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व्यापार युद्ध की आंच में झुलसीं जिंस

राजेश भयानी / मुंबई June 05, 2019

चीन के साथ व्यापार युद्ध के नए दौर की शुरुआत और बाद में अमेरिका द्वारा इसकी आंच कई अन्य राष्ट्रों तक पहुंचाए जाने का सबसे ज्यादा असर औद्योगिक जिंसों पर पड़ा है। अमेरिका ने चीन से आयात पर भारी शुल्क लगाया था जिससे आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ गई और चीन ने अमेरिका के इस कदम पर प्रतिक्रिया देकर स्थिति को बद से बदतर कर दिया। इस वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद से ही जिंसों में गिरावट आ रही है लेकिन इस व्यापार युद्ध के कारण मई से कीमतों में तेज गिरावट आई है। मई से अधिकांश जिंसों के दाम पांच से 15 फीसदी तक नीचे हैं। तांबे और जस्ते में 10 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है जबकि कच्चे तेल और तापीय कोयले के दाम 13 फीसदी से भी ज्यादा गिरे हैं।
 
पिछले हफ्ते अमेरिका ने भारत, जापान और अन्य देशों को दिए जाने वाले तरजीह लाभों (इन देशों से अमेरिका आने वाली वस्तुओं पर कम शुल्क लगाते हुए) की सामान्यीकृत व्यवस्था खत्म कर दी है। इसमें कहा गया है कि संबंधित देशों ने अमेरिका की ओर से आयातित वस्तुओं को लाभ दिए जाने के संबंध में अनुकूल प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे वैश्विक बाजार में भी धारणा बिगड़ी है क्योंकि इससे व्यापार युद्ध बढऩे का संकेत मिलता है जिससे आर्थिक विकास धीमा पड़ता है और जिंसों की मांग भी।
 
पिछले दो सप्ताह में ब्रेंट क्रूड तेल में तेजी से गिरावट आई है और अपने हालिया शीर्ष स्तर से यह 20 प्रतिशत नीचे है। केडिया कमोडिटीज के निदेशक अजय केडिया ने कहा कि रुपये की मजबूती ने भारत में जिंसों की कीमतों को और कमजोर कर दिया है। रुपये की मजबूती की वजह से एमसीएक्स पर क्रूड फिसलकर तकरीबन चार महीने के निचले स्तर 3,700 पर आ गया है क्योंकि अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध और मेक्सिको पर शुल्क का खतरा वैश्विक कच्चे तेल की मांग को कम कर देगा। मई के अंत में अमेरिकी तेल उत्पादन बढ़कर 1.23 करोड़ बैरल प्रतिदिन हो चुका है जबकि रूस में 1.111 करोड़ बैरल प्रतिदिन और सऊदी अरब में 96.5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन किया गया है। लेकिन अब कीमतों में तकनीकी रूप से कुछ उछाल आ सकती है। केडिया को इस बात की भी उम्मीद है कि सऊदी अरब द्वारा इस महीने के अंत में ओपेक की रूस के साथ बैठक के संकेत दिए जाने से लगता है कि कच्चे तेल की अधिक आपूर्तिसे बचने के लिए वैश्विक आपूर्ति पर नियंत्रण जारी रहेगा जिससे कच्चे तेल की कीमतों में आ रही गिरावट को मदद मिलेगी।
 
धातु, कच्चा तेल और कोयले जैसी सभी जिंसों में गिरावट आ रही है। हालांकि कुछ महीने पहले ब्राजील में खदान बंद होने के बाद जारी कमी की वजह से लौह अयस्क के दाम बढ़ रहे हैं। व्यापार युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति द्वारा वैश्विक स्टॉक में वृद्धि के अनुमान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास तक की कीमतें भी गिर चुकी हैं। तापीय कोयले की कीमतें भी गिर रही हैं क्योंकि अब प्राकृतिक गैस बिजली संयंत्रों के विकल्प के रूप में उभर रही है जिससे तापीय कोयले की मांग कम हो रही है।
Keyword: america, china, iindia, trade, jins,,
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