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ई-कॉमर्स के मसौदे में बदलाव के लिए जुटे कारोबारी व डिजिटल फर्में

करण चौधरी और शुभायन चक्रवर्ती / बेंगलूरु/नई दिल्ली June 06, 2019

मसौदा ई-कॉमर्स नीति और डेटा के स्थानीयकरण के प्रस्तावों में बदलाव की दौड़ में डिजिटल कॉमर्स फर्में और व्यापारियों के संगठन जुट गए हैं। उन्होंने अपनी सिफारिशें पेश की हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि नए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस विषय पर चर्चा करेंगे। 

मसौदा ई-कॉमर्स नीति और डेटा के स्थानीयकरण का प्रस्ताव आम चुनाव के पहले लाया गया था। ट्रेडरों के संगठन ने यह साफ कर दिया था कि वे मसौदा नीति में पूरी तरह से सुधार चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि इसमें छोटे खुदरा कारोबारियों और ट्रेडर्स के  हितों का ध्यान नहीं रखा गया है। 

कॉन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) और स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) जैसे संगठनों ने पहले ही गोयल से मुलाकात की योजना बनाई है। गोयल के जापान दौरे से वापस आने पर यह संगठन इस मसले पर बात करना चाहते हैं।

बहरहाल व्यापक संदर्भों को समझने व अंतिम ई-कॉमर्स नीति पर सरकार की डेटा संरक्षण कानून, सार्वजनिक नीति आदि के बारे में बात करने के लिए एमेजॉन इंडिया, फ्लिपकार्ट, फेसबुक सहित अन्य कंपनियां उद्योग एवं आंतरिक कारोबार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), वित्त मंत्रालय के साथ आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने की योजना बना रही हैं, जिससे विभिन्न मसलों पर नव गठित सरकार के रुख को समझा जा सके। डीपीआईआईटी के सूत्रों के मुताबिक मसौदा ई-कॉमर्स नीति में आगे बदलाव की संभावना है, जो आने वाले सप्ताहों में की जानी है। इससे नया मसौदा जारी करने में अभी और देरी होगी। 

सीएआईटी के मुताबिक ई-कॉमर्स नीति में सिर्फ विदेशी कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि घरेलू कारोबारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। सीएआईटी के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा, 'हर ई-कॉमर्स कारोबारी के लिे पंजीकरण की व्यवस्था होनी चाहिए, चाहे वह छोटा हो या बड़ा। मार्केटप्लेस व अन्य में साफ विभेद किया जाना चाहिए। नीति का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने का प्रावधान किया जाना चाहिए। नीति में अनुमानित मूल्य, भारी छूट और घाटे के वित्तपोषण पर लगाम लगाने की व्यवस्था हो, जिससे सबको काम करने का समान अवसर मिल सके।'

कई बार इस नीति को तैयार करने की तिथि घोषित किए जाने के बाद भी लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका। अब इसकी कोई आधिकारिक समय सीमा नहीं तय की गई है। डिजिटल कारोबार के नियमन और उनके लिए उचित माहौल बनाने को लेकर बनाई जा रही इस नीति की उद्योग और अन्य सरकारी एजेंसियों की कई बार आलोचना होती रही है।  इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तनकीक मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक डेटा संरक्षण कानून पारित हुए बगैर इस नीति को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि ये दोनों कानून बड़े पैमाने पर एक दूसरे के क्षेत्र में हस्तक्षेप करते हैं, खासकर डेटा संरक्षण के मामले में, और अगर इसका ध्यान नहीं रखा गया तो एक दूसरे से टकराव हो सकता है। 

नए वाणिज्य मंत्री ने निर्देश दिया है कि  जल्द बातचीत शुरू की जाए। उन्होंने डीपीआईआईटी के अधिकारियों से कहा है कि विभिन्न हिस्सेदारों से बात कर उन्हें एक मंच पर लाया जाए। कॉन्फेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सरकार ने पहले ही इस मसले पर तकनीक कंपनियों, कानून फर्मों व उद्योग संगठनों से नीति के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की है। इस कानून में डेटा का प्रवाह और विदेशी निवेश को शामिल किया जाना है। हमें नहीं मालूम कि अन्य मसलों जैसे ई-कॉमर्स के मानकों, टे्रड मार्क अधिकारों व ऑनलाइन सेवाओं के बारे में क्या फैसला किया गया है।' सिविल सोसाइटी संगठनों व हित समूहों ने भी डीपीआईआईटी सचिव रमेश अभिषेक को लिखित रूप से अपनी चिंताएं बताई हैं।
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