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बंगाल में भाजपा ठोंक रही ताल

अभिषेक रक्षित /  June 05, 2019

पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस से आगे निकलने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपना संगठनात्मक ढांचा मजबूत करना शुरू कर दिया है और पार्टी 'सोए हुए समर्थकों' को जगाने तथा बूथ स्तर पर जाकर सदस्यता दिलाने पर काम कर रही है।  पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी को सबसे अधिक नुकसान सक्रिय सदस्यों और नेताओं की कमी और स्थानीय विरोधी पार्टियों (तृणमूल, कांग्रेस और वाम दल) की आपसी लड़ाई में आगे निकलने के भरोसे से होता है। पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई के उपाध्यक्ष चंद्र कुमार बोस कहते हैं, '2019 के लोकसभा चुनावों में हम कई बूथ पर पोलिंग कार्यकर्ता नहीं रख पाए। हमारी पार्टी की ओर से पोलिंग कार्यकर्ता होने पर भाजपा के संभावित मतदाता में आत्मविश्वास आता है। हमने सभी बूथ के हिसाब से सक्रिय सदस्यों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को जोडऩे के लिए काम शुरू कर दिया है।'

 
पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य में वोट बैंक बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और संदिग्ध तथा फर्जी मतदाताओं के नाम एवं पहचान का सत्यापन करने के कार्य में लगी है। भाजपा को लगता है कि इस गतिविधि से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लाक्षित संख्या तक पहुंचने में मदद मिलेगी। भाजपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि मोदी लहर और सत्ताधारी दल तृणमूल के खिलाफ सत्ता विरोधी कारकों ने भाजपा के लिए मतदान प्रतिशत बढ़ाने में मदद की। 
 
पिछली बार के केवल दो सीटों के मुकाबले इस बार 18 सीटें जीतने के बाद भाजपा का राज्य नेतृत्व सभी सदस्यों को सक्रिय होने, पार्टी का संदेश तथा विचारधारा फैलाने और नए कार्यकर्ताओं को जोडऩे के लिए कहा है। भाजपा के एक नेता ने कहा, 'राज्य में हमारे 1.5 लाख से अदिक सदस्य हैं लेकिन हम यह दावा नहीं कर सकते कि इनमें से अधिकांश सक्रिय हैं।' इन 'सोए हुए कार्यकर्ताओं' या निष्क्रिय कार्यकर्ताओं ने भाजपा के लिए मतदान तो किया लेकिन तृणमूल से टकराव की आशंका में खुद को पार्टी गतिविधियों में शामिल नहीं किया। बोस कहते हैं, 'तृणमूल कई बार हमारे कार्यकर्ताओं को धमकाने और उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियां करती है जिससे वे उसके आगे झुक जाएं। अब हम संख्या में मजबूत हो रहे हैं और इन निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से जागने तथा पार्टी के लिए काम शुरू करने को कह रहे हैं।'
 
भाजपा जैसे कैडर आधारित राजनीतिक दल के लिए सदस्यों की मजबूत संख्या न सिर्फ वोट पाने के लिए जरूरी है बल्कि पार्टी की बेहतर कार्यप्रणाली के लिए भी यह जरूरी है। इसके साथ, भाजपा सदस्यता कार्यक्रम को भी मजबूत बना रही है जिसमें नए वोटर से लेकर कभी भाजपा के पक्ष में मत देने वाले पुराने लोगों को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।  राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती बताते हैं कि राज्य में स्थिति मजबूत करने के लिए भाजपा को टीएमसी से अपनी ओर आने वाले कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना होगा और साथ ही सत्ता लाभ के लिए इनका रणनीतिक उपयोग सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि विधायकों, सांसदों और पार्षदों द्वारा दलबदल के साथ-साथ राजनीतिक समर्थकों का कारवां काफी मददगार होगा लेकिन साथ ही भाजपा को यह जानना जरूरी है कि इनको कैसे तथा कहां उपयोग किया जाए जिससे तृणमूल के साथ होने वाली राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मुकबला किया जा सके। चक्रवर्ती का मानना है कि राज्य में तृणमूल के विकल्प के तौर पर उभरना केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और राज्य में भाजपा नेतृत्व के कार्यों पर निर्भर करेगा। 
 
राज्य में सत्ता विरोधी लहर है और ममता सरकार पर राजनीतिक कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और डराने-धमकाने के आरोप हैं। वहीं, भाजपा ने खुद को लोगों के रक्षक के तौर पर पेश किया है। राज्य में भाजपा के पास 18 सांसद हैं जो अभी तक का सर्वश्रेष्ठ और शायद भाजपा की उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन है तथा अब पार्टी को सभी चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढऩा होगा। 
 
'जो हमसे टकराएगा चूर-चूर हो जाएगा'
 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को ईद के मौके पर लोगों को मुबारकबाद दी। इस दौरान उन्होंने विरोधी दलों, खासकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'त्याग का नाम है हिंदू, ईमान का नाम है मुसलमान, प्यार का नाम है ईसाई, सिखों का नाम है बलिदान, ये है हमारा प्यारा हिंदुस्तान...। इसकी रक्षा हम लोग करेंगे, जो हमसे टकराएगा वो चूर चूर हो जाएगा। यही हमारा नारा है।' उन्होंने आगे कहा कि मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है, वही होता है जो मंजूर-ए-खुदा होता है। ममता ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, 'कभी-कभी जब सूरज उगता है तो उसकी रोशनी बड़ी तीखी होती है लेकिन बाद में वह धीमी पड़ जाती है। उन्होंने जिस तेजी से ईवीएम पर कब्जा किया था, उतनी ही तेजी से पलायन कर जाएंगे।' दरअसल, हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य की 42 सीटों में से 18 पर जीत दर्ज की थी।  
Keyword: west bengal, mamta, election, TMC, BJP,,
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