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व्हाट्सऐप के सहारे लगाई ममता के किले में सेंध

ईशिता आयान दत्त और अभिषेक रक्षित /  June 05, 2019

पश्चिम बंगाल में पांचवें चरण के मतदान से दो दिन पहले राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आरामबाग सीट पर प्रचार के लिए चंद्रकोण से गुजर रही थीं कि लोगों के एक समूह ने 'जय श्री राम' के नारे लगाने शुरू कर दिए। ममता बनर्जी को गुस्सा दिलाने के लिए यह काफी था और उन्होंने कार रोककर लोगों को फटकार लगाई। दिन के आखिर तक यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया और बहुत से लोगों ने व्हाट्सऐप पर इसे देखा। आईटी सेल के साइबर लड़ाके इस वीडियो को वायरल करने का श्रेय लेने में लगे थे जिसने आगामी चुनावों के लिए कई तरह से माहौल बनाने में मदद की। पहले से ही ध्रुवीकरण से प्रभावित लोग जनमानस में पूछने लगे कि क्या जय श्री राम कहना कोई गुनाह है? दरअसल, अनजाने में ही सही, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख भाजपा के चक्रव्यूह में फंस गई थीं। 

 
भाजपा की आईटी सेल ने बहुत पहले ही व्हाट्सऐप की क्षमता को पहचान लिया था। लोकसभा चुनाव की तैयारी के सिलसिले में पार्टी की पहली कार्यशाला 16-18 महीने पहले हुई थी। भाजपा के एक सूत्र ने बताया, 'हमने पाया कि इंटरनेट का उपयोग करने वालों में से आधे या तो फेसबुक पर थे या ट्विटर पर, लेकिन वे सभी एक साथ व्हाट्सऐप पर मौजूद थे।' बंगाल भाजपा में आईटी और सोशल मीडिया संयोजक उज्ज्वल पारिख के लिए यह शानदार था और ममता बनर्जी से आगे निकलने के लिए आवश्यक भी। 2019 लोकसभा चुनाव में लोगों तक पार्टी का संदेश प्रसारित करने में व्हाट्सऐप की अहम भूमिका रही है। पश्चिम बंगाल की 9 करोड़ जनसंख्या में से 3 करोड़ लोग स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं जो साफ तौर पर व्हाट्सऐप की महत्त्वपूर्ण भूमिका की ओर इशारा करता है। 
 
पार्टी के एक सूत्र ने बताया, 'करीब 55,000 व्हाट्सऐप समूह बनाए गए थे और आईटी सेल इनपर निगरानी रख रहा था। इनके जरिये लोगों तक जानकारी भेजी जा रही थी। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग अधिकांश लोग करते हैं।' हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पार्टी फेसबुक या ट्विटर पर सक्रिय नहीं रही। पिछले 60 दिनों में पार्टी के 22 करोड़ फेसबुक इंगेजमेंट और 40 लाख ट्विटर इंप्रेशन रहे। लेकिन व्हाट्सऐप के जरिये भाजपा सामग्री पर नियंत्रण बनाए रही। प्रतीक कहते हैं, 'फेसबुक और ट्विटर एल्गोरिद्म का उपयोग करते हैं। जैसे, फेसबुक पर जब कोई सामग्री अपलोड की जाती है तो वह पहले कुछ लोगों तक पहुंचती है। इससे मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर यह या तो और अधिक लोगों तक पहुंचती है या वहीं ड्रॉप हो जाती है। लेकिन व्हाट्सऐप की मदद से हम लाक्षित व्यक्तियों तक आसानी से पहुंच बना लेते हैं।'
 
साथ ही, व्हाट्सऐप का उपयोग करने में दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के मुकाबले डेटा भी काफी कम खर्च होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह काफी कारगर होता है क्योंकि वहां डेटा पहुंच और गुणवत्ता काफी कम हो जाती है। भाजपा आईटी सेल का काम बिल्कुल स्पष्ट था। उन्हें अपने नेता और प्रत्याशियों के लिए ठोस मैदान तैयार करना था और पार्टी के लिए लोगों में विश्वास बनाना था। भाजपा के पास अकेले बंगाल में 10,000 साइबर लड़ाके मौजूद हैं। साइबर सेल भाजपा की उपलब्धियों या टीएमसी की विफलता पर एक मिनट की वीडियो बनाता था। ममता द्वारा जय श्री राम वाले नारों पर प्रतिक्रिया ने उनका काम और आसान कर दिया। 
 
तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि बंगाल में फेसबुक के लिए भाजपा का बजट 50 करोड़ रुपये था जो व्हाट्सऐप के मुकाबले एक छोटा हिस्सा रहा।  एक ओर भाजपा व्हाट्सऐप को मुख्य जरिया बनाती रही, वहीं तृणमूल ने 360 डिग्री संवाद का तरीका बनाए रखा। घर-घर जाकर संपर्क, ब्लॉक स्तरीय बैठकें और ममता बनर्जी की रैलियां इतनी प्रभावी नहीं हो सकी। तृणमूल के कैंपेन में 'प्रधानमंत्री हिसाब दो' नामक वेब सीरीज, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बयानों के एक घंटे के भीतर उसमें खामिया तथा झूठ बताने वाला 'जुमला मीटर' और पहली बार वोट करने वालों को आकर्षित करने के लिए फ्लैश मॉब आदि शामिल थे।
 
आखिरकार केंद्र में मोदी की वापसी के साथ ही चुनावी बुखार तो उतर गया लेकिन भाजपा के साइबर लड़ाकों ने 2021 विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरे मुद्दों के अलावा भाजपा राज्य में हिंसा को भी मुद्दा बनाएगी। स्पष्ट है, इस बार बंगाल में टीएमसी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होगी। 
Keyword: west bengal, mamta, election, TMC, BJP,,
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