बिजनेस स्टैंडर्ड - कर लक्ष्य घटाने की सलाह
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कर लक्ष्य घटाने की सलाह

कर अधिकारी बजट में कर संग्रह लक्ष्य 6 फीसदी कम करने पर दे रहे जोर
दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 06 05, 2019

2019-20 का पूर्ण बजट

अगर लक्ष्य को 6 फीसदी कम किया गया तो 1.5 लाख करोड़ रुपये कम हो सकती है कर वसूली
पिछले वित्त वर्ष के संशोधित लक्ष्य को भी नहीं किया जा सका हासिल
व्यक्तिगत आयकर का लक्ष्य 15 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए
अधिकारियों ने कहा, कर संग्रह का लक्ष्य हो ज्यादा तार्किक

बिजनेस स्टैंडर्ड कर लक्ष्य घटाने की सलाहकर अधिकारी 2019-20 के पूर्ण बजट में अंतरिम बजट की तुलना में कर राजस्व संग्रह का लक्ष्य 6 फीसदी तक कम करने पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि कर संग्रह के लक्ष्य को ज्यादा तार्किक बनाने के लिए इसमें कमी करनी चाहिए। आंकड़ों की बात करें तो लक्ष्य में 6 फीसदी कटौती से करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आएगी। हालांकि नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में कमजोर राजस्व की स्थिति को लेकर चिंता जता चुकी हैं। 

प्रत्यक्ष कर अधिकारी अंतरिम बजट में निर्धारित कर संग्रह लक्ष्य को 60 से 70 हजार करोड़ रुपये या 4.3 से 5.1 फीसदी कम करने पर दबाव दे रहे हैं। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो अंतरिम बजट के प्रत्यक्ष कर संग्रह का 13.8 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य कम होकर पूर्ण बजट में 13 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। इसी तरह अप्रत्यक्ष करों, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) संग्रह में वृद्धि के लक्ष्य में 70 हजार करोड़ से 80 हजार करोड़ रुपये की कटौती करने की बात कही जा रही है। अंतरिम बजट में सीजीएसटी संग्रह का लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये कम किया गया था और इसमें 50,000 करोड़ रुपये की और कमी आ सकती है।

कर संग्रह के लक्ष्य को कम करने की मांग इसलिए की जा रही है क्योंकि 2018-19 में वास्तविक कर संग्रह संशोधित अनुमान से 1.6 लाख करोड़ रुपये कम रहा। अधिकारियों के अनुसार आर्थिक विकास में नरमी के बीच मौजूदा साल के लिए तय लक्ष्य को हासिल करना काफी कठिन होगा। अधिकारियों का कहना है कि सरकार भी स्वीकार कर रही है कि पहली तिमाही के अंत तक अर्थव्यवस्था में नरमी बनी रह सकती है, ऐसे में जब तक विकास में तेजी नहीं आएगी, राजस्व संग्रह में भी ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। अगर लक्ष्य में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाता है तो राजस्व संग्रह को 29 फीसदी बढ़ना होगा। 2018-19 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.8 फीसदी रही, जो पहले अग्रिम अनुमान 7.2 फीसदी और दूसरे अनुमान 7 फीसदी से भी कम है।

बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.8 फीसदी रही जो 20 तिमाहियों में सबसे कम रही। विनिर्माण और निवेश गतिविधियों में नरमी से विकास दर प्रभावित हुई है जबकि कर संग्रह में इन कारकों का अहम योगदान होता है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अगर वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही तक अर्थव्यवस्था में नरमी बनी रहने की उम्मीद है तब राजस्व संग्रह में सुधार का क्या आधार हो सकता है।' उन्होंने कहा कि लक्ष्य को ज्यादा वास्तविक बनाने पर काम करना होगा और कर संग्रह में 15 से 17 फीसदी की वृद्धि समुचित लक्ष्य हो सकता है। 

वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने पिछले हफ्ते कहा था, 'चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में नरमी बनी रह सकती है लेकिन दूसरी तिमाही के बाद हमें विकास दर और खपत में अच्छी तेजी आने की उम्मीद है।' प्रत्यक्ष कर में व्यक्तिगत आयकर में खास तौर पर कमी की जा सकती है। अगर इसमें कमी नहीं की गई तो अंतरिम बजट में वित्त वर्ष 2019 के वास्तविक संग्रह से इसमें 30 फीसदी ज्यादा वसूली का लक्ष्य रखा गया है। यह नोटबंदी और आय घोषणा योजना वाले साला 2016-17 के अब तक 26 फीसदी की सर्वाधिक वृद्धि से भी ज्यादा है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2019 में प्रत्यक्ष कर संग्रह के लक्ष्य को 50,000 करोड़ रुपये बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये किया गया था। लेकिन यह वृद्धि मुख्य रूप से निगमित कर खंड में की गई थी और संयोग से यह लक्ष्य हासिल कर लिया गया था। वित्त वर्ष 2020 के लिए भी निगमित कर को अंतरिम बजट लक्ष्य के स्तर पर बरकरार रखा जा सकता है।
Keyword: budget, income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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