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आरबीआई नरम, दरें फिर कम

अनूप रॉय / नई दिल्ली June 06, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उम्मीद के अनुरूप रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती करने और अपने रुख को बदलकर नरम करने की घोषणा की। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास के इस रुख का मतलब है कि दरों में फिलहाल वृद्घि की संभावना नहीं है लेकिन आगे इसमें कटौती की गुंजाइश बन सकती है। इसके साथ ही आरबीआई ने आरटीजीएस और एनईएफटी शुल्क को भी खत्म कर दिया और एटीएम शुल्क की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन करेगा, ताकि शुल्क को तार्किक बनाया जा सके।

मौद्रिक नीति बयान में कहा गया कि वृद्घि को गति देने और खास तौर पर मांग बढ़ाने के लिए दर में कटौती की गई है। मौद्रिक समिति के सभी छह सदस्यों ने दर घटाने का पक्ष लिया। बयान में कहा गया कि अर्थव्यवस्था में नरमी के साथ ही निवेश गतिविधियों और खपत मांग में कमी चिंता का विषय है।

आरबीआई ने कहा कि पिछली दो कटौतियों के बाद भी मुद्रास्फीति मौद्रिक नीति समिति द्वारा तय 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे बनी रहेगी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है और वित्तीय तंत्र की स्थिरता के हितों के लिए जरूरी कदम उठाने से परहेज नहीं करेगा।

इससे संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक खास तौर पर तीसरी सबसे बड़ी आवास वित्त कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनैंस के डिफॉल्ट करने के बाद एनबीएफसी क्षेत्र में तरलता बढ़ाने के कुछ उपायों पर विचार कर सकता है। इस बारे में दास ने कहा, 'हम मुख्य रूप से बैंकों के हितों को देखेंगे, जिनका एनबीएफसी में काफी ज्यादा निवेश है। आवास वित्त कंपनियों का विनियम नैशनल हाउसिंग बैंक द्वारा किया जाता है।'

दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति बैठक में नीतिगत दरें घटाए जाने के बाद रीपो दर अब 5.75 फीसदी रह गई है। फरवरी के बाद यह लगातार तीसरा मौका है जब आरबीआई ने रीपो दर में 25 आधार अंक की कटौती की है। पिछली दो कटौती के बाद नए कर्ज के लिए उधारी दर में औसतन 21 आधार अंक की कमी आई है। लेकिन पुराने ऋण पर ब्याज दर अब भी ऊंची बनी हुई है और इसमें औसतन 4 आधार अंक का इजाफा हुआ है।

दास ने कहा कि आम तौर पर ग्राहकों को दरों में कटौती का पूरा लाभ देने में चार से छह महीने का वक्त लगता है। लेकिन इस बार इसका लाभ तेजी से दिया जाएगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि तरलता की स्थिति सहज बनी हुई है, जिससे इस कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बैंक भी इस ओर ध्यान देंगे। अभी वाहन और आवास ऋण में थोड़ी कमी आई है और आगे यह और कम होगी।

लेकिन बैंकरों का कहना है कि इस कटौती का लाभ सीधे तौर पर पहुंचाना आसान नहीं होगा क्योंकि छोटी बचत दरें ज्यादा हैं। बैंक जब तक जमा दरें कम नहीं करेंगे वे उधारी दर घटाने में सक्षम नहीं हो सकते। हालांकि दरों में तत्काल कुछ कटौती की उम्मीद की जा सकती है। 

एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'रुख को नरम करने से हम अगले कुछ महीनों में आरबीआई की ओर से तरलता बरकरार रखने की उम्मीद कर सकते हैं। इससे दरों में कटौती का लाभ पहुंचाने में सहूलियत होगी।' हालिया मौद्रिक नीति की बैठक से इतर इस बार सभी छह सदस्यों ने एकमत से दर घटाने का पक्ष लिया। आरबीआई ने 2019-20 के लिए आर्थिक वृद्घि दर के अनुमान को 7.2 फीसदी से कम कर 7 फीसदी कर दिया।

पहली छमाही में जीडीपी वृद्घि दर 6.4 से 6.7 फीसदी रह सकती है, वहीं दूसरी छमाही में जीडीपी वृद्घि दर 7.2 से 7.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड की मुख्य अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय ने कहा कि दरों में कटौती का बॉन्ड बाजार ने स्वागत किया और 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 7 आधार अंक घटकर 6.93 फीसदी रहा। बाजार की नजर अब आरबीआई के नए तरलता प्रबंधन प्रारूप पर है। शाह को अगस्त में रीपो दर में एक और कटौती की उम्मीद है। आरबीआई अपने तरलता प्रबंधन प्रारूप की समीक्षा के लिए आंतरिक कार्य समूह से सलाह ले रहा है। इसकी समीक्षा पिछली बार 2014 में की गई थी। इस कवायद का मकसद प्रारूप को सरल बनाना है।

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