बिजनेस स्टैंडर्ड - कर्ज चूक पर 30 दिन की मोहलत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 23, 2019 12:58 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

कर्ज चूक पर 30 दिन की मोहलत

अनूप रॉय और अभिजित लेले / मुंबई June 07, 2019

उच्चतम न्यायालय द्वारा गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) पर 12 फरवरी के परिपत्र को रद्द किए जाने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चूक के मामले में बैंकों को ज्यादा समय और लचीलेपन की अनुमति दी है। किसी खाते में चूक होने पर अब बैंक अपने हिसाब से तय कर सकते हैं कि उन्हें इन खातों के साथ क्या करना है। आरबीआई ने पहले कहा था कि 2,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक के चूक के मामलों का अगर 180 दिन में समाधान नहीं होता है तो उसे ऋणशोधन अदालत में ले जाना चाहिए। 12 फरवरी, 2018 को जारी परिपत्र में एक दिन की चूक को भी डिफॉल्ट मानने की बात कही गई थी। हालांकि नए दिशानिर्देश में आरबीआई ने न केवल एक दिन की चूक की सख्त शर्तों को हटा लिया है बल्कि बैंकों को अपने हिसाब से इसके पुनर्गठन की भी आजादी दी है। पहले समाधान योजना के लिए सभी ऋणदाताओं की सहमति जरूरी थी लेकिन अब कर्ज के हिसाब से 75 फीसदी और कुल ऋणदाताओं के 60 फीसदी की सहमति से ही इस पर निर्णय हो जाएगा और वह सभी ऋणदाताओं के लिए बाध्यकारी होगा।
 
भुगतान में चूक करने के बाद बैंकों को योजना पर विचार करने के लिए 30 दिन का वक्त मिलेगा और इस योजना को क्रियान्वित करने के लिए 180 दिन होंगे। अगर बैंकों के पास अलग रखने के लिए पर्याप्त पूंजी हो तो वे योजना के क्रियान्वयन में देरी भी कर सकते हैं। हालांकि बैंक चूककर्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय करते हैं तो उनके द्वारा अलग रखी गई पूंजी मुक्त कर दी जाएगी। विशेेषज्ञों का कहना है कि नए परिपत्र के अनुसार कर्जदारों पर बैंक की पकड़ थोड़ी कम होगी, वहीं उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद केंद्रीय बैंक के पास पर ज्यादा विकल्प नहीं होगा।
 
अभी यह दिशानिर्देश 2,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक के कर्ज वाले खातों पर लागू होंगे लेकिन अगले साल 1 जनवरी से 1,500 करोड़ रुपये और उससे अधिक के खाते इसके दायरे में आएंगे। इसमें कहा गया है कि 1,500 करोड़ रुपये से कम के मामलों को इसके तहत लाने के बारे में केंद्र्रीय बैंक घोषणा कर सकता है। नए नियमों के तहत बैंकों को चूक के बाद समाधान योजना तैयार करने और उसकी समीक्षा करने के लिए 30 दिन का वक्त मिलेगा। इस योजना में कंपनी को ऋणशोधन कार्रवाई में ले जाने का निर्णय भी शामिल हो सकता है। 30 दिन के बाद बैंकों को समाधान योजना लागू करने के लिए 180 दिन का वक्त मिलेगा। 12 फरवरी के परिपत्र में 30 दिन की मोहलत नहीं दी 
 
गई थी। समाधान योजना को लागू करने के मामले में कंसोर्टियम के सभी ऋणदाताओं को समीक्षा अवधि के 30 दिन के अंदर अंतर-ऋणदाता समझौता करना होगा। आईसीए के तहत बहुलांश ऋणदाताओं के अधिकार और कर्तव्य, असहमत ऋणदाताओं के हितों की रक्षा आदि निर्धारित किए जाएंगे। आरबीआई ने कहा कि समाधान योजना इस तरह होनी चाहिए जिससे असहमत ऋणदाताओं को भी कम से कम परिसपंत्ति की बिक्री मूल्य के अनुपात में पैसा मिल सके।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, court,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को अपनी डिजिटल करेंसी लानी चाहिए?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.