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'पुरुष' ब्रांड की परिभाषा बदल रहा बाजार

विवेट सुजन पिंटो /  June 05, 2019

इस साल की शुरुआत में प्रॉक्टर ऐंड गैंबल (पीऐंडजी) ने अपने जिलेट ब्रांड के विज्ञापन में बदलाव किए। उनकी लोकप्रिय टैगलाइन 'दी बेस्ट मैन कैन गेट' से बदलकर 'दी बेस्ट मैन कैन बी' हो गई है। कंपनी का कहना है कि वह आदमी होने से जुड़ी रूढिय़ों और अपेक्षाओं को चुनौती देने के सफर पर चल रही है। भारत में अपने अभियान के तहत जिलेट उत्तर प्रदेश के एक गांव की दो लड़कियों की दिल को छू लेने वाली एक कहानी दिखाती है जो महिला-पुरुष अंतर को कम करने के लिए अपने पिता की नाई की दुकान को चलाती है। इससे जुड़ा हैशटैग बार्बरशॉपगल्र्स सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रिय हुआ। हालांकि इससे भी महत्त्वपूर्ण था वह संदेश, जो ब्रांड आम जनता के बीच भेजना चाहता था। पुरुषों के बारे में बात करने से अधिक यह विज्ञापन उन लड़कियों के धैर्य और साहस से भरा था। 

 
महिला-पुरुष परिदृश्य के लिए संवेदनशील और संतुलित सोच पर आगे बढऩे की जिलेट की यात्रा विशिष्ट नहीं है। हालिया महीनों में डियोड्रेंट, परफ्यूम, सामान, बीमा आदि से जुड़े बड़े और छोटे ब्रांड, सभी ने इस तरह के कदम उठाए हैं। हालांकि विचारणीय यह है कि किस कारण से ये सभी विज्ञापनदाता पुरुष ग्राहकों के लिए 'पुरुष' की परिभाषा बदल रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हैशटैग मीटू आंदोलन के चलते पुरुष केंद्रित ब्रांड ने ये बदलाव किए तो कुछ अन्य का कहना है कि यह एक एक सामान्य बदलाव है। हालांकि सभी इस बात पर जरूर सहमत हैं कि परिदृश्य बदल रहा है। अब ब्रांड महिला-पुरुष समानता पर अधिक बातें कर रहे हैं। हालांकि अभी भी महिला केंद्रित ब्रांड इसमें अहम भागीदारी कर रहे हैं जैसे सर्फ (एरियल का हैशटैग शेयरदीलोड, निरमा एडवांस का रितिक रोशन के साथ विज्ञापन और रिन का 'एव्रीवन कैन शाइन'), सैनिटरी नैपकिन (विस्पर का 'टच दी पिकल') और डिशवाशर (स्कॉच ब्राइट का हैशटैग 'घर सबका काम सबका') आदि। पुरुष केंद्रित ब्रांड भी अब इस दिशा में आगे आ रहे हैं और महिलाओं को वस्तु की तरह दिखाने जैसे पुराने तरीके को बदल रहे हैं। 
 
पिछले साल जून माह में यूनिलीवर की ब्रिलक्रीम ने अपना डिजिटल और टेलीविजन कैंपेंन लॉन्च किया जिसमें अभिनेता वरुण धवन और सिद्धार्थ मल्होत्रा की लोकप्रियता का लाभ लेते हुए समाज में यह संदेश भेजा गया कि एक सच्चे आदमी की पहचान होती है सभी का सम्मान करना, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। उस समय हिंदुस्तान यूनिलीवर का कहना था कि इस अभियान का उद्देश्य अपमानजनक भाषा और आक्रामक व्यवहार को दूर करके पुरुषों को बेहतर सामाजिक नागरिक बनने में मदद करना है। 
 
साइडवे कंसल्टिंग के सह संस्थापक अभिजीत अवस्थी कहते हैं, 'समाज में महिलाओं के योगदान के अहसास के अलावा इश तरह के बदलाव के पीछे बाजार संबंधी उद्देश्य भी छिपे हैं।' वह कहते हैं, 'पुरुष केंद्रित पारंपरिक ब्रांड के साथ साथ अधिकांश ब्रांड के लिए महिलाएं महत्त्वपूर्ण होती हैं। जैसे जैसे उनका आर्थिक सशक्तीकरण हो रहा है, पुरुष केंद्रित ब्रांड के लिए महिलाओं को ध्यान में रखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।' हालांकि इस तरह के ब्रांड के लिए यह बदलाव काफी चुनौतीपूर्ण है। जैसे, डियोड्रेंट ब्रांड को अपने वादों पर दोबारा विचार करना होगा। लंबे समय से वह इस विचारधारा को चला रहे हैं कि संबंधित डियो लगाने से कमरे/हॉल में मौजूद सबसे खूबसूरत महिला उनकी ओर आकर्षित हो जाती है। अब उन्हें इसमें संबंधित बदलाव के लिए काफी मेहनत करनी होगी। डियोड्रेंट ब्रांड लेयर शॉट का एक हालिया विज्ञापन ऑनलाइन सुरक्षा और महिलाओं की सुरक्षा की बात करता है। 
 
टिडल7 ब्रांड एंड डिजिटल के सह संस्थापक और चीफ क्रिएटिव ऑफिसर के एस चक्रवर्ती बताते हैं कि हैशटैग मीटू ने समाज में महिलाओं के लिए बनाई गई सोच के मुद्दे को काफी उठाया है और कंपनियां तथा विज्ञापनदाता इस पर बात कर रहे हैं। वह कहते हैं, 'मैं नहीं मानता कि इस बदलाव के लिए हैशटैग मीटू सीधे तौर पर जिम्मेदार है। महिला-पुरुष संबंधों से जुड़े विज्ञापनों में महिलाओं को वस्तु की तरह दिखाने से नुकसान हो सकता है। सभी विज्ञापन एक तरह से ही काम कर रहे हैं। आज के समय में महिला-पुरुष समानता पर बात करना समसामयिकी है और बाजार के तत्त्व समसामयिकी विषयों को पसंद करते हैं।' 
 
विशेषज्ञ कहते हैं कि कुछ पुरुष केंद्रित ब्रांड हैशटैग मीटू के बढऩे के बाद लिंगीय-तटस्थता वाले मंच की ओर बढ़ रहे हैं जिसे हैशटैग मीटू का काउंट मूवमेंट कहा जा सकता है। उदाहरण के लिए, इमामी के 'ही' डियोड्रेंट का हालिया विज्ञापन महिला-पुरुषों के लिए अलग अलग सुगंधों की जरूरत पर रोशनी डालने के लिए महिला और पुरुष के अंतर का सहारा लेता है। 
Keyword: P&G, brand, women,,
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