बिजनेस स्टैंडर्ड - 'राजकोषीय प्रोत्साहन को लेकर सावधानी बरते सरकार'
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'राजकोषीय प्रोत्साहन को लेकर सावधानी बरते सरकार'

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली June 05, 2019

अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन दिए जाने को लेकर अर्थशास्त्रियों ने सरकार को सावधानी बरतने की सलाह दी है, जिसकी वृद्धि दर घटकर वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में 5 साल के निचले स्तर 5.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा है कि अगर इसकी जरूरत है तो यह 2008-09 में दिए गए प्रोत्साहन से अलग रूप में होनी चाहिए, जब लीमन ब्रदर्स के धराशायी होने के बाद अर्थव्यवस्था पर वैश्विक मंदी का असर पडऩे पर दिया गया था। कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अभी प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए। 
 
कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पानगडिया ने कहा, 'राजकोषीय प्रोत्साहन की कोई बात गलत सलाह है। सरकार को निश्चित रूप से राजकोषीय समेकन का पालन करना चाहिए।' उन्होंने कहा कि अगर उधारी में बढ़ोतरी कर वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है तो इससे निजी निवेश बढ़ेगा और यह ज्यादा उत्पादक और प्रभावी होगा। इसके साथ ही उन्होंने सलाह दी की रिजर्व बैंक को नीतिगत दरों में 50 आधार अंक की कटौती पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
 
अर्थशास्त्री लॉर्ड मेघनाद देसाई ने भी किसी अफरातफरी से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों में अस्थायी उतार चढ़ाव से बहुत चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'तिमाही जीडीपी में अस्थायी उतार चढ़ाव को सामान्य रूप से लेने की जरूरत है। मुझे पता है कि एक ट्रेंड दिख रहा है, लेकिन चार तिमाहियों में भी पहले के 4 साल की तुलना में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई है।'   नई सरकार ने निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्री बनाया है। देसाई ने कहा कि उन्होंने संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में निजी क्षेत्र के साथ काम किया है। उन्होंने कहा, 'उन्हें आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए। घबराने की कोई जरूरत नहीं है। उन्हें जल्द बजट पेश करना चाहिए क्योंकि फरवरी का बजट केवल लेखानुदान था। वह सही संदेश दे सकती हैं।' 
 
इंडिया रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि सरकार को 2008-09 की तरह का खपत प्रोत्साहन नहीं देना चाहिए। प्रोत्साहन ऐसा होना चाहिए, जिसका अर्थव्यवस्था पर लंबे समय पर बुरा असर न रहे। उन्होंने कहा, 'दूसरे शब्दों में, प्रोस्ताहन पूंजीगत व्यय पर आधारित होना चाहिए न कि खपत पर।' पंत ने कहा कि  सरकार को दीर्घावधि कदम उठाने चाहिए। येस बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री शुभदा राव ने कहा कि चुनाव से जुड़ी अनिश्चितताएं खत्म हो गई हैं और सरकार को अब ग्रामीण खपत बहाल करने, सार्वजनिक निजी हिस्सेदारी के माध्यम से पूंजीगत व्यय बढ़ाने और सरकारी इकाइयों में आगे और हिस्सेदारी घटाने पर काम करना चाहिए। भारतीय स्टेट बैंक समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा कि अगर राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2020 में बढ़कर 3.5 प्रतिशत हो जाता है तो कोई मुसीबत नहीं आ जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की किसी गिरावट का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय में किया जा सकता है और और बजट से इतर उधारी से बचना चाहिए।  ईवाई में मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने सुझाव दिया कि स्थिरीकरण कोष स्थापित किया जाए जिसका परिचालन विशेष उद्देश्य इकाई करे।
Keyword: india, economy, GDP,,
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