए ऑनलाइन व्यवस्था करने की योजना बना रही है। मंत्रालय 10 लाख रुपये और इससे ऊपर के दो और स्लैब बनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें अनिवार्य और स्वैच्छिक दोनों तरह की मध्यस्थता का विकल्प होगा। इसमें समाधान नहीं होने पर मामले को कर्ज वसूली पंचाट (डीआरटी) में भेजा जाएगा।
 
व्यक्तिगत ऋणशोधन संहिता के अधिसूचित होने के बाद भारत में पहली बार कर्जदार और परिचालन ऋणदाता दोनों ऋणशोधन में जाने में सक्षम हो सकेंगे। इसके अलावा 35,000 रुपये तक के कर्ज, जिसके पास कोई संपत्ति या आय नहीं हो उन्हें इससे छूट मिल सकती है। इस कदम से असंगठित क्षेत्र का बड़ा हिस्सा, छोटे कर्जदार और उद्यमी प्रभावित होंगे। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'आज के समय में जो कानून है, वह कुछ ज्यादा ही जटिल है। हमने उन पहलुओं को चिह्नित किया है जिनमें बदलाव की जरूरत है। मौजूदा कानून में काफी बदलाव करने की आवश्यकता है।'
 
मौजूदा प्रणाली के अनुसार कॉरपोरेट कर्जदार को दिवालिया और ऋणशोधन समाधान के लिए राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट (एनसीएलटी) में जाना होता है, वहीं व्यक्तिगत ऋणशोधन के मामलों को ऋण वसूली पंचाट में भेजा जाता है। वर्तमान में डीआरटी में एक लाख से भी ज्यादा मामले लंबित हैं। उद्योग के एक विशेषज्ञ ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, 'वर्तमान प्रणाली पुरानी हो चुकी है। नए नियम बैंकों को उधारी जोखिम को बेहतर तरीके से आकलन करने में भी मदद करेंगे। प्रक्रिया को आसान और लागत प्रभावी बनाने के लिए व्यापक बदलाव करने होंगे।' 
 
सरकार उम्मीद कर रही है कि अधिकतर व्यक्तिगत ऋणशोधन के मामलों का समाधान कानूनी चरण में पहुंचने से पहले ही मध्यस्थता के माध्यम से हो जाएगा। डीआरटी से भी कहा गया है कि वह व्यक्तिगत ऋणशोधन के मामले ने लें। अधिकारियों के मुताबिक नीति को चरणबद्घ तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में उन व्यक्तियों के मामले लिए जाएंगे जो कॉरपोरेट समधान में जाने वाले मामलों के गारंटर होते हैं। भारतीय ऋणशोधन एवं दिवालिया बोर्ड नेे एक कार्य समूह का गठन किया है जो व्यक्तिगत और साझेदार फर्मों के ऋणशोधन और दिवालिया से संबंधित प्रावधानों को लागू करने की रणनीति पर अपना सुझाव देंगे। 
Keyword: IBC, code, IBBI, NCLT, RBI,,
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